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शौर्य चक्र से सम्मानित इन 6 जवानों की कहानियां हर किसी को सुननी चाहिए

इस साल के वीरता पुरस्कारों का ऐलान कर दिया गया है. कुल 6 जवानों को शौर्य चक्र, 4 को बार टू सेना मेडल, 116 को सेना मेडल के लिए नामित किया गया है. सबसे पहले उनके बारे में जान लेते हैं, जिनको शौर्य चक्र मिला है.

#शौर्य चक्र

मेजर अरुण कुमार पांडेय, राष्ट्रीय रायफल (44वीं बटालियन) –

9 जून 2020 को मेजर अरुण कुमार पांडेय को जम्मू-कश्मीर के गांव में कुछ आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली थी. इस पूरे इलाके की मेजर पांडेय को अच्छी जानकारी थी. उन्होंने पूरे सर्च ऑपरेशन को लीड किया. एक वक्त तो वे आतंकियों के सीधे निशाने पर आ गए थे. लेकिन फिर भी खुद को बचाते हुए ऑपरेशन पूरा किया और 2 आतंकियों को मार गिराया.

मेजर रवि कुमार चौधरी, राष्ट्रीय रायफल (55वीं बटालियन) –

मेजर चौधरी ने अप्रैल 2019 में आतंकवादियों के ख़िलाफ चार ऑपरेशंस को लीड करते हुए 13 आतंकवादियों के खात्मे में अहम भूमिका निभाई थी. 2 जून 2020 को मेजर चौधरी को एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के एक गांव में 3 आतंकियों के छिपे होने की जानकारी मिली. यहां भिड़ंत के दौरान मेजर चौधरी के साथी आतंकियों के सीधे निशाने पर आ गए थे. लेकिन अपने साथी को बचाते हुए वो खुद आतंकियों की लाइन ऑफ फायर में आ गए. हालांकि कुशलता के दम पर खुद बचते हुए एक आतंकी को ढेर कर दिया.

कैप्टन आशुतोष कुमार, मद्रास रेजिमेंट (18वीं बटालियन) –

8 नवंबर 2020 को कैप्टन आशुतोष को LOC के पास कुछ आतंकियों के मूवमेंट की ख़बर मिली थी. कैप्टन और उनके साथियों ने आतंकियों का सामना किया. उनके एक साथी को गोली भी लग गई. जिसके बाद कैप्टन अपनी जान की परवाह किए बिना जूझे और एक आतंकी को गोली मारी. हालांकि भिड़ंत में उन्हें भी गोली लग गई और कैप्टन कुमार शहीद हो गए. उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र मिल रहा है.

कैप्टन विकास खत्री, राष्ट्रीय रायफल (16वीं बटालियन) –

दिसंबर 2020 की बात है. कैप्टन खत्री जम्मू-कश्मीर में 12 हज़ार फीट की ऊंचाई पर पेट्रोलिंग ड्यूटी पर तैनात थे. 12-13 दिसंबर को उन्हें ताजी बर्फ पर पैरों के निशान दिखे. तुरंत इन पैरों के निशान का पीछा करना शुरू किया. आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि होने पर योजनाबद्ध तरीके से सारे एग्ज़िट पॉइंट सील करा दिए. घेरकर 2 आतंकियों को मार गिराया, एक को पकड़ा गया.

रायफलमैन मुकेश कुमार, राष्ट्रीय रायफल (9वीं बटालियन) –

16 जुलाई 2020 को जम्मू कश्मीर के एक गांव में चलाए गए सर्च ऑपरेशन में रायफलमैन मुकेश कुमार भी शामिल थे. इसी दौरान जिस मकान में आतंकियों के होने का शक था, वहां से सिविलियंस को हटाया जाने लगा. इसी बीच एक सिविलियन ने अपने कपड़ों के भीतर छिपी बंदूक निकालकर हमला करना चाहा. मुकेश कुमार ने हमलावर को रोका लेकिन उन्हें गोली लग गई. फिर भी पीछे नहीं हटे और पॉइंट ब्लैंक रेंज से उसे मार गिराया.

सिपाही नीरज अहलावत, राष्ट्रीय रायफल (34वीं बटालियन) –

20 जून 2020 को जम्मू कश्मीर में एक ऑपरेशन के दौरान सिपाही नीरज अहलावत ने एक पाकिस्तानी आतंकवादी को मार गिराया था, जो सिविलियंस की आड़ लेकर भागने की फिराक में था.

शौर्य चक्र क्या होता है, ये समझने के लिए हमें अशोक चक्र से समझना पड़ेगा. अशोक चक्र को पीसटाइम का परम वीर चक्र माना जाता है. यानी युद्ध से अलग वीरता और साहस के लिए दिया जाने वाला सबसे बड़ा अवार्ड. कह सकते हैं कि कीर्ति चक्र और शौर्य चक्र, अशोक चक्र के ही दो वर्ग हैं. यह शांति के समय वीरता के प्रदर्शन के लिए दिया जाने वाला पदक है. इसका मेडल कांसे से बना होता है, जिसे हरे रंग की तीन खड़ी लाइनों द्वारा बराबर भागों में विभाजित फीते के साथ दिया जाता है.

# बार टू सेना मेडल

बार टू सेना मेडल 4 को मिला है. इनमें लेफ्टिनेंट कर्नल कृष्ण कांत बाजपेई, मेजर सुरिंदर सिंह लांबा, मेजर राहुल बालमोहन और मेजर अंकित दहिया के नाम हैं. 116 जवानों को सेना मेडल मिला है. इनमें से 15 को मरणोपरांत मिला है.


वीरता पुरस्कारों का ऐलान तो हो गया, पर किसे क्या मिल रहा, ये जानिए

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