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15 जून जैसे हालात से निपटने के लिए सेना को फायरिंग की खुली छूट मिली!

गलवान घाटी की घटना के बाद भारतीय सेना को निर्देश दिया गया है कि चीन के साथ असामान्य हालात में फायरआर्म्स (फायरिंग वाले हथियार) का इस्तेमाल करने में हिचके नहीं. उन्हें फ्री हैंड दिया गया है. इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि केंद्र सरकार ने ये साफ किया है कि फील्ड कमांडर ऐसा फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, भारतीय सेना के दो अधिकारियों ने बताया कि इसके लिए आर्मी ने रूल्स ऑफ इंगेजमेंट (ROE) में बदलाव किया है.

इस पर विवाद भी हुआ था कि 15 जून को भारतीय जवानों ने गोली क्यों नहीं चलाई. प्रोटोकॉल के मुताबिक, दोनों देशों के बीच झड़पों में हथियारों का इस्तेमाल नहीं हो सकता. इसीलिए दोनों देशों के सैनिकों के बीच ऐसी झड़पें हाथापाई, नुकीले रॉड, डंडों, पत्थरों से होती आई हैं.

इससे पहले 18 जून को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल पूछा था कि बिना हथियारों के जवानों को शहीद होने के लिए किसने भेजा? इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जवाब देते हुए कहा,

बॉर्डर पर सभी सैनिकों के पास हमेशा हथियार होते हैं. खासकर जब वो पोस्ट छोड़ रहे होते हैं. 15 जून को गलवान में भी ऐसा ही था. 1996 और 2005 के समझौतों के तहत झड़पों के दौरान फायरिंग हथियार इस्तेमाल ना करने की प्रैक्टिस रही है.

मोदी ने भी खुली छूट की बात कही थी

19 जून को सर्वदलीय बैठक के दौरान भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि बॉर्डर पर सेना को ज़रूरी कदम उठाने की खुली छूट दी गई है. पीएम मोदी ने कहा,

मैं आप सभी को, सभी राजनीतिक दलों को फिर से ये आश्वस्त करता हूं कि हमारी सेनाएं सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम हैं. हमने उन्हें यथोचित कार्रवाई के लिए पूरी छूट दी हुई है. चाहे ट्रेड हो, कनेक्टिविटी हो, काउंटर टेरेरिज्म हो, भारत ने कभी किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया है. राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जो भी ज़रूरी कार्य हैं, जो भी जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण है, उसे तेज गति से आगे भी किया जाता रहेगा.

लगातार हो चुकी हैं बिना हथियारों की झड़पें

हथियारों के इस्तेमाल को लेकर ये बदलाव उस समय आए हैं, जब 15 जून को लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसा में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए. चीन के सैनिकों को भी भारी नुकसान की ख़बरें आईं लेकिन मौतों या घायलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है. 45 साल में पहली बार दोनों देशों के बीच हिंसक झड़प में भारतीय जवान शहीद हुए. ये तनाव मई महीने की 5-6 तारीख से बढ़ता गया, जब पैंगोंग त्सो झील पर दोनों देशों के बीच झड़प हुई थी. इसके बाद 9 मई को सिक्किम चीन सीमा पर भी ऐसा ही हुआ. इसके बाद 15 जून को तनाव हिंसा में बदल गया.


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