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राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर को कांग्रेस के वक्त मिला था डिफेंस ऑफसेट कॉन्ट्रेक्ट!

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राहुल गांधी का एक नया विवाद सामने आया है. आरोप है कि मनमोहन सरकार के दौर में राहुल गांधी के एक पूर्व बिजनेस पार्टनर को फायदा पहुंचाया गया. यूपीए-2 यानी मनमोहन सिंह की सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौर में राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस सहयोगी यूलरिक मैकनाइट को एक रक्षा सौदे में ऑफसेट कांन्ट्रेक्ट दिया गया. ऑफसेट कान्ट्रेक्ट के तहत किसी कंपनी को किसी सौदे के एक तय अंश का उत्पादन करने की इजाजत मिलती है. राहुल गांधी के बिजनेस सहयोगी का ये पूरा मामला क्या है? आइए समझते हैं. इस पूरे मामले को समझने के लिए पहले राहुल गांधी और यूलरिक मैकनाइट के संबंध को समझना जरूरी है.

राहुल गांधी और यूलरिक मैकनाइट के बीच क्या संबंध है?
इंडिया टुडे के रिपोर्टर अंकित कुमार की एक रिपोर्ट के मुताबिक राहुल गांधी और ब्रिटेन के एक नागरिक यूलरिक मैकनाइट मिलकर एक कंपनी चलाते थे. नाम था बैकोप्स लिमिटेड. ये कंपनी ब्रिटेन में बनी थी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस कंपनी के को-प्रमोटर थे. राहुल इस कंपनी में डायरेक्टर के साथ सेक्रेटरी भी थे. कंपनी में राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65 फीसदी थी. और यूलरिक मैकनाइट की हिस्सेदारी 35 फीसदी. बैकोप्स लिमिटेड साल 2003 में शुरू की गई. इसने करीब छह साल तक काम किया. इस कंपनी को 2009 में खत्म कर दिया गया.

कंपनी खत्म कर दी, फिर किस बात का बवंडर?
राहुल गांधी और यूलरिक मैकनाइट ने अपनी ब्रिटेन की कंपनी तो बंद कर दी. मगर असल खेल शुरू हुआ उसके बाद. उस वक्त देश में कांग्रेस की सरकार थी. साल 2009 में ही देश में दोबारा चुनाव हुए और मनमोहन सिंह दोबारा प्रधानमंत्री बने. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2011 में यूलरिक मैकनाइट की सहयोगी कंपनी को फ्रांसीसी कंपनी नेवल ग्रुप से स्कॉर्पियन सबमरीन का ऑफसेट कॉन्ट्रैक्ट मिल गया. फ्रांस का नेवल ग्रुप रक्षा सामान की सप्लाई करता है. नेवल ग्रुप को भारत में 6 पनडुब्बी सप्लाई करने का ठेका मिला है.

ये ऑफसेट कांट्रेक्ट क्या बवाल है?
रक्षा सौदों में आमतौर पर एक ऑफसेट एग्रीमेंट या समझौता भी होता है. जब भी किसी देश की सरकार किसी विदेशी कंपनी को ऑर्डर देती है तो ऑफसेट एग्रीमेंट की मांग करती है. ऑफसेट डील के पीछे मांग की वजह ये होती है. कि डील की रकम का कुछ फायदा घरेलू कंपनियों को भी हो. जैसे रफाल सौदे में अनिल अंबानी का रिलायंस ग्रुप ऑफसेट पार्टनर है. रिलायंस दसॉ एविएशन के लोकल सप्लायर के तौर पर काम करेगी. माना जाता है कि इसके जरिए टोटल डील की रकम का कुछ हिस्सा रिलायंस डिफेंस लिमिटेड के जरिए भारत आएगा. इससे फायदा ये होगा कि लोगों को रोजगार मिलेगा.
स्कॉर्पियन पनडुब्बी के मामले में भी ऐसा ही हुआ. यूलरिक मैकनाइट की सहयोगी कंपनियों को ऑफसेट पार्टनर के तौर पर चुना गया. ठीक वैसे ही जैसे रफाल के मामले में अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को चुना गया है.

स्कॉर्पियन सबमरीन. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.
स्कॉर्पियन सबमरीन. फाइल फोटो. इंडिया टुडे.

इस मामले का खुलासा कब हुआ?
इंडिया टुडे के मुताबिक यूलरिक मैकनाइट की सहयोगी कंपनियों को मिले इस सौदे का खुलासा उस वक्त हुआ, जब राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर घमासान छिड़ा था. असल में राहुल गांधी की नागरिकता को लेकर भाजपा सांसद सुब्रहम्ण्यन स्वामी ने गृह मंत्रालय में एक शिकायत की थी. इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक हैं. ये शिकायत बैकोप्स लिमिटेड कंपनी के दस्तावेजों में दर्ज राहुल गांधी के पते के हवाले से की गई है. बैकोप्स लिमिटेड के डायरेक्टर के तौर पर राहुल गांधी ने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया है. इसके बाद इस केस के दूसरे दस्तावेज इंडिया टुडे के हाथ लगे.

अमित शाह ने क्या कहा?
बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस मुद्दे पर तंज कसते हुए लिखा, ‘राहुल गांधी के मिडास टच (जादुई शक्त) के सामने कुछ मुश्किल नहीं है.’

राहुल गांधी ने क्या जवाब दिया?
राहुल गांधी ने पूरे मसले पर जवाब दिया है. इंडिया टुडे के मुताबिक राहुल ने कहा है कि ‘सबकुछ सार्वजनिक है और मैंने कुछ गलत नहीं किया है. आप जो चाहे जांच कर लो, कोई कार्रवाई कर लो, मुझे कोई दिक्कत नहीं है क्योंकि मुझे पता है मैंने कुछ गलत नहीं किया है. पर राफेल की जांच भी होनी चाहिेए.’

इंडिया टुडे के मुताबिक दस्तावेजों से क्या निकला अब तक?
1-दस्तावेजों से साफ है. कि राहुल गांधी ने ब्रिटेन में बैकोप्स लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई थी.
2-कंपनी में यूलरिक मैकनाइट नाम के शख्स को पार्टनर बनाया गया था.
3-राहुल गांधी और मैकनाइट दोनों ही कंपनी के संस्थापक डायरेक्टर थे.
4-जून 2005 तक इस कंपनी में राहुल गांधी की हिस्सेदारी 65 फीसदी और मैकनाइट की हिस्सेदारी 35 फीसदी थी.
5-साल 2004 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने चुनावी हलफनामा बैकोप्स यूरोप की चल संपत्ति का जिक्र किया था.
6-इस चल संपत्ति में बैकोप्स यूरोप के तीन बैंक अकाउंट में जमा धनराशि भी शामिल थी.
7-ये कंपनी फरवरी 2009 में बंद कर दी गई थी.

एक और कंपनी में राहुल-प्रियंका साथ-साथ
इंडिया टुडे के मुताबिक राहुल गांधी बैकोप्स कंपनी के नाम की दूसरी कंपनी यानी बैकोप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड से भी जुड़े रहे. इस कंपनी में उनकी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा भी डायरेक्टर थीं. राहुल गांधी ने अपने साल 2004 के चुनावी हलफनामे में घोषित किया था कि भारतीय कंपनी बैकोप्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड में उनकी 83 फीसदी हिस्सेदारी है. राहुल गांधी ने अपने चुनावी हलफनामे में ये भी बताया था कि उन्होंने इस कंपनी में 2 लाख 50 हजार रुपए का निवेश किया है. ये कंपनी साल 2002 में बनाई गई थी. बाद में इसे भी बंद कर दिया गया. इस कंपनी ने अपना अंतिम रिटर्न जून 2010 में दाखिल किया था.

राहुल के बिजनेस पार्टनर को कैसे पहुंचा फायदा
#अब सबसे अहम सवाल. राहुल के बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट और उनकी बाद में बनाई गई दूसरी कंपनियों को फायदा कैसे पहुंचा? इंडिया टुडे के मुताबिक साल 2011 में ऑफसेट सौदे के तहत फ्रांस की नेवल ग्रुप ने विशाखापत्तनम स्थित कंपनी फ्लैश फोर्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक डील साइन की थी. नेवल ग्रुप को पहले DCNS के नाम से जाना जाता था.

#ये डील स्कॉर्पियन सबमरीन के अहम कलपुर्जों की सप्लाई करने के लिए की गई थी. इन स्कॉर्पियन सबमरीन का निर्माण मुंबई के मझगांव डॉक लिमिटेड (MDL) में किया जा रहा था. फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप को MDL के साथ मिलकर 6 स्कॉर्पियन सबमरीन बनाने की डील मिली थी. ये डील करीब 20,000 करोड़ रुपए की थी.

#साल 2011 में भारतीय कंपनी फ्लैश फोर्ज ने ब्रिटेन की ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड का अधिग्रहण किया. इसके बाद अगले साल नंबर 2012 में फ्लैश फोर्ज कंपनी के दो डायरेक्टरों को ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड में डायरेक्टरशिप दे दी गई थी. 8 नवंबर 2012 को इन दोनों ने डायरेक्टरशिप का भार संभाल लिया. इसके साथ ही यूलरिक मैकनाइट को भी ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड का डायरेक्टर बना दिया गया. इतना ही नहीं, साल 2014 में ऑप्टिकल आर्मर्ड लिमिटेड की ओर से दाखिल रिटर्न के मुताबिक कंपनी ने यूलरिक मैकनाइट को 4.9 फीसदी शेयर भी अलॉट कर दिए थे.

#इसके बाद साल 2013 में फ्लैश फोर्ज ने ब्रिटेन की एक दूसरी कंपनी ‘कंपोजिट रेसिन डेवलपमेंट लिमिटेड’ का अधिग्रहण कर लिया. राहुल के पूर्व बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट को इस दूसरी कंपनी का भी डायरेक्टर बना दिया गया. मैकनाइट के साथ फ्लैश फोर्ज लिमिटेड के दो डायरेक्टर को भी ‘कंपोजिट रेसिन डेवलपमेंट लिमिटेड’ का डायरेक्टर बनाया गया.

#फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप की वेबसाइट्स ने फ्लैश फोर्ज और सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड को भारतीय पार्टनर बताया है. सीएफएफ फ्लूइड कंट्रोल प्राइवेट लिमिटेड, फ्लैश फोर्ज और फ्रांसीसी कंपनी कोयार्ड का ज्वाइंट वेंचर है. इंडिया टुडे के मुताबिक अभी तक इस संबंध में मैकनाइट से किसी तरह का कोई संपर्क नहीं हो पाया है.

#फ्रांस की कंपनी नेवल ग्रुप के फ्लैश फोर्ज से कॉन्ट्रैक्ट करने से पहले राहुल गांधी की भारतीय और यूरोपीय कंपनियां बंद कर दी गई थीं. इन सबके बीच, राहुल गांधी के पूर्व बिजनेस पार्टनर यूलरिक मैकनाइट को यूरोपीय कंपनियों के जरिए फायदा पहुंचाने का आरोप है.


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