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देखिए कौन-कौन है हिमाचल के कप्तान जयराम ठाकुर की प्लेयिंग-XI में

हिमाचल प्रदेश में भाजपा के जयराम ठाकुर को कुर्सी पर बिठाया गया है. मंडी की सिराज सीट पर 5वीं बार विधायक बने जयराम को इस पहाड़ी प्रदेश की कमान दी गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी मुखिया अमित शाह और होम मिनिस्टर राजनाथ सिंह समेत 10 बीजेपी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री भी शपथ समारोह में पहुंचे.  देखिए कौन-कौन है जयराम ठाकुर की कैबिनेट का हिस्सा-

# 1 विपिन परमार

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कांगड़ा की सुलह सीट से विधायक विपिन 1998 से राजनीति में हैं. वो यहां से तीसरी बार जीते हैं. 54 साल का ये नेता ग्रजुएट है. 1980 में ABVP की तरफ से हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष भी रहे हैं। परमार दो बार राज्य बीजेपी के महासचिव भी रहे हैं। अभी वे हिमाचल प्रदेश बीजेपी कांगड़ा चंबा युवा मोर्चा के अध्यक्ष हैं। 1999 से 2003 तक हिमाचल के खादी बोर्ड के चेयरमैन रहे हैं। विपिन ने कांग्रेस के प्रत्याशी जगजीवन पॉल को 10291 वोटों से हराया है.

#2 सरवीण चौधरी

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मुख्यमंत्री की कैबिनेट में पहली महिला मंत्री सरवीण चौधरी कांगड़ा के ही शाहपुर से चौथी बार जीत कर विधानसभा पहुंची हैं। इस बार उन्होंने निर्दलीय विजय सिंह मानकोटिया को हराया। 51 साल की ये नेता 1992 से राजनीति में है.

#3 विक्रम सिंह

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53 साल के विक्रम सिंह ठाकुर जसवां परागपुर से विधायक हैं. विक्रम ने पहली बार 2003 में जसवां जो अब जसवां परागपुर के नाम से जाना जाता है, से जीत हासिल की। प्रदेश भाजयुमो के उपाध्यक्ष और खादी बोर्ड और प्रदेश वन निगम के उपाध्यक्ष पद पर भी रहे हैं। 2017 के चुनाव में विक्रम ने कांग्रेस के प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह मनकोटिया को 1862 मतों के अंतर से हराया।

#4 किशन कपूर

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किशन कपूर कांगड़ा में धर्मशाला से जीत हासिल कर पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे हैं। किशन पार्टी के सीनियर नेता हैं। 1990 में पहली बार चुनाव जीतने वाले कपूर धूमल सरकार में परिवहन मंत्री रह चुके हैं। इस बार उन्होंने वीरभद्र सरकार में मंत्री सुधीर शर्मा को 2997 मतों से हराया। वे चार बार विधायक रह चुके हैं। उन्हें अपने गद्दी सुमदाय से अच्छा खासा समर्थन प्राप्त है।

#5 रामलाल मार्कंडेय

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लाहौल स्फीति से विधायक रामलाल तीसरी बार जीतकर आए हैं. मुकाबला कांग्रेस के रवि ठाकुर से था जिसमें इस बीजेपी नेता ने 1478 मतों से जीत हासिल की. यहां की पतन घाटी से आने वाले इस नेता की इलाके पर मजबूत पकड़ है.

#6 वीरेंद्र कंवर

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कुटलैहड़ सीट से विधायक वीरेंद्र कंवर को इस खास टीम में शामिल किया गया है। जीत के बाद धूमल के लिए विधायक पद छोड़ने को तैयार थे। कांग्रेस ने आखिरी समय में वंशवाद की परवाह किए बिना यहां विवेक को नए चेहरे के तौर पर उतारा, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ा। 1981 में हमीरपुर से अपने राजनैतिक सफर की शुरूआत की थी। बाद में वे1993 में ऊना में भाजयुमो के जिला अध्यक्ष बने। 2000 में जिला परिषद में चुने गये। पहली बार 2003 के चुनावों में विधायक चुने गये। दूसरी बार 2007 में व तीसरी बार 2012 का चुनाव उन्होंने जीता।

#7 अनिल शर्मा

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चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुए अनिल शर्मा मंडी से विधायक हैं. मुकाबला कांग्रेसी नेता कौल सिंह ठाकुर की बेटी चंपा ठाकुर से था. वीरभद्र सिंह सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रहे हैं और पंडित सुखराम के बेटे और सलमान खान की बहन अर्पिता के ससुर हैं.

#8 गोविंद सिंह ठाकुर

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कुल्लू जिल्ले में मनाली सीट से विधायक गोविंद सिंह राजनीतिक परिवार से हैं. पिता कुंज लाल ठाकुर भी मंत्री रह चुके हैं. 49 साल के गोविंद 2007 में पहली बार कुल्लू विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गये। 2012 में मनाली में विधानसभा क्षेत्र से दोबारा विधायक चुने गये। भाजपा ने उन्हें दोबारा टिकट दिया और जीत हासिल की.

#9 महेद्र सिंह ठाकुर

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धर्मपुर विधानसभा से विधायक महेंद्र के खिलाफ मैदान में कांग्रेस के चंद्र शेखर थे। महेंद्र सिंह ने कांग्रेस के इस उम्मीदवार 11964 मतों के अंतर से हराया है। एक साधारण परिवार से राजनीति में आकर उन्होंने कई कीर्तिमान स्थापित किये। उन्होंने दल भी बदले,लेकिन चुनाव नहीं हारे। भाजपा और कांग्रेस का इस सीट पर अच्छा वोट बैंक माना जाता है।

# 10 राजीव सैजल

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सोलन की कसौली सीट से भाजपा के राजीव सैजल ने कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी को 442 मतों के अंतर से हराया। ये भाजपा का दलित चेहरा हैं. पेशे से डॉक्टर राजीव ने 2012 में कांग्रेस के विनोद सुल्तानपुरी से मात्र 24 मतों से चुनाव जीता था। 46 साल के सैजल ने 2012 में दूसरी बार चुनाव जीता।

#11 सुरेश भारद्वाज

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सुरेश भारद्वाज शिमला शहरी सीट से जीत कर आए हैं. इन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार हरीश जनारठा को 1903 मतों से हराया। इस बार पहले उनका टिकट कटा लेकिन बाद में मिल गया। 65 साल के सुरेश बीएससी व ला ग्रेजुएट हैं। ABVP से होते हुए बीजेपी में पहुंचे हैं. 2003 से लेकर 2006 तक फिर भाजपा की कमान उन्होंने संभाली। 1990 में पहली बार विधायक चुने गये। उसके बाद 2007 में फिर विधायक बने। और 2012 में भी उन्होंने शिमला से चुनाव जीता।


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