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कृषि बिलों पर वोटिंग के दौरान किसके कहने पर सांसदों के माइक बंद किए गए थे?

तारीख थी 20 सितंबर, 2020. राज्यसभा में किसान बिलों पर वोटिंग होनी थी. इस बहसतलब बिल पर होने वाली वोटिंग पर देश की नज़रें थीं. चेयर पर उपसभापति हरिवंश थे. राज्यसभा टीवी का लाइव प्रसारण देशभर में देखा जा रहा था. घड़ी में एक बज चला था और अब बिल के संशोधनों पर वॉयस वोटिंग हो रही थी. बैकग्राउंड में विपक्षी नेताओं के विरोध का शोर सुनाई दे रहा था. एक बजकर 10 मिनट पर टीएमसी के सांसद डेरेक ओ ब्रायन चेयर के पास पहुंचे और छीनकर रूल बुक फाड़ने लगे. दोपहर के सवा एक बजे के आसपास का समय. उपसभापति हरिवंश ने वोटिंग के लिए फ़ार्म बिल को टेबल करने की बात कही थी. और इसके कुछ ही देर बाद राज्यसभा टीवी के प्रसारण से ऑडियो म्यूट हो गया. सिर्फ तस्वीरें दिख रही थी आवाज़ बंद कर दी गई थी. लगभग 21 मिनट तक ऐसी स्थिति रही. और इसी बीच उपसभापति ने कार्रवाई को कुछ देर के लिए स्थगित कर दिया.

इस माइक से आवाज़ चले जाने पर भी बहुत शोर हुआ था. विपक्षियों और आलोचकों की तरफ़ से सीधे सरकार पर आरोप लगाए गए थे. और इसे लेकर RTI कार्यकर्ता साकेत गोखले ने राज्यसभा टीवी में एक RTI अप्लीकेशन दायर किया. पूछा कि माइक क्यों बंद हुआ था? अगर कोई तकनीकी गड़बड़ी थी तो उसका ब्यौरा दें और ये भी बतायें कि कुछ देर में कैसे इसे रीस्टोर कर लिया गया? और ये भी कि अगर वॉयस फ़ीड को जानबूझकर बंद किया गया था तो किसके आदेश पर और क्यों बंद हुआ था?

साकेत गोखले की RTI का राज्यसभा टीवी की ओर से दिया गया जवाब
साकेत गोखले की RTI का राज्यसभा टीवी की ओर से दिया गया जवाब

जवाब आया. जवाब में लिखा गया कि इस बारे में राज्यसभा टीवी के पास कोई जानकारी नहीं है. चैम्बर के भीतर ऑडियो फ़ीड की ज़िम्मेदारी CPWD की है. 

CPWD यानी केंद्रीय लोक निर्माण विभाग जो केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आता है. इस समय ये मंत्रालय केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अधीन है. CPWD का काम बिल्डिंग, रोड, पुल, फ़्लाईओवर, स्टेडियम, ऑडिटोरियम, लैब, बंकर और बॉर्डर की बाड़बंदी के निर्माण का है. राज्यसभा टीवी द्वारा दी गयी जानकारी के हिसाब से संसद के अंदर के कामधाम का बड़ा हिस्सा भी CPWD के ज़िम्मे ही है.

राज्यसभा सचिवालय की ओर से CPWD को भेजा गया पत्र
राज्यसभा सचिवालय की ओर से CPWD को भेजा गया पत्र

राज्यसभा टीवी ने RTI अप्लीकेशन को जवाब के लिए CPWD को प्रेषित कर दिया. अब जवाबदेही हरदीप पुरी के मंत्रालय वाले विभाग की थी. जवाब तो नहीं आया है. लेकिन CPWD के इंजीनियर ने राज्यसभा सचिवालय के डिप्टी सेक्रेटरी को चिट्ठी लिखी. चिट्ठी में कहा गया,

“20 सितम्बर को राज्यसभा में फ़ार्म बिल पर बहस के दौरान सम्मानित सांसदों द्वारा चेयरमैन का माइक ख़राब कर दिया गया, जिस वजह से ऑडियो बंद हुआ था.”

CPWD का सचिवालय को जवाब
CPWD का सचिवालय को जवाब

इसके बाद इस पत्र में ये भी लिखा हुआ है कि 

“चेयरमैन के निर्देशों के अनुसार, चेयरमैन के माइक के अलावा और कोई भी माइक नहीं ऑन गया. और जब ये माइक टूट गए, तो राज्यसभा टीवी के आउटपुट को कोई भी ऑडियो नहीं मिल पा रहा था.”

साथ ही पत्र में ये भी जानकारी दी गयी है कि कोई भी तकनीकी दिक़्क़त नहीं थी. सबकुछ सही था. और मार्शल और टेबल ऑफ़िस द्वारा जब टूटे हुए माइकों को बदल दिया गया, तभी ऑडियो फ़ीड शुरू किया जा सका.

इस मामले को साकेत गोखले ने अपने ट्विटर पर भी शेयर किया है. साथ ही CPWD ने भी अपने ट्विटर खाते पर इस बारे में कुछ न कुछ लिखा है. बताया है कि टूटे हुए माइकों को बदलने में लगभग आधे घंटे का समय लगा था. 

CPWD के कुछ और ट्वीट को लेकर साकेत गोखले ने कहा है कि केंद्रीय विभाग द्वारा उन्हें धमकाने की कोशिश की जा रही है. लेकिन पत्र से ये तो कम से कम साफ़ ही है कि चेयर के आदेश पर बाक़ी सदस्यों के माइक ऑफ़ किए गए थे.


लल्लनटॉप वीडियो : विपक्ष का भारी हंगामे के बीच बिल के पास होने की पूरी कहानी

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