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हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ SC पहुंचे राजस्थान विधानसभा के स्पीकर को निराशा हाथ लगी है

राजस्थान विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी. राजस्थान हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ. गुरुवार, 23 जुलाई को इस याचिका पर सुनवाई हुई. स्पीकर ने सचिन पायलट सहित 19 बागी कांग्रेसी विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने के मामले में नोटिस जारी किया था. सचिन पायलट सहित अन्य विधायकों ने हाई कोर्ट में स्पीकर के आदेश को चुनौती दी. हाईकोर्ट ने स्पीकर को तब तक इस मामले में कोई फैसला लेने से रोक दिया, जब तक हाईकोर्ट का फैसला नहीं आ जाता. इसी फैसले के खिलाफ वो सुप्रीम कोर्ट गए थे.

क्या हुआ सुनवाई के दौरान?

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की खंडपीठ में हुई. स्पीकर की ओर से वकील थे कपिल सिब्बल, वहीं मुकुल रोहतगी और हरीश साल्वे सचिन पायलट की ओर से पेश हुए.

कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि अयोग्य ठहराए जाने के मामले में टाइम बढ़ाने को लेकर हाई कोर्ट स्पीकर को निर्देश जारी नहीं कर सकता. यह हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के किहोटो होलोहन केस में 1992 के फैसले का हवाला दिया कि 10वीं अनुसूची को लेकर क्या आदेश है. सिब्बल ने कहा कि अयोग्यता पर लिए गए स्पीकर के फैसले का ज्यूडिशियल रिव्यू हो सकता है, लेकिन उससे पहले कार्यवाही के दौरान दखल नहीं दिया जा सकता.

इसके अलावा कपिल सिब्बल ने इसी साल जनवरी में जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच की ओर से दिए गए फैसले का जिक्र किया. मणिपुर विधानसभा के स्पीकर से कोर्ट ने कहा था कि वे विधायकों को अयोग्य ठहराने के मामले में उचित समय के भीतर फैसला लें.

सिब्बल की दलील पर कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने पूछा कि किहोटो होलोहन केस, इस केस में किस तरह प्रासंगिक है? इस पर सिब्बल ने कहा कि Chief Whip ने बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्य ठहराने जाने के लिए याचिका दायर की थी. इसके आधार पर स्पीकर ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया. यह नोटिस “पार्टी विरोधी गतिविधियों” में लिप्त होने की वजह से था.

विधानसभा स्पीकर की ओर से पेश होने वाले वकील कपिल सिब्बल. (फाइल फोटो)
विधानसभा स्पीकर की ओर से पेश होने वाले वकील कपिल सिब्बल. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि विधायकों को अयोग्य ठहराए जाने का आधार क्या था? सिब्बल ने कहा कि ये विधायक पार्टी मीटिंग में शामिल नहीं हुए. बिना बताए अनुपस्थित रहकर सरकार को अस्थिर करने की साजिश कर रहे थे. अपने मोबाइल भी बंद कर रखे थे. इनको ईमेल से भी नोटिस भेजे गए. विधायक हेमाराम चौधरी, बनवारी लाल शर्मा और अन्य विधायक नोटिस का जवाब देने की बजाय न्यूज चैनलों से बयान जारी करते रहे.

‘असहमति को दबाया जाएगा, तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा’

तब सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस मिश्रा ने कहा कि एक आदमी जो चुनाव में निर्वाचित हुआ है, क्या उसे असहमति जताने का अधिकार नहीं है? अगर असहमति के आवाज को दबाया जाएगा, तो लोकतंत्र खत्म हो जाएगा.

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि मान लीजिए किसी नेता का किसी पर भरोसा नहीं, तो क्या आवाज उठाने पर उसे अयोग्य करार दिया जाएगा. पार्टी में रहते हुए वे अयोग्य नहीं हो सकते, फिर ये यह एक उपकरण बन जाएगा और कोई भी आवाज नहीं उठा सकेगा. लोकतंत्र में असंतोष की आवाज इस तरह बंद नहीं हो सकती.

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क्या पार्टी की मीटिंग में शामिल न होने पर व्हिप जारी किया जा सकता है? इस पर कपिल कि सिब्बल ने कहा कि जोशी ने व्हिप जारी नहीं किया था, वो केवल एक नोटिस था.

कपिल सिब्बल ने कहा कि ये केवल पार्टी की मीटिंग में शामिल न होने की बात नहीं है, बल्कि पार्टी के खिलाफ काम करने की बात है. स्पीकर होने के नाते मुझे ये तय करना होगा. कोई भी न्यायिक प्राधिकारी इस बात पर विचार नहीं कर सकता कि सदन के बाहर पार्टी की बैठकों में भाग लेने के लिए विधायक को अयोग्य घोषित किया जाए या नहीं. स्पीकर ही अयोग्य ठहराए जाने की याचिका पर फैसला करेगा.

कोर्ट ने कहा कि मामला सिर्फ एक दिन का है, आप इंतजार क्यों नहीं कर लेते. तब सिब्बल ने कहा कि लेकिन हाई कोर्ट स्पीकर को निर्देश कैसे जारी कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यानी आपकी दिक्कत ‘निर्देश’ वाले शब्द से है, लेकिन आदेश में हर जगह ‘आग्रह’ है.

‘Direct’ and ‘Direction’ पर सिब्बल को एतराज

सिब्बल ने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट के 21 जुलाई के आदेश से ‘Direct’ and ‘Direction’ शब्द को हटाया जाना चाहिए. इस पर जस्टिस गवई ने कहा कि हाईकोर्ट ने आपको सिर्फ 24 जुलाई तक इंतजार करने को कहा है. सिब्बल ने फिर वही बात दुहराई और कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से उन शब्द को सस्पेंड किया जाए. यह संवैधानिक बेंच के फैसले के खिलाफ है.

कोर्ट ने कहा कि मामले की विस्तृत सुनवाई की जरूरत है. सिब्बल ने कहा कि आप हाई कोर्ट के आदेश को सस्पेंड कर सकते हैं. तब अदालत ने कहा कि इसके लिए हमें मामले का परीक्षण करना होगा. सिब्बल ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने की मांग की, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट से कहा कि वह 24 जुलाई को अपना आदेश पारित करें, लेकिन आदेश सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा. सुप्रीम कोर्ट आगे की सुनवाई सोमवार को करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई, लेकिन कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम होगा. हाई कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करेगा.


Video: प्रशांत भूषण और ट्विटर पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर केस कर दिया है

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