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राम मंदिर पर दिग्विजय ने मोदी को भेजी चिट्ठी में क्या लिख दिया?

दिग्विजय सिंह. कांग्रेस के नेता. अब जब राम मंदिर के लिए ट्रस्ट बन गया है, तो दिग्विजय सिंह ने नरेंद्र मोदी को ख़त लिखकर ट्रस्ट में शामिल कुछ नामों पर आपत्ति जताई है.

किन नामों पर दिग्विजय सिंह को आपत्ति है?

वीएचपी के प्रान्तीय उपाध्यक्ष चंपत राय. दिग्विजय सिंह का कहना है कि वीएचपी का सनातन धर्म से कोई लेना देना नहीं है. वो केवल आरएसएस का एक संगठन है.

इसके बाद अनिल मिश्रा का नाम दिग्विजय सिंह ने लिया है. कहा है कि वो अयोध्या मे एक होम्यापैथिक डॉक्टर है और आरएसएस के प्रांत कार्यवाहक है.

ट्रस्ट में बतौर दलित सदस्य शामिल किये गए कामेश्वर चौपाल के नाम पर भी दिग्विजय सिंह को आपत्ति है. दिग्विजय सिंह ने कहा है कि कामेश्वर चौपाल बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं.

और जिस आखिरी नाम पर दिग्विजय सिंह ने आपत्ति दर्ज की है, तो है गोविन्द देव गिरि का. कहना है कि वो संघ के पुराने प्रचारक रहे हैं.

अपने पत्र में दिग्विजय ने लिखा है कि इस ट्रस्ट में कुछ ऐसे लोगो को भी रखा है जो कि बाबरी मस्जिद प्रकरण में अपराधी हैं. और आज भी ज़मानत पर हैं. बाबरी मस्जिद के ढांचे गिराने मे सर्वोच्च न्यायालय ने जिन्हें अपराधी माना है, ऐसे लोगों को मंदिर निर्माण के लिये समिति में मनोनयन करना सर्वथा अनुचित है.

ट्रस्ट को काम दिए जाने पर भी आपत्ति

दिग्व्जिय सिंह ने नरसिम्हा राव के समय बने रामालय ट्रस्ट का भी नाम लिया. कहा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री नरसिम्हा राव जी ने अपने कार्यकाल में भगवान श्री रामचन्द्र जी के मंदिर निर्माण के लिये रामालय ट्रस्ट का गठन किया था, जिसमें केवल धर्माचार्यों को ही रखा गया था. और किसी राजनैतिक दल के व्यक्ति का मनोनयन नही हुआ था. उस समय जब रामालय ट्रस्ट का गठन हुआ था, तब मुझे सहयोग देने के लिये कहा गया था. मेरे से जितना बना, मैंने रामालय ट्रस्ट के गठन में सहयोग दिया था.

Digvijay Singh Letter To Narendra Modi Over Ram Temple Issue
पत्र का वो हिस्सा, जहां दिग्विजय सिंह ने रामालय ट्रस्ट का ज़िक्र किया है, और बताया है कि किन नामों से उन्हें आपत्ति है.

फिर दिग्विजय सिंह ने नरेंद्र मोदी से कहा है कि मंदिर के निर्माण के लिए आपके द्वारा स्वीकृत ट्रस्ट को ज़िम्मेदारी ना देकर रामालय ट्रस्ट को ही ज़िम्मेदारी देनी चाहिए. रामालय ट्रस्ट ने मुझे अवगत कराया है कि वो मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा सरकार से नहीं लेंगे. कहा है कि जब पूर्व में ही भगवान श्री रामचन्द्रजी के मंदिर निर्माण के लिये रामालय ट्रस्ट मौजूद है तो पृथक से ट्रस्ट बनाने का कोई औचित्य नही है. साथ ही संलग्नक के तौर पर दिग्विजय सिंह ने रामालय ट्रस्ट के सदस्यों का नाम भी गिनाया है

दिग्विजय सिंह ने कहा कि जो ट्रस्ट भगवान श्री रामचन्द्र जी के मंदिर निर्माण के लिये गठित किया गया है, उसमें किसी भी प्रमाणित जगतगुरू शंकराचार्यों को स्थान नही दिया गया है. जिन्हे शंकराचार्यं के नाम से मनोनीत किया गया है, श्री वासुदेवानंद जी, वो न्यायपालिका द्वारा पृथक किए गए हैं. देश में सनातन धर्म के पांच शंकराचार्य के पीठ है, उनमें से ही ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाना उपयुक्त होता जो नही हुआ. ऐसा कहा दिग्विजय सिंह ने.

योगी के मूर्ति प्रोजेक्ट पर भी सवाल

दिग्विजय सिंह ने पत्र में योगी सरकार पर भी निशाना साधा है. कहा है कि योगी आदित्यनाथ ने एक भव्य मूर्ति बनाने की घोषणा की है जो कि सनातन धर्म की परंपराओं के विपरीत है. मन्दिर में दैनिक सेवा होती है, 220 मीटर ऊंची मूर्ति की सफाई कैसे होगी? तर्क है कि उसको चिड़िया आदि गंदा कर देंगे.

चंदे पर भी सवाल

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के विश्व हिन्दू परिषद् ने चंदा लिया. लेकिन इस चंदे का हिसाब अभी तक सामने नहीं. इसको लेकर भी दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाये हैं.

Digvijaya Singh Letter To Narendra Modi Over Ram Temple Issue
चिट्ठी का वो हिस्सा, जहां दिग्विजय सिंह ने पैसे का हिसाब देने की मांग की है.

कहा है कि मंदिर का निर्माण हो, इसके लिए आन्दोलन में करोड़ों लोगों ने हिस्सा लिया. और भारी मात्रा में चन्दा दिया. इसका हिसाब आज तक जनता के सामने नहीं रखा गया. कहा कि जब आयकर विभाग ने नोटिस दिया, उस समय नोटिस देने वाले अधिकारी के खिअलाफ़ कार्रवाई हो गयी. जिन करोड़ों दानदाताओं ने मंदिर निर्माण के लिए पैसा दिया है, उसका 28 वर्षों का ब्याज सहित हिसाब उन्हें मिलना चाहिए.


लल्लनटॉप वीडियो : PM मोदी का राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान, और अमित शाह की अयोध्या में एक संत से बात

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