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'बरसात' से सेंसेशन बनीं एक्ट्रेस निम्मी का मुंबई में देहांत हो गया

अपने ज़माने की मशहूर एक्ट्रेस निम्मी का लम्बी बीमारी के बाद मुंबई में निधन हो गया. निम्मी 87 साल की थीं. 25 मार्च  शाम छह बजे सांस संबंधी बीमारी की वजह से उनका देहांत हुआ. निम्मी पिछले तीन दिनों से मुंबई के जुहू स्थित एक अस्पताल में भर्ती थीं. निम्मी के पति एस. अली रज़ा का 2007 में निधन हो गया था और वो अपनी भांजी परवीन के साथ जुहू में रहती थीं.

निम्मी ने राज कपूर,‌ नरगिस और प्रेमनाथ स्टारर फिल्म ‘बरसात’ (1949) से अपने‌ फिल्मी करियर की शुरुआत की थी. इसके बाद उन्होंने ‘दीदार’, ‘आन’, ‘कुंदन’, ‘दाग’ और ‘बसंत बहार’ जैसी कई फिल्मों में ज़बरदस्त एक्टिंग की.

# बेहतरीन एक्ट्रेस थीं निम्मी

निम्मी ने 50-60 के दशक में एक्टिंग में बड़ा नाम कमाया. लेकिन इनका करियर बहुत छोटा रहा. 1965 में इन्होंने राइटर एस. अली रज़ा से शादी कर ली. उसके बाद इन्होंने कोई नई फिल्म साइन नहीं की. हालांकि इनकी लास्ट मूवी 1986 में रिलीज़ हुई. नाम था ‘लव ऑफ़ गॉड’. ये ‘मुग़ल-ए-आज़म’ फेम डायरेक्टर के. आसिफ़ की मूवी थी. इसमें लीड रोल में गुरुदत्त को साइन किया गया था. पहले ये लेट हुई गुरदत्त की असमय मृत्यु के चलते. गुरुदत्त वाला रोल दिया गया संजीव कुमार को.

फिर 1971 में सिर्फ 48 साल में के. आसिफ़ भी गुज़र गए और ये फिल्म आधी ही रह गई. बाद में के. आसिफ की पत्नी ने डायरेक्टर के. सी. बोकाड़िया के साथ मिलकर जैसे-तैसे ‘लव ऑफ़ गॉड’ को पूरा किया और 1986 में इसे रिलीज़ कर दिया.

निम्मी की चार बेहतरीन और यादगार फ़िल्मों के पोस्टर
निम्मी की चार बेहतरीन और यादगार फ़िल्मों के पोस्टर

निम्मी के पति लेखक एस. अली रज़ा को अपने दौर की कई बड़ी और हिट फिल्में लिखने का श्रेय जाता है, जिनमें ‘अंदाज’ (1949), ‘मदर इंडिया’ (1957) और ‘सरस्वतीचंद्र’ (1968) जैसी फिल्में शुमार हैं. उन्होंने 1971 में आई फिल्म ‘रेशमा और शेरा’ भी लिखी थी.

निम्मी के पिता मेरठ में मिलट्री कॉन्ट्रैक्टर थे. उनकी मां वाहिदान भी एक एक्ट्रेस थीं. उस वक्त के दिग्गज डायरेक्टर महबूब खान से भी वाहिदान की अच्छी जान-पहचान थी. बचपन में निम्मी अपनी अम्मी के साथ ही रहती थीं. लेकिन जब निम्मी सिर्फ 11 साल की थीं, वाहिदान का इंतकाल हो गया. निम्मी अपनी नानी के साथ एबटाबाद में रहने लगीं. पार्टिशन हुआ, तो एबटाबाद पाकिस्तान में चला गया. नानी मुंबई आ गईं. अब निम्मी और उनकी नानी, निम्मी की मौसी के साथ रहने लगीं. ज्योति था उनकी मौसी का नाम. उनके मौसा का नाम ग़ुलाम मुहम्मद दुर्रानी. उस वक्त के फेमस गायक और म्यूज़िक डायरेक्टर.

# निम्मी नाम कैसे मिला?

निम्मी को निम्मी नाम तो राजकपूर ने दिया था, वरना उनका असली नाम नवाब बानो था. इस बारे में तबस्सुम बड़ी इंट्रेस्टिंग स्टोरी बताती हैं. उनको, यानी तबस्सुम को प्रेम से सब किन्नी पुकारा करते थे. ये किन्नी नाम उन्हें राजकपूर ने ही दिया था. राजकपूर हमेशा तबस्सुम के मम्मी पापा से कहते थे कि उन्होंने अपनी बेटी का इतना मुश्किल नाम क्यों रखा. इससे अच्छा तो इसका नाम किन्नी रखना था. ये तब की बात है, जब तबस्सुम बहुत छोटी थीं. खैर, बात आई गई हो गई. लेकिन तबस्सुम को भी अपना ये नाम बहुत अच्छा लगा.

इसके बाद राजकपूर एक बार फिर तबस्सुम के घर आए और तबस्सुम के पापा से बोले-

मैं अपनी मूवी ‘बरसात’ में एक नई लड़की लॉन्च कर रहा हूं. जिसका नाम नवाब बानो है. लेकिन नवाब बानो, बहुत मुश्किल लगता है बोलने में, इसलिए मैं उसका नाम किन्नी रख रहा हूं.

बस, ये सुनना था कि बेबी तबस्सुम ने दहाड़ मार-मारकर रोना शुरू कर दिया और सारा घर अपने सर पर उठा लिया. तो तय हुआ कि किन्नी नाम तबस्सुम के लिए रहने देते हैं और नवाब बानो को निम्मी नाम से पुकारते हैं. बस, तब से नवाब बानो नाम पीछे छूट गया और निम्मी नाम रह गया.


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