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UPSC के पहले 5 टॉपर्स ने बताया यहां तक पहुंचने के लिए क्या-क्या करना पड़ा?

संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा के नतीजे आ चुके हैं. बोल-चाल की भाषा में इसे आईएएस की परीक्षा भी कहा जाता है. दिल्ली और दिल्ली जैसे तमाम छोटे-बड़े शहरों में छात्र इस परीक्षा की तैयारी करते हैं. और हर साल टॉप करने वाले अभ्यर्थी उनके लिए किसी भगवान से कम नहीं होते. उनकी सैंकड़ों रातों की मेहनत के चलते वो एक झटके में स्टार बन जाते हैं. इस साल भी कुल 759 लोग (577 पुरुष, 182 महिलाएं) स्टार बने हैं. लोग सोशल मीडिया पर इन्हें खोज-खोज कर इनके बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं. बधाई देना चाहते हैं. तैयारी करने वाले सफलता के गुर जानना चाहते हैं. इस साल के टॉप 5 कैंडिडेट्स के बारे में हम आपको बता रहे हैं. आइए जानते हैं कौन हैं ये होनहार जिन्होंने देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को फतह किया है.

#कनिष्क कटारिया

देश भर में पहली रैंक मिली है जयपुर के कनिष्क कटारिया को. वो अपनी सफलता पर भरोसा नहीं कर पा रहे थे. करें भी कैसे? लाखों होनहार छात्रों के बीच पहला स्थान लाना कोई आम बात नहीं. अपनी इस सफलता पर उन्होंने कहा-

मुझे पहली रैंक मिलने की उम्मीद नहीं थी. मैं मोरल सपोर्ट के लिए अपने माता-पिता और अपनी गर्लफ्रेंड का शुक्रिया अदा करता हूं. लोग मुझसे एक अच्छा प्रशासक बनने की उम्मीद रखते हैं और मेरी भी यही मंशा है.

कनिष्क आईआईटी बॉम्बे से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट हैं. और डेढ़ साल साउथ कोरिया में नौकरी कर चुके हैं. इसके बाद वो बेंगलुरु में सॉफ्टवेर डेवलपमेंट कंपनी में नौकरी करने लगे. लेकिन फिर सिविल सर्विसेज में आने का मन बनाया और अपने पहले ही प्रयास में परीक्षा भी पास कर ली. कनिष्क के पिता सावरमल वर्मा राजस्थान में ही आईएएस हैं. इनके ताऊजी केसी वर्मा भी आईएएस हैं. वो जयपुर के संभागीय आयुक्त हैं. कनिष्क के पापा चाहते थे कि वो सिविल्स की तैयारी करें. उन्हें बात जम गई और नतीजा पूरे देश के सामने है.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने टॉपर कनिष्क को बधाई दी.

#अक्षत जैन

दूसरा नंबर मिला है अक्षत जैन को. वो 23 साल के हैं. और रोबोट बनकर पढ़ाई करने में भरोसा नहीं करते. अपने सिलेक्शन पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा-

इस उपलब्धि का श्रेय मैं भगवान, मेरे परिवार और मेरे दोस्तों को देना चाहूंगा. उन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया. मुझे खूब पढ़ाई करनी पड़ी लेकिन इससे मुझे फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मैं एक मशीन की तरह काम नहीं कर रहा था. मैं ब्रेक लेता था और दोस्तों के साथ बाहर भी जाता करता.

कनिष्क की तरह अक्षत भी जयपुर के रहने वाले हैं. और आईआईटी से पढ़े हैं. उनके पिता धर्म चंद जैन आईपीएस हैं और मां सिम्मी आईआरएस. दोनों ही 1991 बैच के ऑफिसर्स हैं. अक्षत का ये दूसरा प्रयास था. उनका पहला प्रयास साल 2017 में था तब वो केवल 2 नंबर से चूक गए थे. अक्षत ने आईआईटी गुवाहाटी से डिजाइनिंग में ग्रेजुएशन किया है.

#जुनैद अहमद

तीसरा स्थान मिला है जुनैद अहमद को. जुनैद उत्तर प्रदेश के नगीना कस्बे के रहने वाले हैं, ये बिजनौर ज़िले में पड़ता है. पिछले साल उन्हें 352 वीं रैंक मिली थी. फ़िलहाल वो फरीदाबाद में आईआरएस की ट्रेनिंग ले रहे हैं.  उनके पापा वकील हैं और मां होममेकर. आईआरएस बनने के बाद भी वो तैयारी करते रहे और आईएएस बनने के अपने सपने को पूरा कर लिया. सफलता के लिए टेक्नोलॉजी का प्रयोग कैसे किया जाता है  जुनैद इसके सबसे अच्छे उदाहरण हैं. उन्होंने बताया-

मेरे पास सीनियर्स की बताई कुछ किताबें थीं जिन्होंने बेस बनाने में मेरी मदद की. लेकिन इंटरनेट ने मेरी बहुत मदद की, सब कुछ ऑनलाइन उपलब्ध है. इंटरनेट के अच्छे यूज ने मेरी मदद की. मुझे लिस्ट में आने की उम्मीद थी लेकिन तीसरी रैंक की उम्मीद नहीं थी.

#श्रेयांस कुमट

चौथे स्थान पर हैं श्रेयांस कुमट. उन्होंने वीडियो बनाकर सबका शुक्रिया अदा किया है. बोले-

मैं अपने घर वालों, दीदी और दोस्तों का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं. आगे मेरा यही लक्ष्य है कि जैसे-जैसे जिम्मेदारियां मिलती रहीं उन्हें निभाता रहूं.

तैयारी कर रहे छात्रों के मन में सवाल ज़रूर रहता है कि कितने घंटे पढ़ा जाना चाहिए. इसके जवाब में श्रेयांस ने कहा-

फिक्स नहीं था कि एक दिन में कितना पढ़ना है. लेकिन कोशिश की कि दिन में 6-10 घंटे पढ़ाई की. घंटे से ज्यादा टॉपिक पूरे करने पर जोर रहता था. टॉप रैंक में आने के बारे में नहीं सोचा था. उम्मीद थी कि टॉप 100 में आ जाऊं तो आईएएस मिल जाए.

परीक्षा के लिए त्याग के बारे में पूछे जाने पर बोले कि

त्याग तो कुछ नहीं किया लेकिन पिछले कुछ सालों से कटा हुआ था. किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से नहीं जुड़ा था. कोशिश करता था कि ज्यादा से ज्यादा समय पढ़ाई को दे पाऊं.

#सृष्टि जयंत deshmukh

पांचवी रैंक मिली है सृष्टि जयंत को. वो महिला अभ्यर्थियों में पहले स्थान पर हैं. भोपाल की रहने वाली हैं और ये उनका पहला प्रयास था. साल 2018 में भोपाल के राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. उनके पिता पेशे से इंजीनियर हैं. और माता टीचर. सृष्टि ने 23 साल की उम्र में परीक्षा पास की है. अपनी जिद को वो सफलता का कारण मानती हैं.

ये मेरे बचपन का सपना था. यूपीएससी परीक्षा एक लंबी यात्रा है जहां आप 1-1.5 साल तक पूरी तरह कमिटेड रहते हो. मेरे माता-पिता, परिवार, दोस्तों और अध्यापकों ने मेरा साथ दिया इसलिए सारा श्रेय भी उन्हीं का है. मैंने तय कर लिया था कि ये मेरा पहला और आखिरी प्रयास है. मैंने एक ही प्रयास में सफलता पाने का दृढ निश्चय कर लिया था.

इनके आलावा बहुत से ऐसे कैंडिडेट्स हैं जिनके बारे में जानकर आप नई उर्जा से भर जाएंगे. उनका संघर्ष, सपने और उनको साकार करने की यात्रा का नाम ही यूपीएससी है. बाकी कहानियां भी आपको ज़रूर सुनाएंगे. फिलहाल टॉप 5 को ढेरों शुभकामनाएं.


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