Submit your post

Follow Us

दिल्ली दंगा में ज़मानत देते हुए कोर्ट ने कहा, दिल्ली पुलिस ने बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया है

दिल्ली हाई कोर्ट ने 15 जून को दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में UAPA के तहत गिरफ़्तार छात्राओं नताशा नरवल, देवांगना कलिता और छात्र आसिफ इकबाल तन्हा को ज़मानत दे दी. नताशा और देवांगना JNU की छात्राएं हैं, जबकि आसिफ जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र. दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस अनूप जयराम भंभानी की डिविज़न बेंच ने फ़ैसला सुनाया.

चलिए देखते हैं कि ज़मानत देते हुए कोर्ट ने कौन-कौन सी अहम टिप्पणियां कीं.

कोर्ट ने कहा,

# CAA के विरोध में हुए आंदोलन कोई प्रतिबंधित आंदोलन तो थे नहीं. ये छात्र जिस संगठन के तहत प्रदर्शन कर रहे थे, वो भी कोई प्रतिबंधित संगठन नहीं था. इसलिए UAPA के तहत आरोप नहीं लगाए जा सकते. और इसलिए इन्हें ज़मानत से नहीं रोका जा सकता.

# ये बात समझना ज़रूरी है कि विरोध करना ग़ैर-कानूनी नहीं हो सकता. विरोध के अधिकार को UAPA के तहत आतंकवादी गतिविधि नहीं कहा जा सकता.

# विरोध को दबाने की जल्दबाजी में राज्य और संघ के ज़ेहन में संवैधानिक रूप से मिले विरोध के अधिकार और आतंकवादी गतिविधियों के बीच की लाइन धुंधला होती जा रही है. अगर ऐसा धुंधलापन बढ़ता है, तो लोकतंत्र लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता है.

# हमारे राष्ट्र की नींव के किसी मुद्दे पर विरोध मात्र से हिलने की संभावना न के बराबर है.

# कोर्ट कब तक इंतज़ार करे? आरोपी को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित ट्रायल का अधिकार है.

# चार्जशीट में ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे आतंकवादी गतिविधि जैसी गंभीर बात साबित हो सके. न ही ये साबित हो रहा है कि धारा-17 के तहत आतंकी गतिविधि के लिए कोई फंडिंग की गई. न ही धारा-18 के तहत किसी साजिश के रचे जाने की बात साबित हो रही है.

# चार्जशीट में सिर्फ इसी बात को हाइलाइट किया गया है कि आरोपियों ने लोगों को जुटाकर चक्का-जाम की अपील की. और तन्हा ने एक सिम कार्ड, जो उसे किसी और ने दिया था, इससे एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया और लोगों को विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए वॉट्सऐप किए.

# इसके अलावा कोर्ट के सामने किसी गंभीर आरोप को साबित करते सबूत नहीं रखे जा सके. न ही कोई अवैध हथियार रखने जैसी बात आई है.

# चार्जशीट में तमाम चेतावनियां लिखना, बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना कोर्ट को कन्विंस नहीं कर सकता. बल्कि हम इसकी तह में जाएं तो पता चलेगा कि सभी बातें जांच एजेंसी के हस्तक्षेप के आधार पर लिखी गई हैं, न कि सबूत के आधार पर.

क्या है पूरा मामला?

दिसंबर 2019 से लेकर फरवरी 2020 तक देश के कई हिस्सों, ख़ासकर दिल्ली में प्रदर्शन हो रहे थे. CAA-NRC के विरोध और समर्थन, दोनों में. फरवरी के आख़िरी हफ्ते में दोनों तरफ के प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसा हुई, जिसमें 50 से ज्यादा लोग मारे गए और कई लोग घायल हुए. दिल्ली पुलिस ने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हिंसा भड़काने के आरोप में कई लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर दिया. इसी क्रम में इन तीन आरोपी छात्रों को भी गिरफ्तार किया गया था. तबसे ये जेल में बंद थे. अब ज़मानत मिली है.


UAPA की आरोपी नताशा नरवाल को क्यों नहीं मिली बेल?

लगातार लल्लनटॉप खबरों की सप्लाई के लिए फेसबुक पर लाइक करें

टॉप खबर

योगी सरकार के संपत्ति रजिस्ट्री को लेकर लगने वाले स्टाम्प शुल्क के नए नियम में क्या है?

नए नियम के बाद विवादों में कमी आएगी?

हरिद्वार कुंभ के दौरान बांटी गयी 1 लाख फ़र्ज़ी कोरोना रिपोर्ट? जानिए क्या है कहानी

अख़बार का दावा, सरकारी जांच में हुआ ख़ुलासा

दिल्ली दंगा : नताशा, देवांगना और आसिफ़ को ज़मानत देते हुए कोर्ट ने कहा, 'कब तक इंतज़ार करें?'

जानिए क्या है पूरा मामला?

सैन्य ऑपरेशन से जुड़े 25 साल से ज्यादा पुराने रिकॉर्ड सार्वजनिक होंगे

सेना के इतिहास से जुड़ी जानकारियां सार्वजनिक करने की पॉलिसी को मंजूरी

पंजाब चुनाव: अकाली दल और बसपा गठबंधन का ऐलान, कितनी सीटों पर लड़ेगी मायावती की पार्टी?

पंजाब के अलावा बाकी चुनाव भी साथ लड़ने की घोषणा.

TMC में घर वापसी करने वाले मुकुल रॉय ने 4 साल बाद बीजेपी छोड़ने का फैसला क्यों लिया?

मुकुल रॉय को बराबर में बिठाकर ममता बनर्जी किन गद्दारों पर भड़कीं?

लक्षद्वीप: किस एक बयान के बाद फिल्म निर्माता आयशा सुल्ताना पर राजद्रोह का केस हो गया?

पहले TV डिबेट में बोला, फिर फेसबुक पर पोस्ट लिखा.

कोरोना वैक्सीन लेने के बाद शरीर से सिक्के-चम्मच चिपकने के दावों में कितना सच?

क्या शरीर में वाकई चुंबकीय शक्ति पैदा हो जाती है?

पावर बैंक ऐप, जिसने 15 दिन में पैसे डबल करने का झांसा दे 4 महीने में 250 करोड़ उड़ा लिए

पैसा शेल कंपनियों में लगाते, फिर क्रिप्टोकरंसी बनाकर विदेश भेज देते थे.

भूटान के बाद अब नेपाल ने पतंजलि की कोरोनिल दवा बांटने पर रोक क्यों लगा दी?

नेपाल के अधिकारियों ने IMA के उस लेटर का भी हवाला दिया है, जिसमें कोरोनिल को लेकर रामदेव को चुनौती दी गई थी.