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भारत में कोरोना की सेकेंड वेव पहले से भी ज्यादा खतरनाक?

इस खबर में कोरोना के नए खतरे पर बात करेंगे. क्योंकि कहा जा रहा है कि कोरोना कि ये नई वेव पहले से ज़्यादा खतरनाक है? क्यों हमारे पास वैक्सीन का हथियार होने के बावजूद कोरोना को काबू में नहीं कर पा रहे? और एक सवाल और कि क्या अब टीकाकरण की रफ्तार संक्रमण की रफ्तार नहीं रोक पा रही तो क्या फिर लॉकडाउन ही एक विकल्प है?

कोरोना संक्रमण से उपजे नए ख़तरे की बात

आज ही के दिन सालभर पहले देश में पहली बार जनता कर्फ्यू लगाया गया था. एक नए खतरे को बढ़ने से रोकने के लिए प्रधानमंत्री की अपील पर सब कुछ बंद रखा गया था. शाम को थालियां बजाई गई थी. सोशल-मीडिया पर वो पुरानी फोटो, वीडियो शेयर हो रहे हैं, मीम बन रहे हैं, मज़ाक बन रह रहे हैं, क्योंकि अब सब जानते हैं कि थाली बजाने से कोरोना नहीं रुकता. लेकिन कर्फ्यू या लॉकडाउन लगाना कोई भारत का अल्हदा प्रयोग नहीं था. पूरी दुनिया में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए यही हो रहा था. तब हमारे पास कोरोना से लड़ने के लिए कोई हथियार नहीं था. और तब उम्मीद थी कोरोना की वैक्सीन. देश और दुनिया के वैज्ञानिकों की सालभर की मेहनत के बाद हमने कोरोना की वैक्सीन हासिल की. आज हमारे पास कोरोना से लड़ने वाला वैक्सीन का हथियार है, जिसकी पिछले साल सबसे ज़्यादा कमी महसूस की जा रही थी. इसके बावजूद हम फिर से घूमकर स्कैवेयर वन पर पहुंच गए हैं. पिछले साल के मार्च की तरह के इंतजामात अब फिर से करने पड़ रहे हैं. स्कूल जो बमुश्किल एक दो महीनों पहले ही खुले थे, उन्हें फिर से बंद करना पड़ रहा है, एक बार फिर हम कोरोना के बढ़ते संक्रमण के आगे असहाय महसूस कर रहे हैं. क्यों ऐसा हुआ, क्या टीकाकरण की हमारी स्ट्रैटजी में कोई कमी है, इस पर आएंगे. लेकिन पहले आंकड़ों से समझिए कि ये ख़तरा रोज़ कितना बड़ा होता जा रहा है.

नवंबर के बाद सबसे ज़्यादा मामले

पिछले 24 घंटे में यानी रविवार को देशभर में कोरोना के 46 हज़ार 951 नए मामले आए. इसका मतलब ये समझिए कि नवंबर के बाद अब सबसे ज़्यादा मामले आए हैं. 212 लोगों की मौत हुई. 12 जनवरी के बाद से मरने वालों की संख्या 200 से ज़्यादा कभी नहीं गई थी, लेकिन रविवार को ये आंकड़ा बढ़कर 212 तक पहुंच गया. ठीक होने वालों की संख्या है 21 हजार 180. देश में अब कुल एक्टिव मामले बढ़कर 3 लाख 34 हज़ार हो गए हैं. अगर हम हफ्ते का हिसाब लगाएं तो पिछले एक हफ्ते में जिस रफ्तार से कोरोना के मामले बढ़े हैं, वो अब तक की सबसे ज़्यादा है. इसलिए सबके कान खड़े हो गए हैं. पिछले साल जनवरी में कोरोना का भारत में पहला मामला आया था और जुलाई में जाकर संक्रमण 47 हज़ार रोज़ाना के हिसाब से बढ़ना शुरू हुआ था. लेकिन अगर हम फरवरी और मार्च के आंकड़ें देखें तो ये रफ्तार बहुत तेज़ है और बहुत डरावनी भी है.

थोड़ा सा फर्क ये है कि अब लगभग 84 फीसदी मामले सिर्फ 6 राज्यों से ही आ रहे हैं. और उनमें अव्वल नंबर पर है महाराष्ट्र. महाराष्ट्र में रविवार को अब तक के सबसे ज़्यादा मामले आए. कितने – 30 हज़ार 535. और संक्रमण पूरे महाराष्ट्र में भी नहीं है. मुंबई, नासिक, पुणे, औरंगाबाद और नागपुर इन ज़िलों में ज़्यादा मामले आ रहे हैं.

रफ्तार तेजी से बढ़ने वाला ट्रेंड और भी कई राज्यों में दर्ज हो रहा है. पंजाब में रविवार को 2 हजार 644 केस दर्ज किए गए. रफ्तार धीरे धीरे दिल्ली में बढ़ रही है. दिल्ली में अब 200 से ज्यादा केस आने लगे हैं. राजस्थान, हरियाणा, एमपी जैसे और भी राज्यों में मामले बढ़ते जा रहे हैं.

अब वैक्सीन के सवाल पर आते हैं

16 जनवरी से देश में कोरोना के टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू हुई थी. दो महीने से ज्यादा हो गया. और अब तक वैक्सीन के कितने डोज़ लगाए गए हैं – 4 करोड़ 50 लाख 65 हज़ार. वैक्सीन पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का ताज़ा आंकड़ा है. हालांकि इसका मतलब ये मत समझिए कि इतने लोग टीका लगवाकर बरी हो चुके हैं. कोरोना के टीके दो बार लगाए जाते हैं. देश में करीब 75 लाख लोगों को ही अभी कोरोना की दूसरी डोज़ लगाई जा सकी है. जबकि 3 करोड़ 75 लाख लोगों को पहली डोज़ दी जा चुकी है. टीकाकरण की धीमी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं… कहा जा रहा है कि अगर ये प्रक्रिया इसी तरह से चलती रही तो भारत को 70 फीसदी आबादी का टीकाकरण करने में कई बरस लग जाएंगे. विपक्षी इस बात को लेकर हावी हैं कि मोदी सरकार ने देश में जितने टीके लगवाए हैं, उससे ज़्यादा तो बाहर के देशों को अब तक दे चुके हैं. भारत से बाहर अब तक कोरोना के करीब 5 करोड़ 80 लाख डोज़ भेजे जा चुके हैं…. पर यहां समझने वाली बात ये है कि क्या भारत ने टीके दूसरे देशों को दे दिए, तो इसलिए टीकाकरण में तेज़ी नहीं है? क्या वैक्सीन की किल्लत नहीं है? नहीं ऐसा नहीं है. शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि उसने राज्यों को कोविशिल्ड और कोवैक्सीन के 7 करोड़ 54 लाख डोज़ दिए हैं. और अब तक साढ़े चार करोड़ वैक्सीन डोज़ ही लगाए गए हैं. तो केंद्र सरकार कह रही है कि राज्यों के पास पर्याप्त वैक्सीन है और वैक्सीन का नया ऑर्डर भी दिया जा चुका है.

रविवार को देश में 4 लाख 62 हज़ार लोगों टीके लगाए गए थे. शुक्रवार को करीब 18 लाख लोगों को टीके लगाए गए थे. लगभग इतने ही टीके हर रोज़ लगाए जा रहे हैं. और अभी सिर्फ खास कैटेगरी के लोगों को ही टीके लगाए जा रहे हैं. 16 जनवरी से शुरू से टीकाकरण के पहले चरण में सिर्फ स्वास्थ्यकर्मियों जैसे फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन लगाई गई थी. और दूसरे चरण में 60 साल से ऊपर के सभी लोगों को और 45 साल से ऊपर के उन लोगों को जिनमें कई तरह की बीमारियां, इन्हें टीके लगाए जा रहे हैं. हर उम्र के लोग अब अभी टीके नहीं लगवा पाते. अब सरकारी अस्पतालों के अलावा कुछ निजी सेंटर्स में भी टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू हुई है. लेकिन टीकाकरण की पूरी प्रोसेस का नियमन सरकार कर रही है. कोई खरीदकर टीके लगवाना चाहे तो नहीं अभी उपलब्ध नहीं है. इस स्ट्रैटजी पर सवाल उठते हैं. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि अभी कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच सबसे पहले उन शहरों में टीकाकरण ज्यादा होना चाहिए, जहां संक्रमण ज़्यादा फैल रहा है.

केंद्र सरकार ने आज राज्यों को निर्देश दिया है कि अब कोरोना वैक्सीन के पहले और दूसरे डोज़ के बीच 6 से 8 हफ्तों का गैप रखा जाए. हालांकि ये निर्देश सिर्फ सीरम इंस्टिट्यूट वाली कोविशिल्ड वैक्सीन के लिए ही हैं. इससे पहले 28 दिन के बाद दूसरा डोज़ लगाया जाता था. नेशनल टेक्निकल एडवाइज़री ग्रुप ऑन इम्यूनाइज़ेशन और नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन की सिफारिशों के आधार पर ये स्वास्थ्य मंत्रालय ने फैसला लिया है. वजह ये दी गई है कि इस अंतराल के बाद ही वैक्सीन ज़्यादा असरदायी होगी.

वैक्सीन जिनको अभी दी जा सकती है उन्हें दी जा रही है. बाकी लोग भी कोरोना को बिल्कुल हल्के में ना लें. मास्क पहने, सामाजिक दूरी का पालन करें. कोरोना की सेकेंड वेव पहले से भी ज्यादा खतरनाक मानी जा रही है.


वीडियो- कोरोना का ये कैसा स्ट्रेन है कि अगर इंडिया में पीसीआर टेस्ट से भी पता नहीं चलेगा?

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