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इस बड़े डायरेक्टर ने नेपोटिज़म पर कहा, 'मेरे बेटे के लिए मेरी परछाई फायदा भी है और शाप भी'

हंसल मेहता. फिल्म डायरेक्टर हैं. ‘अलीगढ़’, ‘शाहिद’ जैसी फ़िल्में डायरेक्ट कर चुके हैं. ट्विटर पर काफी एक्टिव हैं. अभी लगातार नेपोटिज़म को लेकर ट्वीट कर रहे हैं. दरअसल, एक्टर सुशांत सिंह राजपूत के जाने के बाद से ही बॉलीवुड में फैले नेपोटिज़म पर जमकर बातें हो रही हैं. इसका विरोध हो रहा है. इसी बहस में हंसल मेहता ने भी अपनी बात रखी. उनके बेटे जय मेहता खुद फिल्म-मेकर बन चुके हैं. पिता के साथ काम करते हैं. ऐसे में नेपोटिज़म पर और बेटे के करियर को लेकर हंसल मेहता ने कई सारे ट्वीट किए. उन्होंने कहा कि उनकी परछाई उनके बेटे के लिए सबसे बड़ा फायदा और सबसे बड़ा शाप, दोनों ही है.

कई सारे ट्वीट किए. लिखा,

‘ये नेपोटिज़म की बहस शायद और व्यापक हो. काबिलियत सबसे ज्यादा मायने रखती है. मेरे बेटे के लिए दरवाज़ा खुला, मेरी वजह से. और क्यों नहीं रखता. लेकिन वो मेरे बेहतर कामों का अभिन्न अंग बन चुका है, क्योंकि वो प्रतिभाशाली है, अनुशासन में रहता है, कड़ी मेहनत करता है और मेरे मूल्यों को साझा करता है. केवल इसलिए नहीं कि वो मेरा बेटा है.’

इसके बाद हंसल मेहता ने लगातार कई सारे ट्वीट किए. अगले में लिखा,

‘वो फिल्में बनाएगा, इसलिए नहीं कि मैं उन्हें प्रोड्यूस करूंगा. हो सकता है कि मैं न भी करूं. लेकिन वो उन्हें बनाने के लायक है. उसका खुद का करियर तभी होगा, जब वो सर्वाइव करेगा. उसका करियर कौन बनाता है, ये आखिर में उस पर ही निर्भर करेगा. उसका पिता उसका करियर नहीं बनाएगा. मेरी परछाई उसके लिए सबसे बड़ा फायदा और सबसे बड़ा शाप, दोनों ही है.’

आगे हंसल ने लिखा,

‘इसलिए जब लोग नेपोटिज़म पर उतरते हैं, तो वो असल में कमरे में मौजूद हाथी को संबोधित नहीं करते. वो असल लड़ाई को कम करते हैं. वो लड़ाई जो शक्तिशाली और उभरते हुए के बीच में है. जो पुराने और नए के बीच है. जो कठोरता और परिवर्तन के बीच है. जो सुरक्षित और असुरक्षित के बीच है.’

‘कमरे में मौजूद हाथी’ या Elephant in the room. अंग्रेज़ी का एक मुहावरा है. इसका मतलब है कि कोई बड़ा मुद्दा, जिसके बारे में हर कोई जानता है, लेकिन जिसे इग्नोर कर दिया जाता है. क्योंकि उस पर बात करना हर किसी को असहज लगता है.

इस ट्वीट के आगे ‘अलीगढ़’ डायरेक्टर ने लिखा कि कलाकार को अपने टैलेंट को अपना हथियार बनाना चाहिए. गॉसिप को नहीं. कहा,

‘बदकिस्मती से कई बार समझा जाता है कि PR, तस्वीरें, पेड मीडिया और गॉसिप इस इंडस्ट्री में सर्वाइव करने के लिए ज़रूरी हैं. मीडिया अपने फायदे के लिए हमारी असुरक्षा और आकांक्षाओं का उपयोग करता है. हमें खुद को बदलकर इसे बदलना होगा. आप जो देंगे, मीडिया उस पर आगे बढ़ेगा. इसलिए उन्हें अपना टैलेंट दें. न गॉसिप, न एयरपोर्ट लुक, न जिम लुक. जिस पल आप केवल अपने टैलेंट और कड़ी मेहनत को अपने हथियार के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दोगे, उसी वक्त वो गंदगी जो आपने पैदा कर दी थी, दूर चली जाएगी. आकांक्षाएं जितना बड़ा वरदान है, उतनी ही बड़ी बीमारी भी है. इसे खुद को बीमार करने से रोको. इसका इस्तेमाल खुद को कलाकार के तौर पर विकसित करने में करो.’

फिर नेपोटिज़म पर बोलने वालों के लिए कहा,

‘नेपोटिज़म का विरोध करने की आड़ में आप खुद भी एक बुली (डराने-धमकाने वाला) से कम नहीं होते हो. सत्ता में बैठे लोगों को (विरासत में मिली हो या फिर खुद कमाया हो) कोई अधिकार नहीं कि वो ऐसे लोगों को बुली करें, जो उनसे कम शक्तिशाली हैं या फिर उन पर निर्भर हैं. सत्ता में बैठे लोगों को इससे कोई लेना-देना नहीं होता. नेपोटिज़म पर फोकस करते हुए कुछ लोग बहस को उलझा दे रहे हैं.’

इसके अलावा भी हंसल मेहता ने कई सारे ट्वीट किए. लोग उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल कर रहे हैं. क्योंकि उनका बेटा भी फिल्म की दुनिया में है. इस पर हंसल ने लिखा,

‘तुम सभी बेवकूफ लोग मुझे और मेरे बेटे को नेपोटिज़म पर ट्रोल कर रहे हो. मैं कठिन रास्ते से होकर यहां तक पहुंचा हूं, और मुझे इस पर गर्व है. मेरा बेटा अपने काम के लिए मुझ पर निर्भर नहीं है. मैं उस पर निर्भर हूं. बिल्कुल उसी तरह जिस तरह मैं राजकुमार राव पर निर्भर हूं. और उन पचास से ज्यादा टैलेंटेड लोगों पर भी डिपेंड हूं, जिन्होंने अपना करियर मेरे साथ शुरू किया और अभी अच्छा कर रहे हैं. उनकी सफलता पर मुझे गर्व होता है. मैं उन्हें प्यार करता हूं. उसी तरह जैसे मैं अपने बच्चों और दोस्तों से करता हूं.’

ये सारी बातें हंसल ने ट्विटर पर कहीं हैं. लगातार बातें हो रही हैं. सुशांत के जाने पर. बॉलीवुड के कई लोगों पर नेपोटिज़म, फेवरेटिज़म को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है.


वीडियो देखें: सुशांत की डेथ के बाद ‘खान’ के खिलाफ ट्रेंड्स चला तो शाहरुख के फैंस जवाब ले आए

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