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आयुष्मान कार्ड वालों की फ़्री कोरोना जांच होगी, लेकिन 2 करोड़ परिवार इस लिस्ट से ही ग़ायब!

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर किया है. कहा है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY – वही आयुष्मान भारत वाली स्कीम) के तहत आने वाले देश के 10.74 करोड़ परिवारों की कोरोनावायरस की जांच सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार की जा सकती है. लेकिन वहीं एक इंटरनल नोट है. इंटरनल नोट मतलब विभाग और मंत्रालय के बीच हुई बातचीत. जो बाहर न जाए. ये नोट कह रहा है कि देश के 2 करोड़ परिवारों का नाम PMJAY में है ही नहीं.

नोट किसका? नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) का. ख़बर छापी है Indian Express ने. बताया है कि ये नोट कहता है कि PMJAY के लिए अर्ह यानी एलिजिबल 2 करोड़ परिवार लिस्ट में नहीं हैं. एक परिवार में 5 सदस्यों के औसत से गिनें, तो ये संख्या ही जाती है लगभग 10 करोड़ लोगों की.

सोमवार को ICMR द्वारा सुप्रीम कोर्ट में सरकार का हलफ़नामा दायर किया गया था. कहा गया कि PMJAY का लाभ पाने वाले लोगों को बस अपना PMJAY कार्ड दिखाना होगा. इसके बाद प्राइवेट लैब्स में कोरोना की टेस्टिंग बिलकुल मुफ़्त होगी.

NHA की वेबसाइट की मानें तो दावा है. 12.45 करोड़ परिवार हैं PMJAY में. लेकिन इधर सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने गिनाए 10.74 करोड़ परिवार. यानी लगभग दो करोड़ परिवार ग़ायब हैं लिस्ट से. 

जनगणना की वजह से हुई दिक़्क़त?

PMJAY में किन परिवारों को जगह दी जाएगी, इसे 2011 में जातीय और आर्थिक आधार पर की गयी जनगणना के आधार पर तय किया गया. लेकिन सूत्र बताते हैं कि लगभग एक दशक पुरानी हो चुकी इस जनगणना की वजह से ही ये दिक्कतें हुई हैं.

2011 की जनगणना के आधार पर ये टारगेट तय किया गया था कि 47.28 करोड़ लोगों को चिन्हित किया जाएगा. लेकिन इस स्कीम के आधार पर महज़ 3.83 करोड़ परिवारों को ही चिन्हित किया जा सका. तो 12.45 करोड़ में से बचे हुए परिवारों को शामिल कैसे किया गया. छोटी स्कीमों और राज्य स्तर की स्कीमों के सहारे. मसलन, 4.68 करोड़ राज्यों द्वारा चलाई गयी योजनाओं से. राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना से 65 लाख लोग आए. 1.4 करोड़ मध्य प्रदेश के समग्र पोर्टल के ज़रिए. और इंटरनल नोट कहता है कि 2011 की जनगणना वाले हिस्से में से लगभग 2 करोड़ परिवार ग़ायब हैं. 

और क्या कहा गया नोट में? कहा गया,

“चूंकि 2011 की जनगणना बहुत पुरानी हो चुकी है, इस वजह से लगभग सभी राज्यों ने कहा कई वाजिब और योग्य परिवार इस लिस्ट में से ग़ायब हैं. 2011 वाले आंकड़ों का जब राज्यों ने सत्यापन किया, तो कोई भी राज्य 75 प्रतिशत से ज़्यादा परिवार की पहचान कर पाने में नाकाम रहा.”

राज्यों ने कहा गया कि कई गांवों और कई समूहों को 2011 के आंकड़ों से ग़ायब कर दिया गया. NHA को कई राज्यों से लेटर भी मिला. शिकायत थी. जनगणना में हुई गड़बड़ की वजह से इन राज्यों के इलाक़े ग़ायब हो गए. 

किन राज्यों में PMJAY के कितने लोग मिले?

बानगी भर है. यूपी का लक्ष्य था 6.47 करोड़ परिवारों को खोज निकालने का. 89.66 लाख ही मिले. बिहार के 5.55 करोड़ के लक्ष्य में से मिले महज़ 53.28 लाख. छत्तीसगढ़ में लक्ष्य था 1.52 करोड़ का. मिल सके 8.35 लाख. 

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि केरल जैसे राज्यों ने अपने ख़ुद के डेटा का इस्तेमाल PMJAY के लाभार्थियों का चयन करने के लिए किया है. जबकि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना ने तो अपने यहां PMJAY को लागू करने से इंकार कर दिया. दिल्ली का लम्बे समय तक इंकार था. आयुष्मान भारत का दिल्ली में लागू न होना 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव का एक मुद्दा भी था. लेकिन चुनाव जीतने के बाद दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने घोषणा की है कि PMJAY लागू करेंगे. मतलब आयुष्मान भारत पर रस्साकशी अब बंद.

गड़बड़ी और भी है

NHA के इंटरनल नोट में कहा गया है कि 2011 वाले आंकड़े के आधार पर लोगों के सर्वे में दिक़्क़त हुई है. कई सारे परिवारों को एक ही परिवार में शामिल कर दिया गया है. लोगों के नाम डेटाबेस में ग़लत चढ़े हैं. राजस्थान और जम्मू-कश्मीर ने कहा कि उन्होंने बहुत मेहनत की, लेकिन PMJAY के लाभार्थियों तक नहीं पहुँच सके. कारण वही? बेसिक डेटा – वही 2011 वाला – ही थोड़ा गड़बड़ निकला.

लेकिन जानकार कहते हैं कि इस गड़बड़ी का ये मतलब नहीं है कि इतने लोगों के टेस्ट नहीं होंगे. आंकड़े लगभग एक दशक पुराने हैं. और PMJAY और आयुष्मान भारत योजना आए हैं साल 2018 में. ऐसे में ये भी सम्भव है कि जब परिवारों को चिन्हित करना शुरू किया गया, उस समय तक बहुत सारे परिवार योग्यता के खांचे से बाहर चले गए होंगे. साथ में एरर यानी त्रुटिपूर्ण गिनती हुई, ये बात भी है ही. 


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