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रूस की जिस कोरोना वैक्सीन का हल्ला मचा हुआ है, उसमें एक बहुत चिंता की बात है

रूस ने कोरोनावायरस की वैक्सीन को लेकर बड़ा दावा किया है. कहा है कि उसकी वैक्सीन बनकर तैयार है, आगामी 12 अगस्त को इस वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा. और अक्टूबर का महीना लगते-लगते रूस में भारी संख्या में लोगों को ये वैक्सीन लगायी जाएगी. यानी मास वैक्सिनेशन प्रोग्राम शुरू होगा, ऐसा दावा है. मतलब, अगर सब सही रहा तो रूस वाली वैक्सीन दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन होगी.

किसने बनायी है ये वैक्सीन?

रूस के रक्षा मंत्रालय और गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट ने मिलकर. Business Today की रिपोर्ट के मुताबिक़, क्लिनिकल ट्रायल का डाटा अभी विशेषज्ञों के पास रिव्यू के लिए रखा गया है. एकाध दिन में नतीजे बाहर आएंगे और फिर वैक्सीन का रजिस्ट्रेशन. 

रूसी न्यूज़ एजेंसी स्पूतनिक के मुताबिक, रूस के डिप्टी हेल्थ मिनिस्टर ओलेग ग्रिदनेव ने ये भी जानकारी दी है कि इस वैक्सीन के फ़ेज़ 3 के ट्रायल हो रहे थे. और रजिस्ट्रेशन कराए जाने के बाद इस वैक्सीन को सबसे पहले ज़्यादा उम्र के लोगों और स्वास्थ्यकर्मियों को दिया जाएगा.

कैसे काम करेगी रूस की वैक्सीन?

कमोबेश उसी तरीक़े से, जैसे Oxford की वैक्सीन बनाई जा रही है. गामलेया रिसर्च इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर ऐलेग्ज़ैंडर गिंट्सबर्ग ने बताया है कि ऐडेनोवायरस – यानी आम ज़ुकाम का वायरस – के जेनेटिक मटीरीयल को कोरोनावायरस के खोल में डालकर इंसानों के शरीर में डाला जाता है. शरीर के इम्यून सिस्टम को लगता है कि कोरोनावायरस का हमला हुआ है, लेकिन ये आम फ़्लू का वायरस होता है. फिर भी शरीर का इम्यून सिस्टम धोखे में आकर कोरोनावायरस के खिलाफ़ एंटीबॉडी बनाने लगता है. जिससे आगे यदि सच में कोरोनावायरस का हमला हो, तो शरीर में मौजूद एंटीबॉडी उसका मुकाबला कर सकें.

लेकिन इस पर सवाल भी उठ रहे हैं. कहा जा रहा है कि रूस ने इस वैक्सीन का ट्रायल अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं किया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन यानी WHO ने कहा है कि सुरक्षित और कारगर वैक्सीन बनाने के लिए जो गाइडलाइन बनाई गयी हैं, उनका पालन करिए.

इसके अलावा अमरीका के संक्रामक रोग विशेषज्ञ ऐन्थॉनी फ़ाउची ने कहा है कि वो आशा करते हैं कि रूस ने अपनी इस वैक्सीन को लोगों को लगाने के पहले इसकी पूरी तरह जांच कर ली होगी. क्योंकि अगर जांच ही सही तरीक़े से नहीं हुई है, तो वैक्सीन बना लेने का दावा करना बहुत दिक़्क़त की बात हो सकती है.

लेकिन ऐलेग्ज़ैंडर गिंट्सबर्ग ने दावा किया है कि उनकी वैक्सीन का कोई साइडइफ़ेक्ट नहीं है. 

हैकरों ने जुटाया वैक्सीन के लिए डाटा?

लेकिन ये पहला मौक़ा नहीं है, जब रूस की वैक्सीन पर सवाल उठे हों. अप्रैल के महीने में राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ने आदेश जारी किए थे कि कोरोना की रोकथाम के लिए दवाइयों और वैक्सीन के लिए क्लिनिकल ट्रायल का समय कम किया जाए.

इसके बाद जुलाई के महीने में UK,अमरीका और कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों ने दावा किया कि रूसी हैकरों के एक ग्रुप ने कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटे कई संगठनों के आँकड़ों पर डाका डालने की कोशिश की, ताकि वैक्सीन बनाने के लिए आंकड़े रूस के पास पहुंच सकें. रूस ने इन आरोपों से इंकार कर दिया था.

इसके बाद रूस ने 17 जून को ट्रायल शुरू करने की बात कही. और जुलाई के पहले महीने में ही दावा कर दिया कि रूस की वैक्सीन तैयार है. हर जगह हल्ला होने लगा. और तभी ये पता चला कि रूस ने तब महज़ पहले फ़ेस का ट्रायल ही शुरू किया था. WHO ने रूस को इतनी तेज़ी से बढ़ने के लिए तब भी चेतावनी दी थी, अब भी दी है. लेकिन रूस के दावे हैं कि बुलंद हैं.


लल्लनटॉप वीडियो : रूस ने कोरोना की वैक्सीन के नाम पर लंबा गेम किया है 

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