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पूर्व राष्ट्रपति की मौत की खबर पर एंकर ऐसा कुछ बोल गई कि बवाल हो गया

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इस खबर को शुरू करने से पहले एक वैधानिक चेतावनी. इस खबर में गंभीरता और मज़ाक दोनों का मिश्रण है, क्योंकि घटना ही कुछ ऐसी घट गई है.

मिस्त्र के पूर्व प्रेजिडेंट थे मोहम्मद मोर्सी. 17 जून को मोर्सी की कोर्ट में पेशी के दौरान मौत हो गई. मोर्सी अपने ऊपर चलाए रहे मुकदमें की वजह से कोर्ट में पेश हुए थे. पहले आप मोहम्मद मोर्सी के बारे में मोटा-माटी जान लीजिए उसके बाद आपको उस मज़ाक के बारे में बताएंगे, जिसकी हेडिंग देखकर आप खबर पढ़ने आए हैं.

मोर्सी मिस्त्र के पहले ऐसे राष्ट्रपति थे जिन्हें वोट देकर चुना गया था, मने उनका चुनाव लोकतांत्रिक तरीके से हुआ था.  2013 में सेना के तख्तापलट के बाद उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ा था. उस वक्त मिस्त्र की सत्ता मोर्सी की हाथ से छिनकर सेना के हाथों में चली गई. पद से हटाए जाने के बाद मोर्सी के ऊपर कई आरोप लगाए गए, कई मुकदमें दर्ज किए गए. उन मुकदमों के लिए मोर्सी को बार-बार कोर्ट में पेशी के लिए आना पड़ता था.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वो लंबे समय से बीमार चल रहे थे. उन्हें किडनी और लीवर की समस्या थी. लगातार डॉक्टरों से इलाज करवा रहे थे. इलाज के दौरान ही उनकी कोर्ट में पेशी हुई थी और पेशी के दौरान ही कोर्ट में मौत हो गई. अब मोर्सी की मौत के बाद कई तरह के मानवाधिकार संगठन आवाज़ उठाने लगे हैं. वे उनकी मौत के लिए मौजूदा सरकार को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं.

ह्यूमन राइट्स वॉच के साराह लिह विटसन के मुताबिक:

पूर्व राष्ट्रपति मोर्सी की मौत उनके साथ हो रहे लगातार बुरे बर्ताव की वजह से हुई है. पिछले कई सालों से उनके साथ बुरा सलूक किया जा रहा था. उन्हें लंबे समय तक बीमारी का इलाज़ भी नहीं कराने दिया जा रहा था. उनके परिवार और वकीलों से भी उन्हें नहीं मिलने दिया जा रहा था. जिसकी वजह से उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ा और उनकी मौत हो गई.

इतनी बातों के इतर ये जान लीजिए कि मिस्त्र में पत्रकारों के लिए आजादी नहीं है. मिस्त्र को पत्रकारों का जेल कहा जाता है. भारत में ऐसी घटना घटने के बाद तरह-तरह की सूत्र वाली पत्रकारिता शुरू होने लग जाती है, लेकिन मिस्त्र में ऐसा नहीं है. पूर्व राष्ट्रपति की मौत के बाद वहां के न्यूज़ चैनल्स के पास वही रिपोर्टिंग करने की आजादी है जो बयान सरकार की तरफ से जारी किया गया हो.

# 42 वर्ड स्टोरी

पूर्व राष्ट्रपति के मरने के बाद सरकार की तरफ से एक 42 शब्दों का नोट जारी किया गया. जिसमें मोर्सी की बीमारी का ज़िक्र था. मोटा-माटी यही बताया गया कि सिर्फ बीमारी की वजह से उनकी मौत हुई है. सारे न्यूज़ चैनल्स और न्यूज़ पेपर्स ने वही रिपोर्टिंग की जो सरकार की तरफ से जारी किया गया. ट्विटर पर भी ये हैश टैग काफी देर ट्वीट किया. खबर ये भी है कि सरकार की तरफ से ये नोट ईमेल के ज़रिए न्यूज़ चैनल्स और न्यूज़ पेपर्स तक पहुंचाए गए.

अब असली ‘दुर्घटना’ यहीं घटी. दरअसल मोर्सी की मौत की खबर एक ऐरेबिक न्यूज़ चैनल की एंकर बता रही थीं. 42 वर्ड की खबर पढ़ने के बाद एंकर बोल बैठी ‘सेंट फ्रॉम अ सैमसंग डिवाइस’. यानी कि ‘सैमसंग की डिवाइस से इसे भेजा गया’. ये बोलने के बाद एंकर चुप हो गईं, क्योंकि उसे गलती का अहसास हो गया. एंकर की इस गलती का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

दरअसल, एंकर से ये गलती टेलीप्रॉम्पटर की वजह से हुई. दुनिया भर में टीवी पर जो एंकर ज्ञान देते हैं उसे पहले टेलीप्रॉम्प्टर पर डाला जाता है. एंकर टेलीप्रॉम्प्टर पर ही लिखी चीज़ें पढ़ कर न्यूज़ दुनिया को बताते हैं, जिस वजह से वो ऑन एयर गलती नहीं करते हैं. इसी टेलीप्रॉम्प्टर पर सरकार की तरफ से भेजी गई 42 शब्दों की जानकारी डाल दी गई, साथ ही वो ईमेल के नीचे का भी टेक्स्ट कॉपी हो गया. जिसे एंकर ऑन एयर पढ़ गई. सोशल मीडिया पर अब ये भी कहा जा रहा है क्योंकि मिस्त्र में कानून बहुत सख्त है इसीलिए एंकर पर सरकार की तरफ से कार्रवाई भी हो सकती है.


वीडियो: ज्ञानपीठ को अंग्रेजी में ‘जनानपीठ’ यानी ‘jnanpith’ क्यों लिखते हैं?

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