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कोरोना की दूसरी लहर के बीच किन-किन देशों ने भारत को मदद की पेशकश की है?

पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस की दूसरी लहर का सामना कर रही है. भारत में भी हालात बेहद गंभीर हैं. रोजाना परेशान करने वाली खबरें सामने आ रही हैं. दवाइयों, ऑक्सीजन, एंबुलेंस और अस्पतालों में बेड्स की कमी की बातें आम हो चली हैं. श्मशानों और कब्रिस्तानों में भी भीड़ है. हालात ऐसे हैं जैसे मानो सिस्टम फेल हो चुका है. ऐसे में दुनिया के कई देशों ने भारत की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है.

23 अप्रैल को देश भर में कोविड-19 के 3 लाख 46 हजार 786 नए केस सामने आए. 2624 लोगों की मौत हुई. देश में अब तक कोरोना के कुल एक करोड़ 66 लाख 10 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं. इस बीमारी की वजह से एक लाख 89 हजार 544 लोगों की जान जा चुकी है. इस वक्त देश में 25 लाख 52 हजार 940 एक्टिव केस हैं. हालांकि ये दावे और आंकडे सरकारी हैं, जिन पर सवाल उठ रहे हैं. संख्या इससे कहीं ज्यादा है.

फिलहाल बात उन देशों की जिन्होंने भारत की मदद के लिए पेशकश की है. रूस, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और चीन ने भारत की मदद की बात कही है. अमेरिकी स्वास्थ्य सचिव मैट्ट हैनकॉक ने 23 अप्रैल को ट्वीट किया कि

‘भारत से हृद्यविदारक तस्वीरें सामने आ रही हैं. मेरी संवेदनाएं हमारे भारतीय मित्रों के साथ हैं. इस वायरस के खिलाफ जंग में हम उनके साथ खड़े हैं.

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन प्साकी ने कहा कि अमेरिका की, भारत के प्रति गहरी संवेदना है जो इस वक्त ग्लोबल महामारी से जूझ रहा है. उन्होंने कहा कि हम भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर इस क्राइसिस में मदद करने के रास्ते तलाश रहे हैं. हम अपने क्वाड सहयोगियों के साथ वैक्सीन सहयोग भी करेंगे और भारत भी हमारे क्वाड साथियों में से एक है.

डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद एडवर्ड मार्के ने अपने ट्वीट में कहा कि अमेरिका के पास ज्यादा टीके हैं, लेकिन हम भारत जैसे देशों को इसे मुहैया कराने से इंकार कर रहे हैं.

अमेरिका के कई सांसदों और ऊंचे पदों पर बैठे भारतीय-अमेरिकियों ने अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन से भारत की मदद करने का आग्रह किया है. इन लोगों ने अमेरिकी सरकार से कहा है कि कोरोना संकट का सामना कर रहे भारत को दवाओं और मेडिकल सामानों के साथ-साथ वैक्सीन भी उपलब्ध कराई जाए. इससे पहले वैक्सीन निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री को भारत को देने से अमेरिका ने इंकार कर दिया था.

बाकी देश भी करेंगे मदद

अंग्रेजी के बिजनेस  अखबार ‘मिंट’ में छपी एक खबर के मुताबिक 23 अप्रैल को चीन ने कहा कि वो महामारी से जूझ रहे भारतीय लोगों की मदद करेगा. वह इसको लेकर भारतीय सरकार के साथ संपर्क में है. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा कि बीजिंग मदद के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस मानवजाति का दुश्मन है. इस महामारी से निपटने के लिए पूरी दुनिया को एकजुट होने की जरूरत है.

चीन के अलावा रूस और फ्रांस ने भी मदद की पेशकश की है. यही नहीं पाकिस्तान के एक संगठन Edhi Foundation ने भी भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मदद की पेशकश की है. वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी भारत की मदद करने का आश्वासन दिया है. 23 अप्रैल को डर्बीशायर में उन्होंने कहा कि हम भारत की मदद करेंगे और फिलहाल ये देख रहे हैं कि क्या किया जा सकता है.

भारत सरकार इन देशों से ऑक्सीजन, रेमडेसिविर और अन्य दवाइयां लेने की बातचीत कर रही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कई स्तरों पर ये बातचीत जारी है और जल्द ही इन देशों से सामान, भारत पहुंचेगा. रूस से जहां रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर बात हो रही है वहीं सिंगापुर से ऑक्सीजन को लेकर बातचीत जारी है.

23 अप्रैल को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्वीट किया और कहा कि हम भारत की जनता के साथ खड़े हैं जो कोविड-19 का मुकाबला कर रही है. फ्रांस इस मुकाबले में आपके साथ है और किसी को पीछे नहीं छोड़ा जाएगा. हम पूरी मदद और सपोर्ट के लिए तैयार हैं.

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेरिस पायने (Marise Payne) ने भी भारत की मदद का भरोसा दिया है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि भारत ने हमें वैक्सीन उपलब्ध कराई थी. हम लोग साथ काम करेंगे और इस वैश्विक महामारी से निपटेंगे. इसके इलावा यूरोपीय यूनियन की ओर से भी भारत को मदद की पेशकश की गई. EU के नेताओं से बातचीत के बाद भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट पर लिखा कि EU ने मदद की जो पेशकश की है, हम उसकी प्रशंसा करते हैं.


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