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GDP गिरने पर रघुराम राजन ने सरकार को बहुत बड़ी नसीहत दे दी है

RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन. उन्होंने गिरती GDP, सरकार द्वारा उठाए जा रहे क़दमों और तमाम बातों पर एक लेख लिखा है. Linkedin पर. इस लेख में राजन ने कहा है कि सरकार जिस तरह आगे आने वाले दिनों के लिए अपने संसाधन बचा रही है, उसे इकॉनमी को बचाने के प्रयास ही असफल हो जाते हैं. 

और क्या कहा है राजन ने?

लेख की शुरुआत में ही रघुराम राजन ने कहा है कि पहली तिमाही की GDP से हम सभी को चिंतित होना चाहिए. उनके मुताबिक, असंगठित क्षेत्र में होने वाले नुक़सान को अगर देखें तो स्थिति 23.9 प्रतिशत की गिरावट से और भी ज़्यादा बुरी हो सकती है. उन्होंने लिखा है कि सरकार जो प्रयास कर रही है, वो बहुत कम है. 

रघुराम राजन ने लिखा,

“सरकार आज के समय में ज़्यादा राहत नहीं देना चाह रही है. आगे आने वाले समय के लिए संसाधन बचा रही है. ये रणनीति अपने में ही विफल है.”

मरीज़ का उदाहरण देकर बताया कि राहत पैकेज क्यों जरूरी है.

“अगर आप अर्थव्यवस्था को एक मरीज़ की तरह समझेंगे, तो राहत पैकेज ऐसी दवा की तरह है जिससे मरीज़ बीमारी से लड़ सकता है. मरीज़ दवा की वजह से जल्दी ठीक हो पाएगा. लेकिन अगर समय रहते दवा नहीं दी गई, और उसकी हालत ज्यादा बिगड़ गई तो दवा भी काम नहीं करेगी.

इसी तरह राहत के बिना, घरों में खाना बनना बंद हो जाएगा, लोग अपने बच्चों को स्कूलों से निकालकर उन्हें काम पर या भीख मांगने भेज देंगे, अपना सोना पैसे उधार लेने के लिए गिरवी रख देंगे, किश्त और किराये का अंबार लग जाएगा. और बिना राहत के छोटे व्यवसाय कर्मचारियों को तनख़्वाह देना बंद कर देंगे. क़र्ज़ बढ़ता जाएगा और फिर वे हमेशा के लिए बंद हो जायेंगे. कमाई शुरू होने के बाद भी क़र्ज़ से डूबे परिवार खुलकर ख़र्च नहीं कर पाएंगे.”

अमेरिका और ब्राज़ील को लेकर क्या लिखा?

राजन ने लिखा कि ब्राज़ील ने अपने यहां राहत पर बहुत ख़र्च किया. नतीजा ये रहा कि वहां भारत के मुक़ाबले अर्थव्यवस्था में कम गिरावट हुई. वहीं अमेरिका ने अपनी जीडीपी का 20 प्रतिशत राहत में लगा दिया, फिर भी वो चिंतित है कि 2021 के आखिर तक उनकी अर्थव्यवस्था प्री-कोविड लेवल तक नहीं आ पाएगी. ऐसे में भारत को वी-शेप्ड रिकवरी का दावा करने की बजाए, राहत पैकेज पर ध्यान देना चाहिए.

उन्होंने कहा है,

“सरकार को हर दिशा में प्रयास करने चाहिए. और बेहद बुद्धिमानी से ख़र्च करना चाहिए. सरकार को ऐसे प्रयास करने चाहिए कि बिना ख़र्च किए अर्थव्यवस्था आगे बढ़ने लगे. और इस सबके लिए बेहद विचारशील और सक्रिय सरकार की ज़रूरत है. लेकिन दुर्भाग्य है कि सरकार शुरुआत में कुछ दिनों तक काम करने के बाद अपने खोल में वापस दुबक गयी है.”

राजन ने और क्या सुझाव दिए?

– मनरेगा एक जांचा-परखा तरीक़ा है. सरकार को ज़रूरत के हिसाब से इसको काम में लाना चाहिए. महामारी की समयसीमा को देखते हुए, ग़रीबों और शहरों में रह रहे लोगों को, जिनके पास मनरेगा की सुविधा नहीं है, उन्हें और ज़्यादा कैश ट्रान्सफर की सुविधा सरकार को देनी चाहिए. सरकार और सरकारी कम्पनियों को जल्द से जल्द अपने भुगतान को क्लियर करना चाहिए, जिससे पैसे का फ़्लो दुरुस्त हो सके.

– छोटे उद्योगों को पिछले साल के GST में पूरी या थोड़ी राहत देने की ज़रूरत है. इससे छोटे उद्योगों को मदद मिलेगी. साथ ही सरकारी बैंकों को जिलाने के लिए सरकार को अलग से संसाधनों को मैनेज करना होगा.

– प्राइवेट सेक्टर को भी मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाना होगा. ऐमज़ान. रिलायंस या वॉल्मार्ट जैसे अमीर व्यवसायों को छोटे व्यापारियों की मदद करनी चाहिए, ताकि वो अपने पैरों पर खड़े हो सकें. साथ ही सरकार को इन्फ़्रस्ट्रक्चर कन्स्ट्रक्शन में निवेश करने की ज़रूरत है. इससे नौकरियां पैदा होंगी, और स्टील और सीमेंट जैसी चीज़ों की ज़रूरत पैदा होगी.

– दुनियाभर की रिकवरी भारत के मुक़ाबले जल्दी होगी, ऐसे में निर्यात को तरजीह देना भारत के लिए एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. और उसके लिए सरकार को अपने मौजूदा टैरिफ़ को कम करना होता, ताकि आयात कम क़ीमत पर हो सकें. और टैरिफ़ सेट करने के बाद सरकार को उसमें बार-बार बदलाव करने को कठोर बना देना चाहिए. ऐसा न करने से उत्पादकों का भरोसा निर्यात के लिए प्रोडक्शन में कम हो जाएगा.

– साथ ही सरकार को भू-अधिग्रहण, मज़दूरी, पॉवर और आर्थिक क्षेत्रों में लम्बे समय से बहसों का हिस्सा रहे बदलावों को शामिल करना होगा. भारत को एक मज़बूत ग्रोथ की ज़रूरत है. और इसकी ज़रूरत हमारे युवाओं को बस संतुष्ट करने के लिए ही नहीं, बल्कि हमारे शत्रु पड़ोसी देशों को दूर ही रखने के लिए भी है.

 


लल्लनटॉप वीडियो : RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने बताया कोरोना वायरस का इकॉनमी पर क्या असर पड़ेगा?

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