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UP: बागपत के इस गांव में कोरोना से लोग मरते जा रहे, खंडहर बने अस्पताल में भूसा भरा है

उत्तर प्रदेश का बागपत जिला. दिल्ली से महज़ 48 किलोमीटर दूर. इसके कई गांव कोरोना वायरस की चपेट में हैं. यहां के ढिकौली  गांव में अप्रैल से लेकर अब तक बुखार की वजह से करीब 20 लोगों की मौत हो चुकी है. लेकिन गांव वालों को शुरुआत में पता ही नहीं चल पाया कि उन्हें कोरोना था या नहीं. ऐसा इसलिए कि गांव में कोरोना टेस्टिंग की सुविधा ही नहीं है.

इंडिया टुडे के अरविंद ओझा और सत्येंद्र भाटी ने बागपत के ढिकौली गांव जाकर हालात का जायजा लिया. रतन लाल नाम के शख्स ने बताया कि उनकी पत्नी पूनम को 27 अप्रैल को बुखार आया. गांव में ही एक प्राइवेट डॉक्टर को दिखाया. डॉक्टर ने बुखार की दवाइयां दी. लेकिन उनसे आराम नहीं मिला. तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो गांव से दूर एक कस्बे में ले जाकर उन्हें भर्ती करवाया गया. वहां दवाइयों के साथ ग्लूकोज चढ़ता रहा. आखिर में डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए. कोरोना टेस्ट में पूनम की रिपोर्ट पॉज़िटिव आई. इसके बाद काफी भागदौड़ करके बागपत के एक अस्पताल में बेड मिला, लेकिन पूनम को बचाया नहीं जा सका.

Dhikoli
बागपत के Dhikoli गांव में महीने भर में 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है. फोटो – इंडिया टुडे

रतन लाल के पड़ोस में रहने वाले सिद्धार्थ दिल्ली पुलिस में तैनात हैं. उनकी मां को बुखार आया. शुरुआत में बुखार की दवाइयां दी गईं, लेकिन दो दिन में ही उनकी हालत खराब हो गई. मेरठ के अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने उन्हें वेंटिलेटर पर रखा. तीन दिन के अंदर उनकी की मौत हो गई.

इसी गांव के रहने वाले हैं तरुण ढाका. मेरठ में वकालत करते हैं. उनके भाई भी कोरोना पॉज़िटिव हो गए थे. उन्होंने बताया,

रोज़ इस गांव में किसी न किसी की मौत हो रही है. लेकिन टेस्टिंग की सुविधा ही नहीं है तो पता ही नहीं चल पा रहा है कि कौन कोरोना से मरा. अगर गांव में ठीक से जांच हो जाए तो गांव का हर दूसरा आदमी पॉज़िटिव निकलेगा.

तरुण ने गांव में हुए पंचायत चुनाव को कोरोना वायरस फैलने का जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा,

पंचायत चुनाव यहां प्रतिष्ठा का सवाल होता है. इस बार भी जमकर भीड़ जुटी. मेरा भाई भी इसी दौरान कोरोना पॉजिटिव हुआ. मेरठ लेकर गए तो वहां टेस्ट में उसका पता चल पाया. गांव में मेडिकल सुविधा तो ज़ीरो है. टेस्टिंग वगैरह कुछ हो नहीं रही, प्रशासन का दावा भी सब झूठा है.

Panchayat Election
गांववालों का ये भी आरोप है कि पंचायत चुनाव की वजह से उनके गांव में कोरोना फैला है.

इस गांव में प्रधानी का चुनाव संदीप ढाका ने जीता है. रिजल्ट आने के कुछ दिन पहले ही वो कोरोना पॉज़िटिव हो गए थे. गांव में इलाज की सुविधा नहीं है, इसलिए संदीप ने शामली में जाकर इलाज कराया.

35 हज़ार की आबादी, एक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं

इस गांव में कभी एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र होता था. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि 50 साल पहले ये बना था. डॉक्टर भी बैठते थे. अब उसकी जगह एक खंडहर खड़ा है. दस्तावेज बताते हैं कि ये अस्पताल ही है. लेकिन उसके बाहर अब गोबर का ढेर दिखता है. खंडहर के अंदर गांव के लोग अब जानवरों को खिलाने वाला चारा-भूसा रखते हैं.

Baghpat
Baghpat के ढिकौली गांव की खंडहर हो चुकी वो इमारत जहां पहले कभी अस्पताल चलता था. फोटो- इंडिया टुडे

2011 की जनगणना के मुताबिक, इस गांव की आबादी 9800 थी. 10 साल में ये आबादी और बढ़ चुकी है. ग्रामीण 2016 से इस कोशिश में जुटे हैं कि गांव में सामुदायिक या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया जाए. इसे लेकर वो सांसद तक को चिट्ठी लिख चुके हैं. जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने भी राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक को चिट्ठी लिखी थी. चिट्ठी में लिखा था कि इस गांव में स्वास्थ्य केंद्र बनाने का प्रस्ताव दिया गया था, जमीन भी मिल गई है. लेकिन उस ज़मीन पर पहले से एक भवन मौजूद है. उसे ध्वस्त करके नया निर्माण करवाया जा सकता है. चिट्ठी में सरकार से निर्माण की स्वीकृति दिलवाने की बात भी लिखी गई है.

Dhikauli1
Dhikauli1

हालांकि, गांव में स्वास्थ्य केंद्र खोलने को लेकर ज़मीन पर कोई प्रगति होती नज़र नहीं आ रही है.

गांव के एक शख्स ने दावा किया,

“सांसद ने कहा था कि गांव के लोग ज़मीन दें तो 100 बेड का अस्पताल बनवा देंगे. लेकिन यहां तो पहले ही एक बड़ी ज़मीन अस्पताल के लिए मौजूद है. डीएम से लेकर स्वास्थ्य अधिकारियों तक से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया.”

ढिकौली ही नहीं. उससे सटे दो गांव और हैं, जहां कोरोना वायरस फैला हुआ है. इन तीनों गांव की कुल आबादी करीब 35 हज़ार होगी. लेकिन इनके लिए एक भी स्वास्थ्य केंद्र नहीं है. लोगों को न ठीक से इलाज मिल रहा है, और न ही टेस्टिंग ही हो रही है.

डीएम कुछ और ही दावे कर रहे

इंडिया टुडे ने इस गांव की हालत पर बागपत के डीएम राम कमल यादव से बात की. उन्होंने बताया कि बागपत के गांव में अब तक 30 से 35 मौतें हो चुकी हैं. उन्होंने दावा किया कि बड़ी टीम लगाकर सभी जगह टेस्टिंग करवाई जा रही है. होम क्वारन्टीन में रह रहे लोगों को दवाइयों की किट भी दी जा रही है.

खंडहर में तब्दील हो चुके अस्पताल के बारे में डीएम ने दावा किया कि उस अस्पताल का स्वास्थ्य विभाग के दस्तावेजों में जिक्र नहीं है. हालांकि, ये भी कहा कि अगर गांववालों का दावा है कि वहां पहले अस्पताल था, तो वो अपनी टीम वहां भेजेंगे. उस बिल्डिंग को ठीक करके उसका इस्तेमाल किया जाएगा.


ये भी देखें: कैसे बैठ गया कोविड मैनेजमेंट का यूपी मॉडल?

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