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नाइट कर्फ्यू का कोरोना वायरस के फैलने से क्या लेना-देना है? क्या कहता है पुलिस और प्रशासन?

एक बार फिर कोरोना की दूसरी और तीसरी वेव की बात हो रही है. गृह मंत्रालय ने राज्यों को नाइट कर्फ्यू और कंटेनमेंट ज़ोन में लॉकडाउन लगाने की अनुमति दे दी है. कई राज्यों ने अपने यहां नाइट कर्फ्यू लगा दिया है, तो कुछ लगाने वाले हैं. मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान ने नाइट कर्फ्यू घोषित कर दिया है. पंजाब में एक दिसंबर से नाइट कर्फ्यू लगने वाला है. दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से कोरोना के मामले ज्यादा आ रहे हैं. दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट में कहा है कि सरकार किसी तरह के कर्फ्यू पर कोई विचार नहीं कर रही है लेकिन आगे हालात बिगड़े तो इस पर फैसला लिया जा सकता है.

धड़ाधड़ घोषित होने वाले नाइट कर्फ्यू के बीच हमने विशेषज्ञों से ये जानने की कोशिश की कि नाइट कर्फ़्यू का कोरोना से क्या लेनादेना है? यह कोरोना के संक्रमण को रोकने में कितना कारगर है?

कुछ महीने पहले ही सेवा से रिटायर होने वाले ICMR के पूर्व प्रमुख डॉ रमन गंगाखेडकर का कहना है,

हो सकता है कि नाइट कर्फ़्यू से कोरोना का फैलाव न रुके, लेकिन लोग इससे ये समझ सकते हैं कि हमें अपनी जीवनशैली बदलने की ज़रूरत है. कम्प्लीट लॉकडाउन लगाने से हमारी अर्थव्यवस्था पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.

हमने इंदौर के अरबिंदो अस्पताल के डॉक्टर नीरज से बात की. पिछले नौ महीने से कोविड-19 वार्ड में काम कर रहे हैं. उन्होंने नाइट कर्फ्यू के मुद्दे पर कहा,

“नाइट कर्फ्यू का कोरोना के मामलों पर कुछ खास असर नहीं पड़ेगा. कुछ इलाकों में जहां पर खाने-पीने की दुकानें देर रात तक चालू रहती हैं, जैसे इंदौर में बड़ा सराफा है, छप्पन है. यहां रात में बहुत भीड़ हो जाती है. लोग खाने के लिए वहां जाते हैं. तो इन इलाकों से किसी न किसी तरीके से कोविड का प्रभाव बढ़ सकता है. इसलिए इंदौर में नाइट कर्फ्यू थोड़ा कारगर रहेगा. तो यही है कि अगर रात में कर्फ्यू लग जाएगा, तो आदमी बाहर निकलेगा नहीं, ऐसे में रात में जमा होने वाली भीड़ तो कम से कम कंट्रोल हो जाएगी. थोड़ा इफेक्ट पडे़गा. टाइम टेबल जो फिक्स हो जाएगा, तो आदमी उसी के अंदर अपने ज़रूरी काम निपटा लेगा. यानी नाइट कर्फ्यू अप्रत्यक्ष रूप से थोड़ा फायदा देगा. बड़ा कोई इफेक्ट इससे नहीं पड़ने वाला.”

इसके अलावा हमने बात की डॉक्टर अंकित विजय से, जो कि राजस्थान में कोरोना के मामलों को देख रहे हैं. उनका कहना है कि नाइट कर्फ्यू का कोई अहम असर देखने को नहीं मिलेगा. उन्होंने सीधे तौर पर यही कहा कि कोरोना के मामलों में इसका कोई असर नहीं पड़ेगा.

पुलिस प्रशासन क्या कहता है?

फिर हमने पुलिस प्रशासन, जिस पर इस पूरे कर्फ्यू को लागू करने का ज़िम्मा है. उनका नज़रिया जानना चाहा. हमारी बात हुई अलवर SP (सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस) तेजस्विनी से. उन्होंने कहा कि नाइट कर्फ्यू लगाने का पहला मकसद ये है कि लोग कोरोना को गंभीरता से लें. उन्होंने कहा कि लोग इसे लाइटली लेने लगे हैं, जो कि सही नहीं हैं, मामले लगातार बढ़ ही रहे हैं, डेढ़ लाख के करीब लोग हमारे देश से हमारे बीच से जा चुके हैं, इसलिए इस बीमारी को और वायरस को गंभीरता से लेना बेहद ज़रूरी है. नाइट कर्फ्यू से लोग वापस जागरुक होंगे. आगे SP ने कहा,

“रात में, खासतौर पर छोटे शहरों में लोग रात के समय की चाट-पकौड़ी खाने को निकलते हैं. इसमें सबसे ज्यादा कम्युनिटी स्प्रेड का डर रहता है. तो उस चीज़ को संभालने के लिए नाइट कर्फ्यू बहुत सही है. इकॉनमी खराब न हो, लोगों को आर्थिक दिक्कत न आए, इसलिए पूरी तरह से बंद करने के बजाए नाइट कर्फ्यू लगा रहे हैं. हां उतना असर नहीं होगा इसका, लेकिन ये कहना कि कुछ भी असर नहीं होगा, सही नहीं है. अगर 100 चीज़ों में कर्फ्यू फैल रहा है तो हम नाइट कर्फ्यू के द्वारा 25-30 चीज़ों को तो कंट्रोल कर रहे हैं. कुछ नहीं से कुछ तो बेहतर है. थोड़ा तो कंट्रोल ज़ाहिर तौर पर होगा, लोग बाहर कम निकलेंगे, एक-दूसरे से मिलेंगे कम.”

इंदौर के DIG हरिनारायणचारी से भी हमने बात की. उनका कहना है कि नाइट कर्फ्यू का कोरोना के मामलों पर असर पड़ेगा, थोड़ा ही सही लेकिन असर पड़ेगा. उन्होंने कहा,

“इंदौर जैसे शहरों में ऐसा कल्चर है कि लोग रात को बाहर निकलते हैं खाने के लिए. गेट-टू-गेदर होता है. इसलिए रोक लगाना ज़रूरी है. जो ज़रूरी चीज़ें हैं, वो तो ठीक है, लेकिन जो गैर-ज़रूरी चीज़ें हैं उन्हें तो रोका जा सकता है.”

इंदौर DIG ने भी इस बात पर ज़ोर दिया कि नाइट कर्फ्यू से लोग एक बार फिर से कोरोना को गंभीरता लेंगे, क्योंकि लोगों के मन में ये आ गया है कि कोई बात नहीं, अब तो ठीक हो गया है, ये सोच बदलेगी. जो लापरवाही हो गई थी, वो कम होगी. DIG ने आगे कहा,

“हम पहले की तरह दिन में कर्फ्यू नहीं लगा सकते क्योंकि आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित थीं. इसलिए ज़रूरी है कि जो गैर-ज़रूरी काम के लिए लोग रात में बाहर निकलते हैं उसे रोका जा सके. हम अभी उसी स्थिति में हैं जो बहुत आवश्यक हो और अर्थव्यवस्था प्रभावित न हो, उन्हीं जगह पर कर सकते है. इस कर्फ्यू से कोरोना के मामलों में कमी ज़रूर आएगी. एकदम ज्यादा कमी नहीं आएगी, लेकिन हमारे पास विकल्प नहीं है. यही ऐसा विकल्प है जिससे हमारी अर्थव्यवस्था प्रभावित नहीं होगी और रोक लगी रहेगी.”

हालांकि हकीकत ये भी है कि नाइट कर्फ्यू से कोरोना का संक्रमण कितना रुकेगा, इसे लेकर किसी तरह की रिसर्च नहीं हुई है. नाइट कर्फ्यू की आलोचना करने वालों का कहना है कि छोटे शहरों में वो वैसे ही रात में लोग नहीं निकलते हैं. ठंड में लोगों का रात में निकलना और कम हो जाता है. ऐसे में नाइट कर्फ्यू लगाने का क्या मतलब.

वहीं सरकार का अपना तर्क है. सरकारें अप्रैल जैसा कड़ा लॉकडाउन नहीं लगा सकती. क्योंकि लॉकडाउन की वजह से भारत की अर्थव्यवस्था की हालत सही नहीं है. यही कारण है कि गृह मंत्रालय की ओर से 25 नवंबर को जारी गाइडलाइन में कंटेनमेंट जोन पर फोकस करने की बात कही गई है. लेकिन कंटेनमेंट जोन के बाहर किसी प्रकार का लॉकडाउन लगाने से पहले राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को केंद्र से अनुमति लेनी होगी. सरकार का मानना है कि रात में कर्फ्यू लगाने से छोटे स्तर पर ही सही, लेकिन भीड़ कम करने में मदद मिलेगी. लोगों में जागरूकता आएगी कि अभी भी बिना वजह घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है.


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