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कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को हड़काया, दिल्ली दंगे में पिंजरा तोड़ पर ऐसी बयानबाज़ी क्यों?

दिल्ली दंगे. दिल्ली हाईकोर्ट ने पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य देवांगना कलिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस से कहा है कि जब तक देवांगना कलिता पर आरोप तय नहीं हो जाते है, तब तक दिल्ली पुलिस केस से जुड़ी डिटेल और आरोप की जानकारी मीडिया में नहीं दे सकती है.

पिंजरा तोड़ की सदस्यों देवांगना और नताशा नरवल को दिल्ली पुलिस ने उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के बाबत गिरफ़्तार किया था. दिल्ली पुलिस के आरोप हैं कि देवांगना और नताशा के भड़काने पर ही मौजपुर और जाफ़राबाद में दंगे हुए. इसके बाद देवांगना कलिता ने अपने वकीलों की मदद से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की.

Delhi Riots
CAA के विरोध में हो रहे धरने के बाद समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा हुई. अब दिल्ली पुलिस अपनी कार्रवाई कर रही है.

याचिका में देवांगना का कहना था कि उन पर लगाए जा रहे आरोपों को दिल्ली पुलिस और बाक़ी जांच एजेंसियां जनता के सामने न रखें. इस पर दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में 15 जुलाई को अपना जवाब दाख़िल किया. कहा कि आरोपी देवांगना पहले से सोशल मीडिया पर ख़ुद के लिए सहानुभूति बटोर रही हैं और मीडिया ट्रायल कर रही हैं.

दिल्ली पुलिस के इस स्टैंड पर दिल्ली हाईकोर्ट ने नाराज़गी ज़ाहिर की. दिल्ली पुलिस से कहा कि आपका स्टैंड अस्वीकार्य है. लेकिन ये भी कहा कि प्रेस रिलीज़ जारी करने से कोई भी किसी को रोक नहीं सकता है. इस मामले में कोर्ट ने अपना फ़ैसला सुरक्षित रखा था.

फ़ैसला अब आ गया है. जस्टिस विभू बाकरु की एकल जज बेंच ने कहा,

“दिल्ली दंगों का केस ज़ाहिर तौर पर संवेदनशील है. इसलिए देवांगना समेत FIR में सभी नामज़द लोगों से जुड़ी कोई भी जानकारी मीडिया में या किसी व्यक्ति से ज़ाहिर न की जाए.”

कैसी जानकारी की बात हो रही है?

जून के महीने में दिल्ली पुलिस ने एक प्रेस नोट जारी किया था. इसमें पिंजरा तोड़ की सदस्यों से जुड़ी जानकारी ज़ाहिर की गयी थी. फिर देवांगना कलिता के वकीलों ने याचिका दायर कर कहा कि ऐसे प्रेस नोट प्रेजुडिशल हैं. मतलब अदालती कार्रवाई से अलग हैं, और गुमराह करने वाले हैं. BarAndBench के मुताबिक़, याचिका में ये भी कहा गया कि ऐसी जानकारियां साझा करने से FIR में नामज़द लोगों की जान को ख़तरा हो सकता है.

दिल्ली पुलिस ने क्या सफ़ाई दी?

कहा कि दिल्ली पुलिस की साख बचाने और क़ानूनी प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाते रहने के लिए दिल्ली पुलिस ने प्रेस नोट ज़ाहिर किया था. ताकि चीज़ें सही परिप्रेक्ष्य में रखी जा सकें.

नताशा नरवल और देवांगना कलिता ने साल 2015 में साथ पिंजरा तोड़ की नींव रखी. मुद्दा था दिल्ली के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के गर्ल्स हॉस्टलों में कर्फ़्यू टाइमिंग. कैसा कर्फ़्यू? कहा जाता था कि लड़कों के हॉस्टलों में नियम बहुत सहज हैं. वे देर रात को कभी भी हॉस्टल में आ या बाहर जा सकते हैं. लेकिन लड़कियों के हॉस्टलों में कर्फ़्यू जैसी स्थिति है. उनके हॉस्टल में आने और बाहर निकलने के समय तय हैं. इन हॉस्टलों की पिंजरों से तुलना की गयी. और आंदोलन बना ‘पिंजरा तोड़’.

पिंजरा तोड़
पिंजरा तोड़ प्रोटेस्ट के दौरान की एक फोटो.

दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से पढ़ीं देवांगना फ़िलहाल जेएनयू के सेंटर फ़ॉर विमन स्टडीज़ से एम.फ़िल. कर रही हैं. और हिंदू कॉलेज से पढ़ी नताशा जेएनयू के ही सेंटर फ़ॉर हिस्टॉरिकल स्टडीज़ से पीएचडी कर रही हैं.

जाफ़राबाद-मौजपुर में हुई हिंसा के भी काफ़ी पहले 20 दिसम्बर को दिल्ली गेट पर भी हिंसा हुई थी. इसके अगले दिन यानी 21 दिसम्बर को दरियागंज थाने में FIR (सं : 250/19) दर्ज कराई गयी. IPC की धारा 147, 148, 149, 153A(2), 436, 427, 323, 325, 332, 186 और 120(B) के तहत. देवांगना कलिता इस FIR में नामज़द थीं.

23-24 फ़रवरी से शुरू हुई हिंसा के बाद एक FIR (सं 48/20) जाफ़राबाद थाने में 24 फ़रवरी को दर्ज कराई गयी. IPC की धाराएं 186, 188, 353, 283, 341, 109, 147 और 34 लगायी गयीं. इसमें नताशा और देवांगना दोनों का ही नाम था. फ़रवरी में ही जाफ़राबाद में एक और FIR दर्ज की गयी. इसम FIR में भी देवांगना कलिता का नाम आया.

इसके बाद 6 मार्च को क्राइम ब्रांच द्वारा FIR (सं. 59/20) IPC की धारा 120B, 124A, 302, 307, 353, 186, 212, 395, 487, 435, 436, 452, 109, 114, 147, 148, 124A, 153A और 34 और आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 26 के तहत दर्ज की गयी.

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