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गुजरात: डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए 1.23 लाख, लेकिन कोविड मौतें केवल 4 हजार

गुजरात (Gujrat) से कुछ ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जिससे एक बार फिर राज्य सरकार के सामने कोविड मौतों का डेटा छिपाने का सवाल खड़ा हो गया है. गुजरात के अखबार दिव्य भास्कर ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है. इस रिपोर्ट के अनुसार गुजरात में एक मार्च से 10 मई के बीच कुल 1.23 लाख डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए. जबकि पिछले साल इसी समयावधि में 58 हजार डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. मतलब इस बार 65,085 सर्टिफिकेट ज्यादा जारी किए गए हैं.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जहां एक तरफ इतने ज्यादा डेथ सर्टिफिकेट जारी हुए, वहीं दूसरी तरफ गुजरात सरकार का डेटा बताता है कि एक मार्च से 10 मई के बीच केवल 4,218 लोगों की मौत ही कोविड से हुई. इस रिपोर्ट में राज्य के अलग-अलग जिला और नगर पंचायत की तरफ से जारी डेथ सर्टिफिकेट का डेटा भी दिया गया है.

– राजकोट शहर में पिछले साल एक मार्च से 10 मई के बीच 2,583 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए. जबकि इस साल सेम इसी पीरियड में डेथ सर्टिफिकेट की संख्या बढ़कर 10,878 हो गई. वहीं गुजरात सरकार ने बताया कि एक मार्च 2021 से 10 मई 2021 के 71 दिन के समय में राजकोट शहर में केवल 288 लोगों की मौत ही कोविड से हुई.

– भावनगर शहर में पिछले साल इसी समयावधि में 1,375 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 4,158 हो गया. वहीं सरकार का कहना है कि भावनगर में मात्र 134 लोगों की मौत कोरोना से हुई.

– अहदाबाद में पिछले साल एक मार्च से 10 मई के बीच 7,786 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. इस बार 13,593 जारी किए गए. जबकि सरकार का कहना है कि शहर में मात्र 2,126 लोगों की मौत ही कोविड से हुई

– इसी तरह राज्य के एक और बड़े शहर सूरत में पिछले साल एक मार्च से 10 मई के बीच 2,769 डेथ सर्टिफिकेट इश्यू किए गए थे. जबकि इस साल 71 दिन के इस पीरियड में यह आंकड़ा बढ़कर 8,851 हो गया. वहीं सरकारी आंकड़ों के मुताबिक केवल 1,074 लोगों की मौत कोरोना से हुई.

– वड़ोदरा में भी यही ट्रेंड जारी रहा. इस साल एक मार्च से 10 मई के बीच शहर में 7,722 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए. जबकि पिछले साल 2,373 जारी किए गए थे. सरकार के मुताबिक इस साल एक मार्च से 10 मई के बीच वड़ोदरा में 189 लोगों की मौत ही कोविड से हुई.

– इसी तरह नसवारी जिले में पिछले साल एक मार्च से 10 मई के बीच 2,026 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. वहीं इस बार 3,434 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए. सरकारी आंकड़ो के मुताबिक इस बार 71 दिन के इस पीरियड में मात्र 9 लोगों ने कोविड से अपनी जान गंवाई.

गुजराती अखबार दिव्य भास्कर ने यह खुलासा किया है.
गुजराती अखबार दिव्य भास्कर ने यह खुलासा किया है.

– अमरेली जिले में भी यही हाल रहा. पिछले साल जिले में एक मार्च से 10 मई के बीच 1,712 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. इस बार 5,449 इश्यू किए गए. वहीं सरकार ने बताया कि इस बार, इस पीरियड में केवल 36 लोगों की जान कोविड की वजह से गई.

– जामनगर ग्रामीण में पिछले साल एक मार्च से 10 मई के बीच  2,052 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. इस बार 4,894 दिए गए. सरकार के मुताबिक 341 लोग ही इस बार कोरोना से मारे गए.

– मेहसाना जिले में पिछले साल एक मार्च से 10 मई के बीच 873 डेथ सर्टिफिकेट जारी किए गए थे. इस बार 3,150 जारी किए गए. सरकार ने बताया कि यहां मात्र 134 लोगों ने ही कोरोना की वजह से अपनी जान गंवाई.

इन आंकड़ों से यह बात सामने निकलकर आती है कि गुजरात में कोरोना से होने वाली मौतों को छिपाया जा रहा है. पहले भी कई मीडिया संस्थान इस सच को उजागर कर चुके हैं. न्यू यॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में गुजरात के अलग-अलग श्मसान घाटों में काम करने वाले लोगों के हवाले से बताया था कि राज्य में कोविड से मरने वालों का आंकड़ा सरकारी आंकड़े से चार से पांच गुना अधिक है. अब अगर दिव्य भास्कर की रिपोर्ट पर नजर डालें तो असल आंकड़ा चार से पांच गुना नहीं, बल्कि 10 से 15 गुना तक है. बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की वजह से कोरोना वायरस से जिंदगी की जंग हार गए लोगों को आंकड़ो में भी दर्ज ना करना ना केवल उनके साथ असंवेदनशीलता है, बल्कि उनके परिजनों के साथ भी.


 

वीडियो- कोरोना महामारी के बीच गुजरात में ‘नमो ऑक्सीजन बूस्टर’ बंटे, लोग बोले- आपदा में अवसर?

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