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'दीदी' के अमेरिका में डेब्यू करते ही IPO में धूम मच गई, लेकिन फिर क्या हुआ कि शेयर गिर गए

चीन की एक कंपनी है. नाम है ‘दीदी’ (DiDi Global)  चीन में ओला और ऊबर नहीं बल्कि इस ‘दीदी’ का राज है. यानी ‘दीदी’ एक राइडिंग सॉल्यूशन कंपनी है. फिलहाल ये कंपनी चर्चा में है. हुआ यूं कि इस कंपनी ने अमेरिका के शेयर बाजार में दस्तक दी. ऐसा होते ही कंपनी के शेयरों को हाथोंहाथ लिया गया. लेकिन तभी चीन ने अपने ही देश की कंपनी की जांच शुरू कर दी. ऐसा होते ही कंपनी के शेयर लुढ़कने लगे. डेटा को लेकर ‘दीदी’ जांच के दायरे में है.

अमेरिकी शेयर बाजार में IPO

बुधवार 30 जून को दीदी ने अमेरिकी शायर बाजार में अपना IPO उतारा. 2014 में चीनी कंपनी अलीबाबा की लॉन्चिंग के बाद से ये किसी चाइनीज कंपनी का सबसे बड़ा लॉन्च था. दीदी को इससे 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर के फायदे की उम्मीद थी, साथ ही ये भी कि कंपनी 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य वाली कंपनी बन जाएगी. दीदी ने 4.4 बिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए भी, लेकिन कंपनी का वैल्यूएशन 68.49 बिलियन डॉलर तक ही पहुंच पाया.

दीदी के शेयर इश्यू प्राइस यानी 14 डॉलर के मुकाबले 16.65 डॉलर पर लिस्ट हुए थे. 18 डॉलर तक पहुंचे, लेकिन इसके बाद इसमें गिरावट आती रही और ये 14.14 डॉलर प्रति शेयर पर बंद हुए. रायटर्स की एक खबर के मुताबिक चीन की साइबरस्पेस एजेंसी ने दीदी के खिलाफ जांच शुरू की है, इसके बाद शुक्रवार 2 जुलाई को न्यूयॉर्क में कंपनी के शेयरों में 10 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज हई.

इस रिपोर्ट के मुताबिक साइबरस्पेस एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ चाइना ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि जांच के दौरान दीदी नए यूजर्स का रजिस्ट्रेशन नहीं कर सकेगी. हालांकि जो रजिस्टर्ड इस्तेमालकर्ता हैं वह पहले की तरह इसे इस्तेमाल करते रह सकते हैं. दीदी ने अपनी सफाई में कहा कि वह सरकारी अथॉरिटी द्वारा की जा रही इस जांच के दौरान पूरा सहयोग करेगी.

साइबर स्पेस एजेंसी ने दीदी की जांच को लेकर कोई बड़ी जानकारी तो नहीं दी है, हालांकि ये जरूर कहा है कि जांच डेटा सिक्योरिटी से जुड़ी है. आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों के दौरान चीन ने बड़ी टेक कंपनियों पर शिकंजा कसा है और उनसे सही ढंग से डेटा लेने, स्टोर करने और इसे हैंडल करने को कहा है.

क्या है दीदी, कितना बड़ा है साम्राज्य

दीदी. जैसा हमने बताया कि एक ओला, ऊबर जैसी कंपनी है. दीदी 15 से अधिक देशों में सर्विस देती है. चीन में उसका एकछत्र राज्य है. ऊबर जैसी कंपनी भी इसके सामने चीन में टिक नहीं पाई. दीदी कंपनी में अलीबाबा, टेनसेंट, ऊबर, और सॉफ्टबैंक जैसी कंपनियों की हिस्सेदारी भी है. साल 2012 में इस कंपनी की नींव रखी गई थी. अलीबाबा में काम करने वाले एक शख्स Cheng Wei ने इसकी स्थापना की थी.

चीन में रहने वाले और CRI यानी चाइना रेडियो इंटरनेशनल में काम करने वाले पत्रकार अखिल पाराशर ने दी लल्लनटॉप को फोन पर बताया कि दीदी एप चीन का सबसे भरोसेमंद राइडिंग सॉल्यूशन एप है. हर फोन में आपको ये एप मिलेगा और यही कारण है कि दीदी बहुत मशहूर है. उन्होंने कहा कि हालांकि ये तो अभी बहुत साफ नहीं है कि जांच में क्या कुछ सामने आया है, लेकिन डेटा को लेकर चीन की सरकार काफी सतर्कता बरत रही है.

पूंजीपतियों के साथ चीन का व्यवहार ऐसा क्यों है?

चीन की कंपनी अगर विदेश में अच्छा कारोबार कर रही है तो इससे चीन को भला क्या समस्या हो सकती है? ऐसा क्यों हुआ कि दीदी के यूएस में एंट्री करते ही, शेयर बाजार में कदम रखते ही उसकी जांच शुरू हो गई? नाम नहीं छापने की शर्त पर चीन में रह रहे एक भारतीय व्यापारी ने दी लल्लनटॉप से कहा,

“जैक मा, पिछले दिनों चर्चा में थे, क्योंकि ऐसा माना जा रहा था कि सरकार ने उन्हें कहीं छुपा दिया है. उनसे पहले भी कुछ बिजनेसमैनों के साथ ऐसा हो चुका है. दीदी ग्लोबल के मामले में भी शायद ऐसा ही कुछ हुआ हो. शायद कंपनी को काबू किया जा रहा है.”

चीन में जांच शुरू होते ही दीदी को खासा नुकसान झेलना पड़ गया है. देखने वाली बात होगी कि जांच में क्या निकलता है.


वीडियो- दुनियादारी: क्या बच्चों का ब्रेनवॉश करके उन्हें जासूस बना रहा है चीन?

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