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अलीगढ़: कूड़े के ढेर में मिली थी वैक्सीन से भरी 29 सिरिंज, ANM पर FIR हो गई

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में कूड़े के ढेर से कोविड वैक्सीन भरी 29 सिरिंज मिलीं. यानी इतनी वैक्सीन बर्बाद हो रही थीं. मामला शहर के सिविल लाइन थानाक्षेत्र के जमालपुर में स्थित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का है. स्थानीय प्रशासन ने एक्शन लेते हुए केंद्र की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. आरफीन जेहरा और संविदा ANM निहा खान के खिलाफ मामला दर्ज किया है.

इंडिया टुडे के रिपोर्टर मोहम्मद अकरम खान ने बताया कि इन पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, महामारी अधिनियम के उल्लंघन, साजिश और गलत जानकारी देने का आरोप है. दोनों के ख़िलाफ 9 धाराओं में मामला दर्ज किया गया है. सार्वजनिक नुकसान अधिनियम और महामारी अधिनियम भी लगी है. इसके अलावा चिकित्साधिकारी आरफीन जेहरा की वेतन वृद्धि रोककर उन्हें हरदुआगंज CHC ट्रांसफर कर दिया गया है. ANM निहा खान की भी संविदा समाप्त कर दी गई है.

पुलिस को दी गई तहरीर में बताया गया है कि वैक्सीन और कोल्ड चेन मैनेजर रविंद्र शर्मा ने 22 मई को जमालपुर अर्बन PHC का निरीक्षण किया था. उन्होंने बताया –

“कोविड पोर्टल के अनुसार उस तारीख़ को 18 से 44 साल की उम्र के 200 लोगों का टीकाकरण किया गया. इस समय 29 ऐसी सिरिंज मिलीं, जिनमें वैक्सीन भरी हुई थी और हब कटा था. पता चला कि बहुत से लाभार्थियों को बिना वैक्सीन लगाए उनके नामों को पोर्टल पर अपडेट किया गया. वॉयल से वैक्सीन भरने के बाद भी लाभार्थियों को टीका नहीं लगाया गया. ऐसा जानबूझकर किया हुआ प्रतीत होता है. इस पूरे मामले में प्रभारी चिकित्साधिकारी और फार्मासिस्ट ने टीकाकरण कर्मियों को ज़िम्मेदार ठहराया है. जांच समिति ने रिपोर्ट दी है कि संविदा ANM ने 15 टीके लगाने का बयान दिया, जबकि उस दिन 60-70 टीके लगाए. प्रभारी चिकित्साधिकारी के संज्ञान में यह मामला था, लेकिन उन्होंने CMO को कोई सूचना नहीं दी. इसलिए वे तथ्यों को छुपाने की दोषी हैं. निहा खान को 29 डोज लाभार्थी को न लगाकर कचरे में फेंकने का दोषी माना है.”

इस मामले में अलीगढ़ के CMO डॉ भानु प्रताप सिंह कल्याणी ने कहा –

“एक हफ्ते पहले सूचना मिली थी कि जमालपुर PHC पर एक कर्मचारी कोविड वैक्सीन लगाने के लिए लोगों के शरीर में सुई तो इंसर्ट करता है, लेकिन दवाई नहीं. मामला बहुत गंभीर था और इसमें हमने जल्दी जांच कराई थी. जांच रिपोर्ट के आधार पर हमने जो डॉक्टर वहां तैनात थी, उसको उसकी मूल जगह पर भेज दिया है. उसके दो इंक्रीमेंट रोक दिए हैं. जिस कर्मचारी के ऊपर आरोप थे, उसकी संविदा समाप्त कर दी है. FIR भी करा दी गई है. पूरे स्टाफ को वहां से हटा दिया है.”

जांच के बाद स्पष्ट हो पाएगा कि ANM निहा खान ऐसा क्यों कर रही थी और क्या इससे पहले भी वैक्सीन इस तरह से बर्बाद की गई है? वहीं प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ आरफीन जेहरा का कहना है कि उन्हें उसी दिन निहा खान की इस हरकत के बारे में पता चला था तभी वो उच्च अधिकारियों को ये नहीं बता पाईं.

निहा खान ने खुद को निर्दोष बताया 

इस मामले में निहा खान का कहना है –

“ये वाकया 22 तारीख़ का है. मैं सवा 10 बजे PHC पहुंची थी. मेरा दूसरा केंद्र था. लेकिन मुझे वहीं रोक लिया गया कि आपको यहीं ड्यूटी करनी है. मैंने 10-15 वैक्सीन लगाईं. फिर अपने कम्प्यूटर पर फीडिंग करने चली गई. जब घर आ गई तो मुझे इस वाकये के बारे में पता चला. मुझे नहीं पता कि वो वैक्सीन वहां कैसे आई.”

निहा खान से पूछा गया कि जब उन्होंने 10-15 वैक्सीन ही लगाईं तो उस दिन बाकी वैक्सीन किसने लगाईं? निहा का कहना है कि अन्नू और सोनम नाम की स्वास्थ्यकर्मियों ने बाकी वैक्सीन लगाई थीं. अन्नू ANM हैं और सोनम राजौरिया स्टाफ नर्स हैं. निहा का कहना है कि इस मामले की दोबारा जांच होनी चाहिए.


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