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क्या आरबीआई ने गूगल पे को बैन कर दिया है?

26 जून, शुक्रवार की शाम ट्विटर पर गूगल पे ट्रेंड करने लगा. इससे जुड़े तीन हैशटैग ट्रेंड कर रहे थे. #GPayBanned By RBI, #GPay Is Illegal और #Google Pay. कुछ लोगों ने हैशटैग चलाकर ये कहना शुरू कर दिया कि आरबीआई ने गूगल पे को बैन कर दिया है. वहीं कुछ लोगों का कहना था कि गूगल पे गैर-कानूनी है. इन हैशटैग से ट्वीट करने वालों ने कुछ खबरों के लिंक शेयर किए.

तो क्या वाकई में गूगल पे को आरबीआई ने बैन कर दिया है? ये बातें कहां से उठीं. सोशल मीडिया पर क्यों इस तरह की बातें की जा रही हैं?

क्या है मामला?

20 जून को न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से कई मीडिया संस्थानों ने एक खबर छापी. इसमें कहा गया कि आरबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा है कि गूगल पे पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर नहीं है. 26 जून को हैशटैग चलाने वालों ने इस खबर का लिंक शेयर किया.

क्या था पीटीआई की खबर में?

पीटीआई की खबर के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक यानी आरबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि गूगल पे एक थर्ड पार्टी ऐप प्रोवाइडर है और यह किसी पेमेंट सिस्टम को संचालित नहीं करता है. आरबीआई ने चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जालान की पीठ को बताया कि इसलिए इसके संचालन से 2007 के भुगतान और निपटान प्रणाली कानून यानी Payment and Settlement System Act of 2007 का उल्लंघन नहीं होता है. आरबीआई ने कोर्ट को ये भी बताया कि गूगल पे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की अधिकृत भुगतान प्रणाली परिचालकों की लिस्ट में शामिल नहीं है.

जनहित याचिक पर चली है सुनवाई

दरअसल, वित्तीय अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा ने एक जनहित याचिका में आरोप लगाया था कि गूगल का मोबाइल भुगतान ऐप गूगल पे या संक्षेप में जीपे, आरबीआई से मंजूरी के बिना वित्तीय लेन-देन की सुविधा दे रहा है. इस याचिका के जवाब में आरबीआई ने यह बात कही.

मिश्रा ने दावा किया था कि जीपे भुगतान और निपटान कानून का उल्लंघन कर एक भुगतान प्रणाली प्रदाता के रूप में काम कर रहा है, जबकि उसके पास इस तरह के कामों के लिए देश के केंद्रीय बैंक से कोई वैध अनुमति नहीं है. पीठ ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई की जरूरत है, क्योंकि यह अन्य तीसरे पक्ष के ऐप को प्रभावित करता है. इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी.

फिर चलने लगे बैन के मैसेज

इसके बाद सोशल मीडिया पर ये बातें होने लगी कि गूगल पे के जरिए पैसे का लेन-देन कानून के मुताबिक नहीं है. क्योंकि यह एक अनधिकृत ऐप है. इसके बाद गूगल की ओर से सफाई आई. पीटीआई की खबर के मुताबिक गूगल के एक प्रवक्ता ने कहा,

सोशल मीडिया में कुछ जगह आरबीआई को गलत तरीके से कोट करके यह दावा किया गया है कि गूगल पे के जरिए पैसे का लेन-देन कानून के मुताबिक नहीं है, क्योंकि ये ऐप अनधिकृत है. यह गलत है और इसकी सच्चाई एनपीसीआई की वेबसाइट पर पता की जा सकती है.

गूगल पे के प्रवक्ता ने कहा कि आरबीआई ने इस तरह की कोई बात अदालत की सुनवाई में नहीं कही है. इस महीने की शुरुआत में आरबीआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया था कि गूगल पे एक तृतीय पक्ष ऐप प्रदाता है और किसी भी भुगतान प्रणाली को संचालित नहीं करता है. आरबीआई ने साथ ही कहा कि इसका संचालन 2007 के भुगतान और निपटान प्रणाली कानून का उल्लंघन नहीं है.

24 जून को गूगल पे इंडिया की तरफ से एक ट्वीट किया गया.

Google पे के माध्यम से किए गए सभी लेन-देन पूरी तरह से RBI/NPCI के लागू दिशा-निर्देशों द्वारा निर्धारित निवारण प्रक्रियाओं द्वारा सुरक्षित हैं. उपयोगकर्ता Google पे कस्टमर केयर के माध्यम से किसी भी मदद के लिए 24/7 तक पहुंच सकते हैं.

एक और ट्वीट में कहा गया कि Google पे पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर संचालित होता है. पार्टनर बैंक के लिए हम टेक्नोलॉजी सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर काम करते हैं. ताकि UPI के माध्यम से भुगतान किया जा सके. देश में UPI ऐप्स को ‘थर्ड पार्टी ऐप’ के रूप में वर्गीकृत किया गया है. उन्हें Payment Systems Operators होने की जरूरत नहीं है.

26 जून को ‘गूगल पे’ ट्रेंड होने के बाद ‘गूगल पे इंडिया’ ने एक बार फिर उस खबर को ट्वीट किया और अपना पक्ष रखा.

गूगल पे का कहना है कि यूजर्स वॉट्सऐप फॉरवर्ड मैसेज पर यकीन न करें. बाकी पेमेंट ऐप की तरह गूगल पे पर भी ट्रांजेक्शन पूरी तरह सेफ है.


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