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प्राइवेट NGO's से जुड़े रेसलर्स को बिल्कुल खेलने नहीं दूंगाः WFI प्रेसिडेंट

रेसलिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (WFI) ने विनेश फोगाट के केस को अपनी डिसिप्लिनरी यानी अनुशासनात्मक कमेटी को सौंप दिया है. WFI प्रेसिडेंट बृजभूषण शरण सिंह का कहना है कि विनेश की गलतियां हल्की नहीं थीं. विनेश की वजह से WFI प्रेसिडेंट को काफी ज़लालत झेलनी पड़ी. यहां तक कि अगर विनेश मेडल जीत भी जाती, तो हो सकता था कि उनका मेडल वापस ले लिया जाता.

बृजभूषण का दावा है कि विनेश फोगाट द्वारा तय जर्सी ना पहनने के चलते उन्हें रेसलिंग की ICC यानी यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (UWW) और इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) के लोगों को जवाब देना पड़ा. उनकी काफी बेइज्जती हुई और उन्हें टीम को बचाने के लिए गिड़गिड़ाना तक पड़ा. बृजभूषण ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा,

‘हमने इस मामले को अपनी डिसिप्लिनरी कमेटी को सौंप दिया है जो विनेश, सोनम और दिव्या काकरान को फ़ोन करेगी. यह कहना आसान है कि मुझसे गलती हो गई पर वो गलती किस वजह से हुई और क्यों हुई? विनेश ने अपने वकील के जरिये कहा कि वे टीम के बाकी खिलाड़ियों की सुरक्षा की वजह से टीम के साथ नहीं रुकी. ठीक हैं मान लेते हैं पर उन्होंने कॉस्ट्यूम क्यों नहीं पहनी? उन्हें पता होना चाहिए कि उनकी इस गलती की वजह से मुझे क्या-क्या झेलना पड़ा है.’

बृजभूषण ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए दीपक पूनिया के कोच का भी ज़िक्र किया. बता दें कि दीपक के रशियन कोच ने दीपक की हार के बाद मैच रेफरी को ही कूट दिया था. अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बृजभूषण ने कहा,

‘दीपक पूनिया के हादसे के बाद मुझे एक कमीशन के सामने हाज़िर होना पड़ा था. इसमें यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग और इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी के मेंबर्स शामिल थे. यहां बड़ी मुश्किल से मैं अपनी टीम को डिस्क्वॉलिफाई होने से बचा पाया. मैंने कहा कि हमारे किसी भी खिलाड़ी ने कभी कोई रूल नहीं तोड़ा है.

फिर मुझसे सवाल पूछा गया कि ‘तुम फेडरेशन कैसे चला रहे हो? तुम्हारे रेसलर तुम्हारी टीम की ऑफिशियल कॉस्ट्यूम तक नहीं पहन रहे हैं.’ अगर वे मेडल जीत भी जातीं तो भी उन्हें मेडल खोना पड़ सकता था. यह कोई छोटा कांड नहीं है. मुझे उनके सामने मिन्नतें करनी पड़ीं, गिड़गिड़ाना पड़ा. भारत की कुश्ती एक पहलवान के दम पर नहीं है. हमें पक्का करना है कि कोई और ऐसी गलती ना दोहराए.’

बृजभूषण ने विनेश के इस मैटर के बाद सरकारी, टारगेट ओलंपिक्स पोडियम स्कीम (TOPS) के साथ-साथ ओलंपिक्स गोल्ड क्वेस्ट (OGC) और JSW स्पोर्ट्स जैसी प्राइवेट बॉडीज़ को भी साफ़ चेतावनी दे दी है. WFI प्रेजिडेंट ने साफ़ तौर पर कह दिया है कि अगर कोई भी खिलाड़ी OGC या JSW से मदद लेगा तो वे उन्हें खेलने नहीं देंगे.

# हस्तक्षेप नहीं चलेगा

इसके अलावा उन्होंने TOPS को भी यह चेतावनी दी है कि किसी भी खिलाड़ी पर कोई भी फैसला लेने से पहले उन्हें चीफ कोच और फेडरेशन को बताना पड़ेगा. TOPS को चेतावनी देते हुए बृजभूषण ने कहा,

‘हां, हमें इनकी जरूरत है. लेकिन कोई भी प्रोग्राम बनाने से पहले उन्हें चीफ कोच और फेडरेशन को कॉन्फिडेंस में लेना ही होगा.’

वहीं OGQ और JSW जैसी प्राइवेट बॉडीज के बारे में उन्होंने कहा,

‘हमें OGQ और JSW की कोई जरूरत नहीं है. उन्होंने हमारे तीन रेसलर्स को ख़राब कर दिया है जिनका मैं नाम नहीं लूंगा. जब भारत सरकार एथलीट्स पर पैसा खर्च करने को तैयार है तो हमें इनकी क्या जरूरत? ये जूनियर रेसलर्स की मदद कर सकते हैं जिन्हे सच में मदद की जरूरत है.

ना कि सिर्फ उनकी जो बड़े मेडल जीतने के करीब हों. ये उतना खर्च नहीं कर रहे जितना सरकार कर रही है. भारत सरकार ने लगभग 85 करोड़ रेसलर्स पर खर्च किए हैं. समस्या यह है कि ये मुझे सूचना ही नहीं देते कि ये प्रैक्टिस पार्टनर के रूप में किसे भेज रहे हैं. इन संस्थाओं से जुड़े रेसलर्स को मैं बिल्कुल भी खेलने नहीं दूंगा.’

इस पूरे मसले पर JSW की तरफ से अभी कोई बयान नहीं आया है. जबकि OGQ ने WFI प्रेसिडेंट की बातों पर सफाई देते हुए कहा,

‘OGQ पिछले 6 साल से रवि दहिया और दीपक पूनिया को सपोर्ट कर रहा है, जब वे 17 और 16 साल के थे. तब तो ये दोनों खिलाड़ी लाइमलाइट में भी नहीं आए थे. हम पीवी सिंधु को तबसे सपोर्ट कर रहे हैं जब वह 14 साल की थीं और लक्ष्य सेन को 10 साल की उम्र से.

OGQ बहुत बड़े स्तर पर देश में जूनियर लेवल के प्रोग्राम चला रही है, जिसमें हम कम से कम 100 ऐसे एथलीट्स को सपोर्ट कर रहे हैं जो 11 से 19 साल के हैं. सिर्फ रेसलिंग की बात करें तो हम जिन 32 रेसलर्स को सपोर्ट करते हैं उनमें से 23 रेसलर 13 से 19 साल के बीच की उम्र के हैं.’

इस मामले में अभी JSW स्पोर्ट्स का जवाब आना बाकी है. देखने लायक बात होगी कि JSW की तरफ से क्या जवाब आता है. साथ ही यह भी देखने लायक होगा कि WFI की डिसिप्लिनरी कमेटी विनेश पर क्या निर्णय सुनाती है.


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