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दहेज देने के लिए गुजरातियों ने एक नायाब तरीका ढूंढ निकाला है

गुजरात. देश को थोड़ा-बहुत भी जानने वाले लोगों से पूछो, तो कहेंगे कि खूब पैसे वाली जगह है. लोगों को लगता है कि यहां का आदमी सिर्फ साड़ी बेचने बिजनेस करने पर फोकस करता है. लोग कहते हैं कि जराती होते भी सीधे-सादे हैं (शौक-ए-दीदार…), लेकिन दोस्त जहां फायदे की बात आती है, वहां हर कोई चालाक हो जाता है. अब देखो, संडे को राजकोट में सामूहिक विवाह का एक ‘छोटा सा’ फंक्शन हुआ. इसमें पांच कपल्स की शादियां कराई गईं. अपने यहां हर शादी में दहेज दुल्हन के नाम पर दिया जाता है, लेकिन राजकोट के इस फंक्शन में सासू मांओं को ‘गिफ्ट्स’ दिए गए. खूब सारे गिफ्ट्स. बाकी आप समझदार हैं.

ये सामूहिक विवाद कराने वाले ऑर्गनाइजर्स और शादी वाले पांचों परिवारों का कहना है कि ये दहेज नहीं है, बल्कि बड़ों का सम्मान करने का एक तरीका है. इन लोगों के मुताबिक, ‘दहेज में लड़की का परिवार लड़की को वो चीजें देता है, जो नई जगह पर उसके काम आती हैं और वो इन चीजों को वापस नहीं मांग सकते. हम लोगों ने सासू मांओं को जो स्कूटी दी हैं, वो सम्मान दिखाने का एक तरीका है. हमारी कोशिश है कि हमारे बुजुर्गों को बुढ़ापे में ओल्ड-एज होम न जाना पड़े.’

हां, ऑर्गनाइजर्स का यही मानना है. उन्हें लगता है कि अगर वो इस तरह बुजुर्गों को गिफ्ट देंगे और उन्हें मालामाल बनाएंगे, तो उन्हें ओल्ड-एज होम नहीं जाना पड़ेगा. एक ऑर्गनाइजर धर्मसिंह जडेजा कहते हैं, हमारे समाज से संयुक्त परिवार तेजी से कम हो रहे हैं. अब कपल अकेले रहने लगे हैं. इससे बुजुर्ग अकेले हो जाते हैं.’ एक और ऑर्गनाइजर विजय जडेजा कहते हैं, ‘हम ये नहीं कहते कि लोग पैसे न होने पर पेरेंट्स को ओल्ड-एज होम भेज देते हैं, लेकिन हमें सच्चाई का सामना करना चाहिए. इसलिए हम लोग सासू मांओं को समृद्ध बना रहे हैं.’

ये आखिर कैसा तर्क है. हम लोग पहले ही दहेज जैसी बेहूदा प्रथाओं से जूझ रहे हैं. इसकी शक्ल बदलकर इसे बढ़ावा देना कहां की समझदारी है. और ऊपर से ये कहना कि इससे बुजुर्गों को ओल्ड-एज होम नहीं जाना पड़ेगा, और भी घटिया है. इंटरनेट खंगालिए. वहां पता चलता है कि भारत में ओल्ड-एज होम्स की बढ़ती तादाद के पीछे लोगों की कमजोर आर्थिक स्थिति छोटा कारण है. लोगों का इगो, मटीरियलस्टिक लाइफस्टाइल और जिम्मेदारी से भागना बड़ा कारण है. ऐसे में गिफ्ट्स देने की प्रथा चलाकर कैसे हालात सुधारे जा सकते हैं. चीजें दुल्हन की दी जाएं या उसकी सास को, दोनों में क्या फर्क है?

और गिफ्ट्स भी कैसे! इन पांच सासू मांओं को एक-एक स्कूटी, सोने की नाक की कीलें, फ्रिज, किचन का सामान, बेड और पंखे दिए गए हैं. इसके अलावा दुल्हनों को उनके परिवारों की तरफ कपड़े और जूलरी तो दी ही गई. अब जरा बताइए कि दहेज में इन चीजों के अलावा और क्या दिया जाता है. तो इसे तोहफा कहा जाए या दहेज! और क्या इन चीजों से लोग अपने बुजुर्ग मां-बाप को ओल्ड-एज होम नहीं भेजेंगे. स्कूटी और फ्रिज जैसी चीजों को बुजुर्ग क्या गले में लटकाकर घूमेंगे.

लोगों को संवेदनशील होने की जरूरत है. जरूरत है कि वो जिम्मेदारी उठाएं. दहेज की शक्ल बदलने और गिफ्ट्स देने से कोई बदलाव नहीं आएगा.

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