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क्या दुनिया के सबसे ताकतवर राष्ट्रपति की गद्दी जाने वाली है?

अमेरिका की राजनीति में इतना बड़ा भूकंप सालों बाद आया है. वॉटरगेट के बाद ये पहली बार है कि किसी अमरीकी राष्ट्रपति पर इतने सीधे और गंभीर तरीके से आरोप लगाए गए हों. अमेरिकी कांग्रेस में अपनी गवाही में पूर्व फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन (FBI) डायरेक्टर जेम्स कोमी ने कह दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने उन्हें इसलिए पद से हटाया ताकी उनके प्रचार कैंपेन और रूस के बीच संबंधों पर चल रही जांच को रोका जा सके.

इसका मतलब हुआ कि ट्रंप ने अपने पद का उपयोग कानून का रास्ता रोकने के लिए किया है. यदि ये बात साबित हो जाती है तो इस आधार पर ट्रंप पर महाभियोग चलाया जा सकता है और 2020 चुनावों से पहले ही उनकी छुट्टी हो सकती है.

 

जेम्स कोमी (फोटोःरॉयटर्स)
जेम्स कोमी (फोटोःरॉयटर्स)

 

हो-हल्ला बुधवार 7 जून से ही चल रहा है. इस दिन कोमी का सेनेट इंटेलिजेंस कमिटी को दिया लिखत बयान लोगों के सामने आया था. इसमें कोमी ने क्रमवार ढंग से बताया था कि कैसे 6 जनवरी 2017 से लेकर 11 अप्रैल 2017 के बीच ट्रंप लगातार उनसे ‘वफादार’ रहने को कहते रहे थे और इशारों में दबाव डाल रहे थे कि माइकल फ्लिन के खिलाफ चल रहे मामले को रफा दफा कर दिया जाए. माइकल फ्लिन ट्रंप के पूर्व सुरक्षा सलाहकार थे. कोमी का कहना ये भी है कि ट्रंप ने बार-बार उनसे ये जानना चाहा था कि कहीं वो तो FBI के राडार पर नहीं हैं.

कोमी ने यही बातें गुरुवार को सेनेट के सामने हुई उनकी पेशी पर भी कहीं. इस पेशी को दुनिया भर में लाइव देखा गया. अभी इस पर ट्रंप का पक्ष विस्तार से आना बाकी है, लेकिन बकौल बीबीसी, जेम्स क्लैपर (पूर्व डायरेक्टर, नेश्नल यूएस इंटेलिजेंस ) जैसे विशेषज्ञ इस मामले को अभी से 2017 के अमेरिका का वॉटरगेट (या उस से भी बड़ा स्कैंडल) बता रहे हैं.

 

माइकल फ्लिन (फोटोःरॉयटर्स)
माइकल फ्लिन (फोटोःरॉयटर्स)

 

पूरा मामला ऐसे समझेंः

#1. अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों के दौरान अफवाहों का बाज़ार गर्म रहा. दोनों कैंडिडेट्स के बारे में दावे किए गए कि वो चुनाव पर असर डालने की अच्छे-बुरे तरीके आज़मा रहे हैं. ट्रंप पर इल्ज़ाम लगा कि उनके प्रचार के पीछे अमरीका के दुश्मन नंबर वन रूस का हाथ हो सकता है. लेकिन काफी समय तक ये सिर्फ अनुमान रहते हैं.

#2. ट्रंप राष्ट्रपति चुन लिए जाते हैं और और बराक ओबामा उन्हें ये सलाह देते हैं कि वो माइकल फ्लिन को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार न बनाएं. इसके पीछे फ्लिन के खिलाफ चल रही जांच का हवाला दिया जाता है. रूस के आधिकारिक चैनल रशिया टुडे (जिसे अमरीका प्रोपागंडा चैनल मानता है) से फ्लिन की नज़दीकियां थीं और उनके बीच कुछ लेन-देन भी हुआ था.

#3. बावजूद इसके 18 नवंबर 2016 को घोषणा हो जाती है कि फ्लिन ही अमरीका के अगले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होंगे.

#4. 29 दिसंबर 2016 को ओबामा 35 रूसी राजनयिकों को अमरीकी राष्ट्रपति चुनावों में दखल देने के इल्ज़ाम में वापस भेज देते हैं. यहां से चुनावों में रूस की भूमिका का मामला गंभीर हो जाता है. इसी दिन फ्लिन की रूसी राजदूत सर्गेई किसल्याक से फोन पर बात होती है. ये बात तूल पकड़ लेती है. उप-राष्ट्रपति बनने जा रहे माइक पेंस को टीवी पर आकर कहना पड़ता है कि फ्लिन के फोन कॉल में कोई सरकारी बात लीक नहीं हुई है.

 

माइक पेंस (फोटोःरायटर्स)
माइक पेंस (फोटोःरायटर्स)

 

#5. 26 जनवरी 2017 को ट्रंप सरकार के शपथ लेने के हफ्ते भर के अंदर ही जस्टिस डिपार्टमेंट अंदेशा जता देता है कि फ्लिन रूसी ब्लैकमेल के शिकार हो सकते हैं.

#6. ट्रंप फ्लिन को लेकर सवालों के जवाब देने से बचते हैं. लेकिन 11 फरवरी 2017 को फ्लिन खुद इस्तीफा दे देते हैं. कारण देते हैं कि उन्होंने रूसी राजदूत सर्गेई किसल्याक से अपनी बातचीत का कुछ हिस्सा उप राष्ट्रपति माइक पेंस से छुपाया. इसके बाद फ्लिन के खिलाफ जांच बैठ जाती है और पूरे अमरीका में इस मामले पर शोर होने लगता है.

#7. 30 मार्च को फ्लिन के वकील शर्त रखते हैं कि फ्लिन जांच में सहयोग तब करेंगे जब उन्हें कार्रवाई का डर न होगा.

#8. इस पूरे वाकये के दौरान ट्रंप कोमी से मिलते रहते हैं और फ्लिन को बख्श देने की बात कहते रहते हैं.

 

रूसी राजदूत सर्गेई किसल्याक
रूसी राजदूत सर्गेई किसल्याक (फोटोःएपी)

 

#9. 10 मई को ट्रंप रूस के राजदूत से ओवल ऑफिस में मिलते हैं. इस दौरान अमरीकी प्रेस अंदर नहीं जा पाती लेकिन रशिया टुडे का एक पत्रकार मीटिंग को कवर करता है. ट्रंप को इस पर भी सफाई देनी पड़ती है.

#10. 9 मई 2017 को ट्रंप कोमी को FBI डायरेक्टर के पद से हटा देते हैं. उलटी-सीधी बयानबाज़ी होती है. आखिर में वाइट हाउस मान लेता है कि कोमी को राष्ट्रपति चुनावों से जुड़े मामले के कारण हटाया गया है.

कोमी के पद से हटाए जाने के बाद से इस मामले ने असल तूल पकड़ा है. ट्रंप और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के अलावा ट्रंप के दामाद कुशनर पर भी रूस का साया पड़ गया है. 26 मई 2017 को न्यूयॉर्क टाइम्स और वॉशिंगटन पोस्ट की खबरों में दावा किया जाता है कि ट्रंप के दामाद कुशनर किसल्याक के साथ मिल कर रूस के साथ एक बैक चैनल लिंक बनाना की कोशिश कर रहे थे और वे अपनी इस पहल को अमरीकी अधिकारियों से बचा कर रखना चाहते थे.

 

ट्रंप के दामाद जार्ड कुश्नर, बीवी इवांका ट्रंप के साथ. (फोटोःरॉयटर्स)
ट्रंप के दामाद जार्ड कुश्नर, बीवी इवांका ट्रंप के साथ. (फोटोःरॉयटर्स)

 

तो क्या ट्रंप की कुर्सी गई? 

अमरिकी संविधान के आर्टिकल 2 के हिसाब से प्रेसिडेंट, वाइस प्रेसिडेंट या और किसी पदाधिकारी को घूसखोरी, राष्ट्रद्रोह, अपराध या खराब व्यवहार के चलते इम्पीच किया जा सकता है. इम्पीचमेंट का अधिकार यूएस की सीनेट के पास सुरक्षित है. सुप्रीम कोर्ट इस तरह के मसले का रिव्यू नहीं कर सकती.

इस हिसाब से चुनाव धांधली वाले मामले में ट्रंप के खिलाफ महाभियोग का मामला लाया तो जा सकता है लेकिन तभी जब कोमी का बयान आरोप से चल कर सबूत बने. फिर एक काम ज्यूरी को ये मनाना भी रहेगा कि कोमी को अपने पद से हटाए जाने के लिए धमकी मिली थी. यहां भाषा का खेल काम कर जाएगा. इसलिए इस सब में कुछ वक्त लगेगा.

इसके अलावा हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स (यूएस कांग्रेस) जब तक दो तिहाई बहुमत से प्रस्ताव ना पारित करे, किसी पर महाभियोग नहीं चलाया जा सकता. यहां ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद बहुमत में हैं. फिलहाल ज़्यादातर रिपब्लिकन सांसद ट्रंप के साथ ही बताए जाते हैं.

तो कुल जमा बात ये है कि ट्रंप दिन ब दिन अलोकप्रिय होते जा रहे हैं. लेकिन उनकी कुर्सी फिलहाल बची हुई है. लेकिन कब तक, कोई नहीं बता सकता.

*इनपुट रॉयटर्स, बीबीसी एवं गार्डियन से.


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