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चमकी बुखार में जिनके बच्चे मरे, उन्होंने विरोध किया तो केस दर्ज हो गया

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अमेरिका के 16वें राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने डेमोक्रेसी की परिभाषा बताते हुए कहा था. डेमोक्रेसी द गवर्नमेंट ऑफ द पीपल, बाई द पीपल, फॉर द पीपल. इसका हिंदी तर्जुमा होता है- लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा बनाई गई शासन व्यवस्था.

लेकिन बिहार में जो घटना घटी है उस पर अगर अब्राहम लिंकन ज़िंदा होते तो ज़रूर मुस्कुरा रहे होते. बिहार में चमकी बुखार से मरे बच्चों के परिवार वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है. क्योंकि वे लोग नीतीश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे. एफआईआर की लिस्ट में पूरे 19 लोगों के नाम हैं. जबकि 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा हुआ है.

विरोध प्रदर्शन करने की वजह से 39 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है
विरोध प्रदर्शन करने की वजह से 39 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है

दरअसल, 18 जून के दिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुज़फ्फरपुर जाने वाले थे. वो चमकी बुखार से पीड़ित बच्चों को देखने जा रहे थे. हरवंशपुर में भी चमकी की वजह से पांच बच्चों की मौत हुई थी. इसलिए हरिवंशपुर के लोगों ने सड़क जाम कर दी और धरने पर बैठ गए. इसके अलावा गांव के और भी लोग धरने में शामिल हो गए, क्योंकि वो इलाके में पानी की समस्या से काफी परेशान थे.

हरिवंशपुर में लोगों ने 18 जून के दिन प्रदर्शन किया था.
हरिवंशपुर में लोगों ने 18 जून के दिन प्रदर्शन किया था.

जब प्रशासन को पता चला तो लोगों को हटाने की कोशिश की. लोग अड़े रहे और फिर नीतीश कुमार को मुज़फ्फरपुर के लिए दूसरा रास्ता लेना पड़ा. मज़बूरी में लोगों ने प्रदर्शन खत्म कर दिया.

18 जून को नीतीश कुमार मुज़फ्फरपुर के एसकेएमसीएच हालात का जायज़ा लेने पहुंचे थे.
18 जून को नीतीश कुमार मुज़फ्फरपुर के एसकेएमसीएच हालात का जायज़ा लेने पहुंचे थे.

अब पुलिस ने प्रदर्शन करने वाले लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस ने अपनी एफआईआर में लिखा है कि 18 जून के दिन लोगों ने प्रदर्शन तो किया ही, तोड़फोड़ भी की और वहां से गुज़र रहे लोगों के साथ मारपीट भी की.

बिहार में चमकी बुखार से 170 से ज्यादा बच्चों की जान जा चुकी है. मुज़फ्फरपुर, वैशाली, बेतिया, हाजीपुर, सीतामढ़ी समेत 19 ज़िले इस बीमारी के चपेट में आए हैं. अब चूंकि मौसम सुधरा है, मानसून कई इलाकों में सक्रिय हुआ है इसीलिए चमकी बुखार के मामले नहीं बढ़ रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ मुज़फ्फरपुर के एसकेएमसीएच में अब भी चमकी से पीड़ित बच्चों का इलाज़ चल रहा है.


बिहार: चमकी बुखार के शिकार बच्चे ही क्यों होते हैं?

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