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सैन्य ऑपरेशन से जुड़े 25 साल से ज्यादा पुराने रिकॉर्ड सार्वजनिक होंगे

केंद्र सरकार ने शनिवार, 12 जून को सैन्य ऑपरेशन और सेना से जुड़ी जानकारियों को सार्वजनिक करने की घोषणा की. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सेना के इतिहास से जुड़ी जानकारियों को प्राइवेसी लिस्ट से हटाकर सार्वजनिक करने की पॉलिसी को मंजूरी दे दी है. इसके तहत 25 साल से ज्यादा पुराने रिकॉर्ड सार्वजनिक होंगे. इनमें युद्ध और लड़ाई के दौरान हुए संवाद और सैन्य ऑपरेशन की जानकारी होगी. किसी भी युद्ध, मिलिट्री ऑपरेशन्स के दो साल के अंदर एक कमेटी बनाई जाएगी जो सभी दस्तावेजों को अर्काइव करेगी.

क्या कुछ कहा गया है?

ट्विटर पर दी गई जानकारी के मुताबिक, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई नीति को मंजूरी दे दी है. ये नई नीति युद्ध और ऑपरेशन्स के अर्काइव, डिक्लासिफिकेशन और संग्रह की इजाजत देती है. इस नीति के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत प्रत्येक संगठन, हिस्ट्री डिविजन को रिकॉर्ड उपलब्ध कराएगा. रिकॉर्ड्स में युद्ध डायरीज, कार्यवाही पत्र और ऑपरेशनल रिकॉर्ड बुक आदि शामिल होते हैं.

इस नीति के मुताबिक 25 सालों के रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक यानी डिक्लासीफाइड किया जाएगा. 25 साल से अधिक पुराने रिकॉर्ड्स की जांच अर्काइवल एक्सपर्ट करेंगे. युद्ध, मिलिट्री ऑपरेशन्स इतिहास को संग्रह करने के बाद इनको भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार में ट्रांसफर कर दिया जाएगा. तमाम दस्तावेजों को जमा करने और छापने आदि के दौरान विभिन्न विभागों के साथ कॉर्डिनेशन की जिम्मेदारी इतिहास विभाग की होगी.

ये पॉलिसी कहती है कि युद्ध और मिलिट्री ऑपरेशन्स के दस्तावेज संग्रह के लिए एक कमेटी बनाई जा सकती है जिसको ज्वाइंट सेक्रेटरी हेड करेंगे. एक्सपर्ट्स कमेटी में तीनों सेना के प्रतिनिधि, विदेश और गृह मंत्रालय के समेत अन्य संस्थाओं व इतिहासकारों को शामिल किया जाएगा. ये समिति, युद्ध के पूरा होने के 2 सालों के अंदर बनाई जाएगी और 5 साल के अंतर इतिहास को संकलित यानी अर्काइव कर लिया जाएगा.

सेना के तमाम अंग, दस्तावेजों को हिस्ट्री डिवीजन यानी इतिहास विभाग को सौंप देंगे, ताकि दस्तावेजों का संरक्षण किया जा सके और साथ ही लिखित इतिहास भी तैयार किया जा सके. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक ऐसा करने से लोगों को युद्ध के इतिहास की सही जानकारी मिलेगी और अफवाहों को दूर करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही शैक्षिक रिसर्च के लिए भी जानकारी उपलब्ध हो पाएगी.

रक्षा मंत्रालय ने जो जानकारी उपलब्ध कराई है, उसके मुताबिक डॉक्युमेंट्स के क्लासिफिकेशन यानी वर्गीकरण की जिम्मेदारी सेना के संगठनों की ही रहेगी. इस बात की जानकारी पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट 1993 और पब्लिक रिकॉर्ड रूल्स 1997 दी गई है जिनको समय-समय पर संशोधित किया गया है.

इसमें कहा गया है कि युद्ध, पूरा होने के दो साल के भीतर समिति का गठन किया जाना चाहिए. इसके बाद अभिलेखों का संग्रहण और संकलन तीन सालों में पूरा किया जाए. यानी इस पूरी कवायद में 5 सालों का वक्त लगेगा. के सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता वाली कारगिल समीक्षा समिति के साथ-साथ एन एन वोहरा समिति ने युद्ध अभिलेखों के वर्गीकरण पर स्पष्ट नीति के साथ युद्ध इतिहास लिखे जाने की आवश्यकता की सिफारिश की थी. ऐसा इसलिए ताकि सीखे गए सबक का विश्लेषण किया जा सके और भविष्य की गलतियों को रोका जा सके.


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