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कोरोना से हुई मौतों पर झूठ कौन बोल रहा है? श्मशान या सरकारी दावे?

कोरोना की दूसरी लहर इतनी खतरनाक होगी, किसी ने नहीं सोचा था. इसके सामने सारे मेडिकल इंतजाम फेल हो गए, सिस्टम फेल हो गए, और फेल हो गया हर सरकारी दावा. हर शहर के श्मशानों में लगातार लाशें आ रही हैं, बिना रुके चिताएं जल रही हैं. ऐसा लगता है जैसे श्मशान, कारखाने बन गए हैं जो 24 घंटे चल रहे हैं. ऐसी त्रासदी आजादी के बाद से देश ने कभी नहीं देखी. सरकारी आंकड़े चाहे जो कहते हों लेकिन श्मशान और कब्रिस्तान झूठ नहीं बोलते.

विदेशी अखबार ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ लिखता है कि भारत के अस्पताल भरे हुए हैं, ऑक्सीजन की कमी है, लोग डॉक्टरों को दिखाने के लिए इंतजार में मर रहे हैं, ये तमाम बातें दिखाती हैं कि मौत का असली आंकड़ा, सरकारी आंकड़ों से काफी अधिक है. सरकारी आंकड़ों की बात करें तो 24 अप्रैल को पूरे देश में कोरोना वायरस से 2767 लोगों की मौत हुई. जबकि देशभर के श्मशानों से आ रही तस्वीरें अलग ही कहानी बता रही हैं.

 

देशभर के श्मशान घाटों से जो इंटरव्यू आ रहे हैं वो बताते हैं कि यहां आग शांत नहीं हो रही. लगातार चल रही लाशों की तस्वीरें बताती हैं कि मौत का असली आंकड़ा सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक है.  यूनिवर्सिटी ऑफ मिशीगन के महामारी विशेषज्ञ, भ्रमर मुखर्जी कहते हैं कि ‘ये पूरी तरह से गलत डेटा है. अभी तक की रिपोर्ट्स और जानकारी के मुताबिक मौत का जो आंकड़ा बताया जा रहा है, ये उसे दोगुने से लेकर पांच गुना तक हो सकता है.’

गुजरात के अहमदाबाद एक बड़ा श्मशान है. यहां के कर्मचारी सुरेश भाई बताते हैं कि इस श्मशान में 24 घंटे चिताएं जल रही हैं. सुरेश भाई कहते हैं कि उन्होंने मौत की ऐसी अंतहीन स्थिति नहीं देखी है. लेकिन जब वो पीड़ित परिवारों को पर्ची देते हैं तो उस पर मौत की वजह कोविड-19 नहीं लिखते, बावजूद इसके कि मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. वो पर्ची पर वजह लिखते हैं- बीमारी. जब उनसे पूछा गया कि ऐसा क्यों? तो उन्होंने कहा कि ऊपर से यही कहा गया है. और इस मुद्दे पर प्रशासन के जिम्मेदार लोग बात करने से इनकार कर देते हैं.

Shamshan Ghat
दिल्ली के एक श्मशान घाट की तस्वीर. फोटो- PTI

कई जगहों पर सामूहिक अंतिम संस्कार हो रहे हैं. कई जगहों पर एक साथ दर्जनों चिताएं जल रही हैं.

कुछ दिन पहले हमारी साथी स्वाति लखनऊ पहुंची थीं. वहां उन्हें पता चला कि भैंसाकुंड श्मशान में अमूमन 20 शव रोजाना दाह-संस्कार के लिए आते थे लेकिन अब ये संख्या 100 हो चुकी है. कुछ लोगों का तो ये भी कहना है कि 12 से 24 घंटों तक अंतिम संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है. एक साथ जलती चिताओं की तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए तो प्रशासन ने एक किस्म की अस्थाई दीवार ही बना दी. वहां के हालात जानने के लिए आप ये वीडियो देख सकते हैं-

गुजरात के सूरत पहुंचे ‘दी लल्लनटॉप’ के संवाददाता निखिल, उस श्मशान में पहुंचे जहां से भट्टी की चिमनी पिघल जाने की खबर सामने आई थी. वहां मौजूद शख्स ने उन्हें बताया कि एक रात में 48 शवों का अंतिम संस्कार भी यहां हुआ है. पिछले कुछ दिनों से मृतकों की संख्या बढ़ गई है. लकड़ी से लेकर अन्य चीजों की मांग बढ़ गई है. कोरोना की इस दूसरी लहर से पहले मृतकों की संख्या इतनी नहीं थी लेकिन हालात अब काफी बुरे हैं. उनकी रिपोर्ट देखिए-

अब दोबारा से ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट पर आते हैं. अखबार लिखता है कि 80 के दशक में भोपाल में गैस लीक के कारण हजारों लोगों की जान गई थी. अब स्थानीय निवासी बता रहे हैं कि उस वक्त भी श्मशान इतने व्यस्त नहीं थे जितने आज हैं. कोविड के कारण अप्रैल के 13 दिनों में 41 मौतों का सरकारी आंकड़ा है. लेकिन इतने ही दिनों में भोपाल में करीब 1000 लोगों का अंतिम संस्कार कोविड प्रोटोकॉल्स के तहत किया गया. भोपाल के एक कार्डियोलॉजिस्ट (दिल संबंधी बीमारियों के डॉक्टर) कहते हैं कि ‘बहुत सी मौतों को दर्ज नहीं किया जा रहा क्योंकि अधिकारी दशहत पैदा नहीं करना चाहते लेकिन मौतों का आंकड़ा दिनोंदिन बढ़ रहा है.’

अखबार के मुताबिक 14 अप्रैल को सूरत और गांधीनगर में करीब 124 लोगों के शव जलाए गए जबकि अधिकारियों के मुताबिक इस दिन पूरे प्रदेश में कोविड के कारण केवल 73 मौतें हुईं. यूपी के कानपुर में श्मशानों में जगह नहीं मिलने के कारण शहर के पार्कों में शवों को जलाए जाने की खबर मिली है.

ये स्थिति हर जगह है. सरकारी आंकड़ा बहुत कम है लेकिन अखबार, मीडिया की खबरों के मुताबिक, श्मशानों में कहीं अधिक लाशें कोविड प्रोटोकॉल्स के तहत जलाई गई हैं. भारत में बड़ी संख्या में जवान लोग रहते हैं, इसलिए माना जा रहा था कि कोविड यहां अपेक्षाकृत कम लोगों की जान ले रहा है लेकिन हाल ही में बढ़ रहे आंकड़े ने लोगों को चौंका दिया है. बता दें अभी तक 10 प्रतिशत से भी कम भारतीयों को कोविड वैक्सीन की एक डोज मिली है. बावजूद इसके कि भारत दुनिया का बड़ा वैक्सीन उत्पादक है. भारत को दुनिया का बहुत सारे गरीब देशों की मदद करनी थी लेकिन अंदरुनी हालात की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल निर्यात को बंद किया गया है.


वीडियो- बिहार,यूपी,दिल्ली और गुजरात में ‘दी लल्लनटॉप’ के रिपोर्टर्स ने कोरोना पर सरकार की ये चोरी पकड़ ली!

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