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अंतरिक्ष में चंद्रयान भेज रहे ISRO के वैज्ञानिकों की सैलरी सरकार ने कम क्यों कर दी?

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ISRO यानी इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन. भारत की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी. काम है अंतरिक्ष में शोध करना. हाल फिलहाल नाम आ रहा है कि इसरो स्पेस में, एक बार फिर से, चंद्रयान भेजेगा. पहले भी ऐसा हो चुका है, ये दूसरी दफा होने जा रहा. इसकी खबरें चल रही हैं, और सरकार की वाहवाही हो रही है. लेकिन इसे अंतरिक्ष में भेजने वाले वैज्ञानिकों के पैसे कटने वाले हैं.

इसरो में करीब 16 हजार वैज्ञानिक और इंजीनियर काम करते हैं. आज तक की खबर के मुताबिक यहां काम करने वाले 85 से 90 फीसदी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सैलरी घटने वाली है. वजह है केंद्र सरकार का एक फैसला. इसरो के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों को 1996 से दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि के रूप में प्रोत्साहन अनुदान राशि मिलती थी. अंग्रेजी में इसे इंसेंटिव कहते हैं. भारत सरकार इसे 1 जुलाई से बंद करने जा रही है.

क्या है इतिहास?

एक जनवरी 1996. वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के लिए प्रोत्साहन राशि शुरू की गई थी. इसके पीछे वजह थी वैज्ञानिकों को इसरो के प्रति प्रोत्साहित करना, आकर्षित करना और संस्थान छोड़कर जाने से रोकना. इसरो में किसी वैज्ञानिक की भर्ती C ग्रेड से शुरू होती है. इसके बाद उनका प्रमोशन D,E,F,G और आगे के ग्रेड में होता है. हर ग्रेड में प्रमोशन से पहले एक टेस्ट होता है. 1 जनवरी 1996 से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि D,E,F,G ग्रेड के वैज्ञानिकों को मिलती थी.

क्या होगा असर?

12 जून 2019. सरकार की ओर से एक आदेश जारी किया गया. कहा गया कि इस राशि पर रोक लगा लगाई जा रही है. एक जुलाई 2019 से. छठे वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर वित्त मंत्रालय और व्यय विभाग ने अंतरिक्ष विभाग को सलाह दी कि वह इस प्रोत्साहन राशि को बंद करे. इसकी जगह अब सिर्फ परफॉर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव स्कीम (PRIS) लागू की गई है.

क्या है PRIS? 

फुलफॉर्म है परफॉर्मेंस रिलेटेड इंसेंटिव स्कीम. केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए 6वां वेतन आयोग बना था. इसके सलाह दी थी कि कर्मचारी को उसके ओवरऑल  परफॉर्मेंस के आधार पर इंसेंटिव देने का प्रावधान किया गया था. यानी जो अच्छा काम करेगा उसे प्रोत्साहन के रूप में इनसेंटिव मिलेगा.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस सरकारी आदेश से इसरो के करीब 85 से 90 फीसदी वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की सैलरी 8 से 10 हजार रुपए घट सकती है. इस आदेश से पहले तक इसरो अपने वैज्ञानिकों को प्रोत्साहन राशि और PRIS स्कीम दोनों दे रही थी. लेकिन अब अतिरिक्त वेतन के तौर पर दी जाने वाली यह प्रोत्साहन राशि एक जुलाई से नहीं मिलेगी.

isroj

5 साल में 289 वैज्ञानिकों ने छोड़ा इसरो

2017 में मीडिया रिपोर्ट्स आई थी. आरटीआई के हवाले से. पता चला कि 2012 से 2017 यानी 5 साल में 289 वैज्ञानिक ने इसरो छोड़ा. इसरो के जिन प्रमुख केंद्रों में से सबसे ज्यादा वैज्ञानिकों ने नौकरी छोड़ी है -वे हैं सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र श्रीहरिकोटा, विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र तिरुवनंतपुरम, सैटेलाइट सेंटर बेंगलुरू और स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पेस डिपार्टमेंट को हेड करते हैं. सरकार प्रतिभा पलायन को रोकने के लिए कई तरह के दावे कर रही है. लेकिन इसरो के लेकर किए गए इस फैसले से वैज्ञानिक थोड़े निराश जरूर होंगे, ऐसा कहा जा सकता है.


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