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'निसर्ग' चक्रवात क्या है और ये कितना ख़तरनाक है?

साल 2020. ऐसा लग रहा है कि ये आपदाओं का साल है. दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है. साथ ही समुद्री चक्रवात भी लोगों को सांस नहीं लेने दे रहे हैं. दो सप्ताह पहले ही ‘अमपन’ चक्रवात आया था. यह चक्रवात बंगाल की खाड़ी से उठा था. इससे पूर्वी तट पर ओडिशा और बंगाल में नुकसान हुआ था. अब पश्चिमी तट यानी अरब सागर की ओर से चक्रवात आया है. इसका नाम है ‘निसर्ग’. आइए जानते हैं, क्या है यह तूफान और कितना खतरनाक है?

पहले नाम के बारे में

समुद्र में आने वाले चक्रवातों का भी एक नाम होता है. जैसे पिछले दिनों बंगाल की खाड़ी में आए चक्रवात का नाम ‘अमपन’ था. इसी तरह अरब सागर से उठे इस चक्रवात का नाम ‘निसर्ग’ है. यह नाम बांग्लादेश ने दिया है. ‘निसर्ग’ का बांग्ला भाषा में मतलब होता है कायनात/प्रकृति.

भारतीय मौसम विभाग ने 28 अप्रैल को तूफानों के नामों की लिस्ट जारी की थी. इसमें कुल 169 नाम हैं. आने वाले समय में अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से उठने वाले तूफानों के नाम इसी लिस्ट से रखे जाएंगे.

नासा की ओर से जारी तस्वीर. इसमें भारत के पश्चिमी तट की ओर बढ़ रहा तूफान साफ नज़र आ रहा है. (Photo: AP)
नासा की ओर से जारी तस्वीर. इसमें भारत के पश्चिमी तट की ओर बढ़ रहा तूफान साफ नज़र आ रहा है. (Photo: AP)

भारत के साथ ही बांग्लादेश, ईरान, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, श्रीलंका, थाइलैंड, यूएई और यमन ने नए नाम जारी किए हैं. ‘निसर्ग’ के बाद अगर कोई चक्रवात आया, तो उसका नाम ‘गति’ होगा. यह नाम भारत ने दिया है. भारत के आसपास आने वाले तूफानों के नामों के बारे में डिटेल से यहां पढ़ सकते हैं.

कितना खतरनाक है ‘निसर्ग’

चक्रवात कितना खतरनाक है, ये हवा की गति से तय होता है. जब हवा 63 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गोल घूमने लगती है, तो उसे चक्रवात कहा जाता है. इसके बाद जैसे-जैसे हवा की स्पीड बढ़ती जाती है, वैसे ही चक्रवात की कैटेगरी तय होती है. कैटेगरी एक से पांच के स्केल पर नापी जाती है. जितनी तेज हवा होती है, चक्रवात उतना ही खतरनाक होता है.

‘निसर्ग’ चक्रवात कैटेगरी दो में आता है. इसमें हवाओं की स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटे के करीब है. पर हवाएं कम या तेज होने पर इसकी कैटेगरी बदल सकती है. जैसे अमपन चक्रवात में हुआ था. अमपन कैटेगरी 1 से शुरू हुआ था. फिर कैटेगरी 5 में चला गया था.

निसर्ग तूफान के गुजरने का रास्ता.
निसर्ग तूफान के गुजरने का रास्ता.

कहा जा रहा है कि पिछले सौ साल में पहली बार कोई शक्तिशाली तूफ़ान जून में महाराष्ट्र की तरफ आया है. स्काईमेट के मुख्य मौसम विज्ञानी महेश पालावत ने बताया कि 129 साल में पहली बार जून के महीने में महाराष्ट्र से कोई तूफान टकराया है. इससे पहले 1891 में ऐसा हुआ था. इसके अलावा 2009 में आय़ा ‘फयान’ चक्रवात भी काफी शक्तिशाली था. लेकिन मुंबई तक आते-आते कमजोर पड़ गया था.

पूरब और पश्चिम के तूफानों में क्या अंतर है

भारत के आसपास ज्यादातर तूफान या चक्रवात पूर्वी दिशा यानी बंगाल की खाड़ी से आते हैं. बंगाल की खाड़ी से उठने वाले चक्रवात काफी तेज होते हैं. साथ ही आते भी काफी ज्यादा हैं. बंगाल की खाड़ी में लगभग हर साल कोई न कोई तूफान आता है. साथ ही ये काफी नुकसान भी पहुंचाते हैं. इसके उलट पश्चिम यानी अरब सागर से चक्रवात काफी कम आते हैं. साथ ही इनसे नुकसान भी कम होता है.

इस बारे में हमने बात की इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरियोलॉजी के डॉ. रॉक्सी मैथ्यू से. उन्होंने दो बातें बताईं.

1. अरब सागर का पानी ठंडा होता है. साथ ही इधर का मौसम भी बड़े तूफानों को क्रिएट करने में सहायक नहीं है. इस वजह से इधर बड़े चक्रवात का माहौल नहीं बन पाता है. वहीं बंगाल की खाड़ी का मौसम चक्रवात बनने में मदद करता है.

2. अरब सागर की तरफ जो हवाओं का बहाव है, वह भी चक्रवात को सपोर्ट नहीं करता है. यहां पर निचली हवाएं एक दिशा में बहती हैं और ऊपरी हवाएं दूसरी दिशा में. इससे चक्रवात उठ नहीं पाता. साथ ही इधर जो चक्रवात बनते हैं, वे अक्सर ओमान की तरफ निकल जाते हैं. ऐसे में भारत पर अरब सागर के तूफानों का असर नहीं पड़ता. वहीं बंगाल की खाड़ी में हवाएं भी चक्रवात में मददगार है. हवाएं तेजी से एक ही तरफ उठती हैं और गर्मी के चलते चक्रवात बनाती हैं. इधर हवाएं भी भारत की तरफ ही बढ़ती है, जिससे नुकसान बढ़ता है.

लेकिन डॉ. रॉक्सी चेताते हैं कि अब हालात बदल रहे हैं. पिछले कुछ दशकों में अरब सागर की तरफ मौसम गर्म हुआ है. इसी का नतीजा है कि इधर समंदर में हलचल बढ़ी है. ‘निसर्ग’ तूफान इसी गर्म होते तापमान का नतीजा है.

बता दें कि पिछले साल में अरब सागर में पांच चक्रवात बने. इनके नाम ‘वायु’, ‘हिक्का’, ‘क्यार’, ‘महा’ और ‘पवन’ थे. ऐसे में भारत को पश्चिमी किनारे पर भी संभलना होगा.

निसर्ग का अपडेट

# मौसम विभाग ने बताया कि निसर्ग चक्रवात 3 जून को दोपहर साढ़े 12 बजे तट से टकराया.
# महाराष्ट्र के रायगड जिले में इसकी लैंडिंग हुई. यहां से यह अलीबाग होता हुआ आगे बढ़ गया. इस दौरान हवाओं की रफ्तार 110 किलोमीटर प्रति घंटे के करीब रही.
# चक्रवात मुंबई से 80 किलोमीटर दूर दक्षिण में रहा. मौसम विभाग का कहना है कि अगले छह घंटों में यह कमजोर पड़ जाएगा.
# निसर्ग तूफ़ान के केंद्र का व्यास क़रीब 100 किलोमीटर है. इसकी चौड़ाई बीते कुछ घंटों में बढ़ी है.
# चक्रवात के चलते मुंबई एयरपोर्ट को दोपहर ढाई बजे से शाम 7 बजे तक के लिए बंद कर दिया गया.
# बांद्रा-वर्ली सी लिंक पर यातायात को बंद कर दिया गया.

# निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया. इसके तहत करीब एक लाख लोगों को निचले इलाकों से निकाला गया है.
# महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में भारी बारिश हुई है. साथ ही तेज हवाओं के चलते काफी नुकसान हुआ.
# रायगड, पालघर, सिंधुदर्ग और मुंबई में तेज हवाओं के चलते कई पेड़ उखड़ गए. बिजली के खंभों को भी नुकसान पहुंचा है. कई कच्चे घरों की छतें उड़ गईं.
# महाराष्ट्र में एनडीआरएफ की 21 टीमें तैनात की गई हैं. लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है.
# महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने लोगों से दो दिनों तक घरों के भीतर ही रहने की अपील की है.
# गुजरात और दमन में भी सुरक्षा के चलते लोगों को सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाया गया.


Video: अमपन तूफान: पश्चिम बंगाल की सरकार ने ओडिशा से कुछ नहीं सीखा?

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