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सुंदर पिचाई ने बताया, पिता ने उन्हें अमेरिका भेजने के लिए अपनी कितनी कमाई खर्च कर दी थी

सुंदर पिचाई. गूगल के सीईओ. 7 जून को यूट्यूब पर उनका एक वीडियो आया. यूट्यूब ऑरिजिनल्स ने यह वीडियो पोस्ट किया. इसके जरिए पिचाई ने छात्रों को मैसेज दिया. हिम्मत न हारने, दिमाग को खुला रखने जैसे सबक दिए. साथ ही अपने बारे में भी बताया. कि कैसे उनके पिता ने उन्हें अमेरिका भेजने के लिए संघर्ष किया. सुंदर पिचाई ने यह बातें यूट्यूब की सीरीज Dear Class of 2020 के तहत कही.

पहले जान लेते हैं क्या है Dear Class of 2020

Dear Class of 2020 यूट्यूब का एक कार्यक्रम है. इसे साल 2020 में पढ़ने वाले बच्चों के लिए बनाया गया है. दरअसल कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर में स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह नहीं हो पाए. ऐसे में यूट्यूब ने छात्रों के लिए एक तरह से वर्चुअल दीक्षांत समारोह आयोजित किया. इसके लिए कई बड़ी हस्तियों को शामिल किया गया. इनमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा, उनकी पत्नी मिशेल ओबामा, सिंगर लेडी गागा, बेयोंस, टेलर स्विफ्ट, मलाला यूसुफजई जैसे लोग थे. सुंदर पिचाई भी इसी तरह से Dear Class of 2020 में शामिल हुए.

पिता के बारे में क्या कहा

सात मिनट के वीडियो में पिचाई ने कई बातें बताई. इन्हीं में से एक उनके अमेरिका जाने के बारे में थी. उन्होंने कहा कि 21 साल की उम्र में वे अमेरिका आए थे. स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए उन्होंने भारत छोड़ा था. पिचाई ने कहा,

मेरे पिता ने अपनी एक साल की कमाई मेरे अमेरिका आने पर खर्च की थी, ताकि मैं स्टेनफोर्ड में पढ़ सकूं. उस समय मैं पहली बार प्लेन में बैठा था.

उन्होंने अमेरिका में रहने के शुरुआती दिनों के बारे में भी बताया. कहा कि अमेरिका में रहना महंगा था. घर पर फोन करने पर एक मिनट के दो डॉलर लगते थे. यानी आज के हिसाब से 150 रुपये. एक बैकपैक की कीमत उनके पिता की महीनेभर की सैलरी के बराबर थी. इसके अलावा परिवार, दोस्त और गर्लफ्रेंड जो अब पत्नी हैं, याद आते थे. ऐसे समय में केवल कंप्यूटर ही ऐसी चीज थी, जिसने सहारा दिया.

स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान सुंदर पिचाई.
स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान सुंदर पिचाई.

पिचाई बोले- बेसब्र बनें

सुंदर पिचाई ने कहा कि किस्मत, तकनीक को लेकर जूनून और खुले दिमाग की वजह से ही वे आज यहां है. उन्होंने स्टूडेंट्स से कहा कि कभी भी उम्मीद और अपनी बेसब्री को मत खोना. जिस भी चीज से आप प्यार करते हैं, उसके लिए खुला दिमाग रखिए. उन्होंने कहा,

टेक्नोलॉजी कभी-कभी आपको उकता सकती है. बेसब्र कर सकती है. लेकिन इस बेसब्री को मत खोना. इसके जरिए नई तकनीकी क्रांति होगी. इसके जरिए आप वह कर पाएंगे, जो मेरी जनरेशन सोच भी नहीं पाएगी. हो सकता है कि आप जलवायु परिवर्तन या शिक्षा पर मेरी पीढ़ी से निराश हों. अगर ऐसा है, तो बेसब्र बनें. इससे दुनिया को वह तरक्की मिलेगी, जिसकी उसे जरूरत है.

पिचाई ने कोरोना वायरस महामारी के बारे में भी बात की. छात्रों से कहा कि वे इस महामारी से जीत जाएंगे. उन्होंने कहा.

आप जीतेंगे. मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि आपसे पहले भी कई लोग ऐसा कर चुके हैं. 100 साल पहले 1920 की कक्षा के छात्र भी खतरनाक महामारी के बीच ग्रेजुएट हुए थे. 50 साल पहले 1970 की कक्षा के छात्र वियतनाम युद्ध के बीच ग्रेजुएट हुए थे. और 20 साल पहले 2001 की कक्षा के छात्र 9/11 हमले से ठीक पहले ग्रेजुएट हुए थे. इस तरह के कई उल्लेखनीय उदाहरण हैं. इतिहास की लंबी कहानी हमें बताती है कि उम्मीद रखने के बहुत से कारण हमारे पास हैं.

बता दें कि सुंदर पिचाई ने आईआईटी खड़गपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद अमेरिका गए. वहां स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री ली. बाद में उन्होंने व्हार्टन स्कूल से एमबीए भी किया. 2004 में वे गूगल से जुड़े थे. साल 2015 में वे गूगल के सीईओ बने थे.

सुंदर पिचाई का पूरा वीडियो यहां देखिए-


Video: परीक्षा से पहले स्टूडेंट्स को क्या करना चाहिए?

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