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बिहार के गया में गायब होने के 9 दिन बाद दो टुकड़ों में मिली 16 साल की लड़की

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फोन आया हमारे मोबाइल पर. बोले कि मैदान में लाश मिली है. आओ, पहचान कर जाओ. हम लोग दौड़े-दौड़े गए. देखा हमने, मैडम हमारी ही बच्ची थी. 

जब किसी सुबह 16 साल की लड़की के पिता से सवाल करना होता है, जिनकी बेटी की लाश घर से एक किलोमीटर दूर मैदान में मिली, तो समझ में नहीं आता है कि उनसे क्या पूछा जाए. गुमशुदा होने के नौवें दिन. सिर कटी लाश. सवाल करते हुए किसी पल आपके मुंह से निकलता है लाश. और तभी आपको करंट लगता है. क्योंकि आपको एहसास होता है कि आप एक पिता के आगे उसकी बेटी का ज़िक्र लाश कहकर कर रहे हैं. ये बिहार के गया की वारदात है. एक शाम 16 साल की एक लड़की गायब हो गई. नौवें दिन उसके दो टुकड़े मिले- सिर अलग, धड़ अलग. मां-बाप को अपनी बेटी की आखिरी झलक याद है. क्रीम कलर की कुर्ती, उस पर बैंगनी स्वेटर. इसके बाद जब उन्होंने बेटी को देखा, तब वो लाश थी. लाश भी ऐसी कि सड़ने लगी थी.

पांच रुपये लेकर बाज़ार को निकली थी, फिर आई नहीं
गया में एक पटवा टोली नाम की जगह है. बुनकरों का इलाका है. लड़की के माता-पिता दोनों बुनकर मज़दूर हैं. जिसकी हत्या हुई है, वो चार बहनों में दूसरे नंबर पर थी. पिछले साल स्कूल छूट गया था. अब वो कोचिंग जाती थी. साथ में बुनकरी का काम भी करती थी. उसी जगह, जहां माता-पिता काम करते थे. 28 दिसंबर की शाम कुछ सामान लाने बाज़ार को निकली. साथ ले गई पांच रुपये. रात हो गई, वो घर नहीं लौटी. घरवालों ने बहुत खोजा. उन्हें लगा शायद किसी से प्यार-मुहब्बत हो और उसके साथ चली गई हो. दो-तीन दिन तक खोजते रहे. नहीं मिली, तब जाकर इलाके के बुनियादगंज थाने पहुंचे. SHO हैं मनोज कुमार. पिता ने थाने जाकर शिकायत की. एक नाबालिग लड़की तीन-चार दिन से लापता है, ये जानने के बाद भी पुलिस ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई. लड़की के पिता का कहना है कि पुलिस ने शिकायत लिखी ही नहीं.

लड़की की लाश इलाके के ही एक मैदान में मिली (फोटो: बिमलेंदु चैतन्य, इंडिया टुडे ग्रुप)
लड़की की लाश इलाके के ही एक मैदान में मिली. ये जगह बुनियादगंज थाने से आधे किलोमीटर पर है (फोटो: बिमलेंदु चैतन्य, इंडिया टुडे ग्रुप)

 

सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि लड़की के शरीर पर एसिड डाला गया था. लेकिन बुनियादगंज पुलिस का कहना है कि लाश की हालत देखकर लगता है कि मिलने से तीन-चार दिन पहले ही हत्या कर दी गई थी. बॉडी सड़ने लगी थी (फोटो: बिमलेंदु चैतन्य, इंडिया टुडे ग्रुप)
सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि लड़की के शरीर पर एसिड डाला गया था. लेकिन बुनियादगंज पुलिस का कहना है कि लाश की हालत देखकर लगता है कि मिलने से तीन-चार दिन पहले ही हत्या कर दी गई थी. बॉडी सड़ने लगी थी (फोटो: बिमलेंदु चैतन्य, इंडिया टुडे ग्रुप)

जब मिली, दो टुकड़ों में मिली
आठ दिन की गुमशुदगी के बाद 6 जनवरी को सुबह यहीं इलाके के एक मैदान में झाड़ियों के पीछे उसकी लाश बरामद हुई. दो टुकड़ों में- सिर अलग और धड़ अलग. पिता का कहना है कि उनकी बेटी को अगवा किया गया, फिर उसके साथ बलात्कार हुआ. फिर अपराधियों को लगा होगा कि शायद पुलिस उन तक पहुंच जाए. इसीलिए उन्होंने मारकर फेंक दिया. पुलिस की सुस्ती, उसकी कथित लापरवाही पर लोग नाराज़ हैं. इसी नाराज़गी में 8 जनवरी को लोगों ने कैंडल मार्च निकाला. उस कैंडल मार्च की तस्वीरें लोगों ने सोशल मीडिया पर डालीं. और उन तस्वीरों-पोस्ट्स के मार्फ़त ये ख़बर हम तक पहुंची.

ये वो शिकायत है, जिसके आधार पर बुनियादगंज थाने ने 4 जनवरी को FIR दर्ज़ की (फोटो: बिमलेंदु चैतन्य, दी लल्लनटॉप)
ये वो शिकायत है, जिसके आधार पर बुनियादगंज थाने ने 4 जनवरी को FIR दर्ज़ की (फोटो: दी लल्लनटॉप)

‘मैडम, लाश देखी हमने. हमारी ही बेटी थी’

लड़की के पिता से बात की हमने. उन्होंने जो बताया, वो पढ़िए-

हम मज़दूर आदमी हैं. बुनाई वाली पावर मशीन चलाते हैं. 28 दिसंबर को हमारा नाइट ड्यूटी था. रात आठ बजे खाना खाने घर आए. पता लगा कि शाम साढ़े छह बजे हमारी मंझली बेटी पांच रुपया लेकर बाज़ार गई थी. कुछ खाने-पीने. लेकिन लौटी नहीं. हमने बहुत खोजा, नहीं मिली. दो-तीन दिन तक सब जगह खोजते रहे. हमें लगा कि कहीं प्यार के चक्कर में पड़कर किसी लड़के के साथ न चली गई हो. यही सोचकर थाने नहीं गए. 30 या 31 दिसंबर को बुनियादगंज थाने जाकर सब बताया. लेकिन पुलिस शिकायत लिखने को तैयार नहीं थी. हमको थाना के बारे में, वहां के सिस्टम के बारे में कुछ पता नहीं है. हम आ गए. 2 जनवरी को दोबारा गए थाने में. फिर शिकायत वाला कागज़ दिए, लेकिन पुलिस लोग लिया नहीं. रिसिविंग देने को तैयार नहीं था.

हम लोग पटवा समाज के हैं. समाज के लोगों और दो-चार दोस्तों ने स्थानीय मीडिया को खबर दी. कुछ लोकल पत्रकारों ने थाने में फोन किया. तब जाकर पुलिस ने हमको प्राथमिकी दर्ज़ करवाने के लिए थाने में बुलाया. पुलिस जोर दे रही थी कि किसी का नाम बताओ जिसपर शक हो. हमें शक था ही नहीं, तो किसका नाम लेते. 4 जनवरी को FIR लिखी गई. इसके बाद बाज़ार के किसी दुकानवाले ने बताया कि उनके यहां के सीसीटीवी कैमरे में हमारी बेटी दिखी है. हम देखने गए. ये 28 दिसंबर का वीडियो देखा. वीडियो में हमारी बेटी बाज़ार जा रही थी. उस समय कोई नहीं था आगे-पीछे. उसके निकलने के एक या दो मिनट बाद हाथ में मोबाइल लिए हुए एक लड़का दौड़कर जाता दिखा वीडियो में. लड़के का चेहरा साफ नहीं था.

6 जनवरी को हम पेन ड्राइव में ये वीडियो ले रहे थे. तभी फोन आया. हमारे घर से करीब एक किलोमीटर दूर एक मैदान है. वहां एक सीमेंट की दुकान है. सुबह दुकानवाला दुकान खोलने गया. पास में झाड़ी है. वहां पेशाब कर रहा था कि लाश दिखी. खबर फैली, तभी हमको फोन आया. हम दौड़े गए. हमारे पहुंचने तक पुलिस भी पहुंच गई थी वहां. देखा हमने, मैडम हमारी ही बच्ची थी. 

इस आखिरी वाली लाइन तक पहुंचते-पहुंचते वो रोने लगे थे.

लोगों ने गया में कैंडल मार्च निकाला. इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं (फोटो: फेसबुक)
लोगों ने गया में कैंडल मार्च निकाला. इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर हो रही हैं (फोटो: फेसबुक)

हमने बुनियादगंज थाने के प्रभारी मनोज कुमार से बात की. उनके मुताबिक, लड़की के पिता जब शुरुआत में आए तो उन्होंने कहा कि वो बस इत्तिला करने आए हैं, शिकायत लिखवाने नहीं. मनोज कुमार बोले, पटवा समाज में लड़के-लड़कियां कई बार ऐसा करते हैं. प्यार होता है, तो घर से भाग जाते हैं. फिर कुछ दिन में वापस लौट आते हैं. उन्होंने कहा-

लड़की के पिता 4 जनवरी को दूसरी बार थाने आए. कहा, सनहा (इनफॉर्मल शिकायत) देना चाहते हैं. हमने कहा, FIR लिखवानी होगी. FIR दर्ज़ हुई. हमने उसके घरवालों से पूछा था, मगर लड़की के पास मोबाइल नहीं था. उनको किसी पर शक भी नहीं था. लाश देखकर लगता है कि हत्या कहीं और की गई और 5 जनवरी की रात लाश वहां झाड़ियों में फेंकी गई. लाश की हालत से मालूम होता है कि लड़की को तीन-चार दिन पहले मार दिया गया था. बदबू आने लगी होगी, तो फेंक दिया. 

पुलिस लापरवाही की बात नहीं मान रही है. रेप के बारे में पूछे जाने पर पुलिस ने बताया कि पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट अभी आई नहीं है. आएगी, तभी पक्के से कुछ पता लगेगा. इंडिया टुडे ग्रुप से जुड़े पत्रकार बिमलेंदु चैतन्य ने बताया कि ये घटना जिस पटवा टोली इलाके की है, वो दो वजहों से मशहूर है. एक- इसको बिहार का मैनचेस्टर कहते हैं. यहां के बुनकर ढेर सारा सूती कपड़ा निकालते हैं. दूसरी वजह है IIT. हर साल जब IIT निकालने वाले बच्चों की लिस्ट आती है, तो उसमें कई नाम इस पटवा टोली के भी होते हैं.

इनपुट: बिमलेंदु चैतन्य, इंडिया टुडे ग्रुप


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