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अफगानिस्तानः काबुल में गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले में 25 लोग मारे गए

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल. यहां शहर के पुराने हिस्से में एक गुरुद्वारा है. 25 मार्च की सुबह तकरीबन पौने आठ बजे इस गुरुद्वारे पर आतंकवादी हमला हुआ. हमले के समय गुरुद्वारे में तकरीबन 150 लोग मौजूद थे. इनमें कई बच्चे भी थे. हमले में कम-से-कम 25 लोग मारे गए हैं. अफगान सिक्यॉरिटी फोर्सेज़ ने हमलावर को भी मार डाला है. इस्लामिक स्टेट ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक एरियन ने पत्रकारों को भेजे एक संदेश में कहा कि ऑपरेशन खत्म हो गया है. सभी हमलावर मारे गए हैं.

अल्पसंख्यक सिख समुदाय के एक सांसद नरेंद्र सिंह खालसा ने समाचार एजेंसी एपी को बताया कि जब हमला हुआ वह गुरुद्वारे के पास थे. हमले के बाद घटना वाली जगह पर भागे. इस हमले में मारे गए लोगों में एक बच्चा भी शामिल था.

मोहन सिंह जो हमले के समय गुरुद्वारे में थे, काबुल के हॉस्पिटल में उन्होंने एपी को बताया,

पहली बार जब गोलियों की आवाज़ सुनी तो एक टेबल के नीचे छिप गया. इसके बाद मैंने विस्फोटों की आवाज सुनी. मुझे लगा कि ये हथगोले थे. छत का कुछ हिस्सा गिरने से मैं घायल हो गया.

अफगानिस्तान सरकार की ओर से जारी की गई तस्वीरों में सुरक्षाबल लगभग एक दर्जन बच्चों को गुरुद्वारे से बाहर निकालते दिख रहे हैं. इनमें से कई बच्चे नंगे पैर थे और रो रहे थे.

खालसा ने बाद में रॉयटर्स समाचार एजेंसी को बताया कि बंदूकधारियों ने ऐसे समय में हमला शुरू किया जब धर्मशाला लोगों से भरी हुई थी. एसआईटीआई इंटेलिजेंस ग्रुप, जिसका काम इस तरह की गतिविधियों को अंजाम देने वालों पर नजर रखना है, उसने बताया कि ISIS के सहयोगी संगठन ISIL ने हमले की जिम्मेदारी ली है. इस महीने की शुरुआत में, ISIL के एक सहयोगी ने काबुल में अल्पसंख्यक शिया मुसलमानों के एक समूह पर भी हमला किया था जिसमें 32 लोग मारे गए थे.

इस हमले से एक दिन पहले ही अमेरिका ने अफगान सरकार को दिए जाने वाले फंड का एक बड़ा हिस्सा काटने का ऐलान किया था. इस फैसले के पीछे अमेरिका की झुंझलाहट है. उसने अफगानिस्तान से निकलने के लिए तालिबान से समझौता किया. मगर इस समझौते के बाद अफगान सरकार और तालिबान के बीच समझौता नहीं हुआ है. इसकी उम्मीद भी अभी दिख नहीं रही. वहां अशरफ़ ग़नी भी राष्ट्रपति हैं. और उनके खिलाफ चुनाव लड़ने वाले अब्दुल्ला अब्दुल्ला भी ख़ुद को राष्ट्रपति बता चुके हैं. इन सारे घटनाक्रमों के बीच पहले से ही बेहाल अफगानिस्तान और बदहाल होता दिख रहा है.

यहां सिख अल्पसंख्यक हैं. उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ता है. वे आंतकवादियों के निशाने पर भी होते हैं. 2018 में, एक आत्मघाती बम विस्फोट में सिख समुदाय को निशाना बनाया गया. और दावा किया गया कि ISIL ने पूर्वी शहर जलालाबाद में एक दर्जन से अधिक लोगों को मार डाला. हाल के वर्षों में अफगानिस्तान में रहे सिखों और हिंदुओं ने भारत में शरण मांगी है.


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