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कोरोना की वैक्सीन का पैसा देने से पहले ये ख़बर पढ़ लो, बहुत काम की है

सरकार ने कोरोना की वैक्सीन कोविशील्ड के दाम पर मोलभाव कर लिया है. अभी तक हर डोज़ के लिए 250 रुपये देने पड़ते हैं. अब नया अपडेट है कि वैक्सीन का दाम 200 रुपए प्रति डोज़ से भी कम हो सकता है. 

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण 11 मार्च को पत्रकारों को सम्बोधित कर रहे थे. उसी दौरान राजेश भूषण ने ये जानकारी दी. कहा कि सीरम इंस्टिट्यूट द्वारा बनायी जा रही कोविशील्ड पर कुछ समझौते हुए हैं. इसके तहत अब ये वैक्सीन 200 रुपए प्रति डोज़ से भी कम दाम पर दी जा सकती है.

सरकारी अस्पतालों में तो वैक्सीन के लिए पैसे चुकाने नहीं पड़ते. लेकिन प्राइवेट में कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए पैसे लगते हैं. ऐसे में जानकारों का मानना है कि अगर प्राइवेट अस्पतालों में भी वैक्सीन का दाम 200 रुपए प्रति डोज़ से कम होता है, तो ज़्यादा लोग वैक्सीन का ख़र्च वहन कर सकेंगे.

बता दें कि कोविशील्ड वही वैक्सीन है, जिसे ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी में तैयार किया गया. भारत में इस वैक्सीन का निर्माण शुरू किया गया पुणे के सीरम इंस्टिट्यूट में. इसके तीसरे फ़ेज़ के ह्यूमन ट्रायल के आंकड़े आए. जल्द ही वैक्सीन को इमरजेंसी यूज का अप्रूवल मिल गया. इसके अलावा भारत बायोटेक की ओर से तैयार कोवैक्सीन भी देश में लगाई जा रही है. इसके लिए भी सरकार की ओर से अप्रूवल दिया जा चुका है.

कोविशील्ड के रेट घटाने से जुड़ी इस खबर से पहले तक सरकार इसके हर डोज़ के लिए 210 रुपए चुका रही थी. इंडिया टुडे में सूत्रों के हवाले से छपी ख़बर की मानें तो अब सरकार और सीरम इंस्टिट्यूट के बीच 150 रुपए प्रति डोज़ से भी कम का रेट लगाने का समझौता हुआ है. सरकार ने ये भी कह दिया है कि देश में अब वैक्सीन की कोई कमी नहीं है. 

दूसरे चरण का वैक्सीनेशन इस समय देश में चल रहा है. 45 साल से ज़्यादा उम्र के ऐसे व्यक्ति, जिन्हें बीमारियां हैं, उन्हें कोरोना का टीका प्राथमिकता के आधार पर लगाया जा रहा है. वैक्सीन लगवाने का रजिस्ट्रेशन कोविन ऐप पर हो रहा है. उसको डाउनलोड करना है. उसमें जानकारी देनी है. फिर आएगा वैक्सीनेशन केंद्रों का पता. अपनी सुविधा के हिसाब से वैक्सीन केंद्र और समय-दिन चुनिए. और तय समय पर वैक्सीन लेने पहुंच जाइए. पहला डोज़ लीजिए. फिर 28 दिन बाद वैक्सीन का दूसरा डोज़. इति. 


वीडियो : एम्स में कोरोना की वैक्सीन लगवाते हुए ये बात कैसे भूल गए पीएम मोदी? 

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