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दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश- कुत्तों को खाना, दया और सम्मान का अधिकार

भारतीय क़ानून व्यवस्था के तहत जानवरों को भी दया, करुणा और सम्मान का अधिकार है. दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार 1 जुलाई को अपने एक आदेश में ऐसा कहा है. हाई कोर्ट ने ये भी कहा कि जानवरों को खाने और लोगों को उन्हें खाना देने का अधिकार है. कोर्ट ने भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) को निर्देश दिया है कि वो दिल्ली के सभी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से परामर्श कर स्ट्रीट डॉग्स (Street Dogs) को खाना देने की जगह निर्धारित करे. इसके अलावा कोर्ट ने ये भी कहा है कि जानवरों की रक्षा करना हरेक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है. उसने स्ट्रीट डॉग्स के खाने की व्यवस्था और उनको खाना देने को लेकर गाइडलाइन भी जारी की है.

‘दूसरों के अधिकार का उल्लंघन न हो’

दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस आर मृद्धा ने आदेश में कहा,

“सामुदायिक कुत्तों (आवारा/गली के कुत्ते) को खाने का अधिकार है और नागरिकों को सामुदायिक कुत्तों को खिलाने का अधिकार भी है. लेकिन इस अधिकार का प्रयोग करने में सावधानी बरतनी होगी ताकि इससे दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन न हो. दूसरे लोगों या समाज के अन्य सदस्यों को नुकसान, बाधा या उत्पीड़न न हो.”

आदेश के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति अपने घर के निजी प्रवेश द्वार, बरामदे या ड्राइव-वे पर आवारा कुत्तों को खिला सकता है. लेकिन ऐसा उस जगह नहीं किया जा सकता, जो कॉमन हो यानी जिसे दूसरे व्यक्ति भी इस्तेमाल करते हों.

दिल्ली हाई कोर्ट ने AWBI को ये सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि प्रत्येक RWA एक पशु कल्याण समिति का गठन करे. कोर्ट ने कहा कि कमेटी गठित कर चार सप्ताह के भीतर बैठक की जाए. समिति में निदेशक, पशुपालन विभाग या उनके नामित व्यक्ति शामिल होंगे. नगर निगमों, दिल्ली छावनी बोर्ड और AWBI की तरफ़ से अतिरिक्त स्थायी सदस्य नंदिता राव, एडब्ल्यूबीआई की वकील मनीषा टी. करिया और अधिवक्ता प्रज्ञान शर्मा इस कमेटी का हिस्सा होंगे.

dogs

कुत्तों को खाना देने के लिए ख़ास जगहें बहुत कम निर्धारित की गई हैं. इस संबंध में किसी भी तरह की शिकायत को ध्यान में रखते हुए अदालत ने कहा कि लोग अपने निवास क्षेत्रों की पशु कल्याण समिति के माध्यम से इसका निवारण कर सकते हैं. ऐसा न करने पर इस मुद्दे को आरडब्ल्यूए के माध्यम से एडब्ल्यूबीआई के संज्ञान में लाया जा सकता है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि जानवरों के प्रति क्रूरता को प्रतिबंधित करने वाले कानून हैं. इसके बावजूद नागरिकों में इसकी अवहेलना की प्रवृत्ति बढ़ रही है. कोर्ट ने इस बात को संज्ञान में लिया कि कई बार सरकारी अधिकारी भी कानून से उलट निर्णय ले लेते हैं. इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा,

“इस तरह की अवहेलना को सरकारी कर्मचारी की एसीआर फाइल में नोट किया जाना चाहिए. यदि एडब्ल्यूबीआई को ऐसी कोई शिकायत प्राप्त होती है, तो उसे संबंधित कार्यालय को भेजा जाना चाहिए ताकि सीसीएस नियमों के अनुसार उचित कार्रवाई के लिए सरकारी कर्मचारी की एसीआर फाइल में रखा जा सके.”

Dog Feeding
चिड़िया और कुत्तों को खाना खिलाते एक महिला और पुरुष. फ़ाइल फ़ोटो

कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात पर जो दिया है कुत्तों का अपना इलाक़ा होता है और वे समूह में रहते हैं. इस बात को ध्यान में रखते हुए उनके खाने की जगह सुनिश्चित करनी होगी ताकि कुत्ते आपस में लड़ाई न करें.

अदालत ने सभी कानून प्रवर्तन अधिकारियों को ये भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि स्ट्रीट डॉग को खिलाने वाले लोगों का उत्पीड़न न हो, न ही कोई बाधा आए. अगर कहीं कुत्तों की देखभाल या खाना देने वाले नहीं हैं, अधिकारियों को वहां कुत्तों के लिए भोजन और पानी का इंतजाम करना होगा.

कोर्ट ने आवारा जानवरों की बढ़ती तादाद को लेकर भी चिंता जताई. उसने कहा कि कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण करना ज़रूरी है. इसके साथ ही कुत्ते को दोबारा उसी क्षेत्र में वापस रखना होगा जहां से उसे उठाया गया था. अदालत ने आगे कहा कि जिन कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हुआ है, उन्हें नगर पालिका इलाके से हटा नहीं सकती. कोर्ट ने कुत्तों के बीमार या घायल होने की स्थिति में आरडब्ल्यूए के फंड से पशु चिकित्सकों द्वारा उनके इलाज कराने की बात भी कही है.


वीडियो- सेहत: कुत्ते के काटने से रेबीज़ हो जाए तो पानी से डर क्यों लगने लगता है?

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