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शाहजहांपुर रेप केस : पीड़िता के बाप ने बताया कि योगी सरकार कैसे चिन्मयानंद को बचा रही है

स्वामी चिन्मयानंद. पूर्व भाजपा सांसद. पूर्व केन्द्रीय मंत्री. बलात्कार और यौन शोषण के आरोप में फंसे हुए हैं. अभी पीजीआई लखनऊ में इलाज चल रहा है. डॉक्टरों का कहना है कि शायद दिल में कोई दिक्कत है. इसके उलट रेप का आरोप लगाने वाली छात्रा गिरफ्त में है. 14 दिनों की न्यायिक हिरासत. उस पर ये आरोप हैं कि उसने चिन्मयानंद को धमकी दी और पांच करोड़ रूपए रंगदारी के लिए मांगे.

मामले की जांच कर रही SIT का भी कहना है कि पीड़िता ने स्वामी चिन्मयानंद से पैसे मांगे, इस आरोप के तहत केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत हैं. इसके बाद पीड़िता के पिता मीडिया में आए, और कहा कि उनकी बेटी को इसलिए गिरफ्तार किया गया है ताकि उस पर दबाव डाला जा सके.

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में पीड़िता के पिता ने कहा कि पुलिस के पास छात्रा के खिलाफ बेहद ही कम सबूत हैं. और पुलिस स्वामी चिन्मयानंद को बचाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा,

“SIT ने मेरी बेटी को झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया है. उसके खिलाफ कोई भी सबूत नहीं हैं. मेरी बेटी का रंगदारी वाले मामले से कुछ लेना देना नहीं है. अपने स्टेटमेंट में मेरी बेटी ने कोई भी जुर्म नहीं कबूला है, लेकिन SIT मीडिया में झूठ फैला रही है.”

इस मामले की 23 वर्षीय पीड़िता को SIT ने बुधवार को गिरफ्तार किया था. चिन्मयानंद के वकील ओम सिंह ने मुकदमा दायर किया था कि तीन लोगों ने इस मामले में स्वामी चिन्मयानंद से पैसे उगाहने की कोशिश की है.

पीड़िता के पिता ने कहा,

“हमें अब पक्का भरोसा है कि SIT राज्य सरकार के निर्देशों पर काम कर रही है. पहले दिन से ही वे चिन्मयानंद को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. उनके खिलाफ सबूत होने और मेरी बेटी के बयान के बावजूद, चिन्मयानंद के खिलाफ रेप की धारा में कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया.”

उन्होंने ये भी कहा कि राज्य सरकार के निर्देशों के SIT उनके ऊपर दबाव बनाना चाह रही है, ताकि वे चिन्मयानन्द के खिलाफ अपना केस छोड़ दें.

पीड़िता के पिता का आरोप है कि उनकी बेटी को तब रोका गया जब वो अग्रिम ज़मानत के लिए कोर्ट जा रही थी.

“SIT ने कोर्ट से थोड़ी ही दूरी पर मेरी बेटी को रोक लिया. वो उसे अपने साथ ले जाना चाह रहे थे. मेरी बेटी ने मुझे फोन किया. और मैं तुरंत कुछ वकीलों के साथ मौके पर पहुंच गया.”

वहीं पीड़िता के भाई ने कहा है कि जब SIT ने पीड़िता को गिरफ्तार किया तो सभी से ये कहा गया कि अधिकारियों की टीम सभी से बात करना चाहती है.

“वो लोग घर आए तो कहा कि वे पीड़िता से कुछ बातें करना चाहते हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद हमें बताया गया कि वे उसे गिरफ्तार कर रहे हैं. जब मेरी बहन ने मना किया और कहा कि साथ नहीं जाएगी, तो अधिकारियों ने खींचकर उसे गाड़ी में बिठा लिया और लेते गए.”

इस मामले में चिन्मयानंद की गिरफ्तारी 20 सितम्बर को हुई थी. चिन्मयानंद की गिरफ्तारी के साथ ही SIT ने तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन पर चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने के आरोप थे. गिरफ्तारी के बाद से ही चिन्मयानंद पीजीआई लखनऊ में डॉक्टरों की देखरेख में हैं.

SIT की भूमिका पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?

मामले की जांच कर रही SIT की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. SIT ने चिन्मयानंद के खिलाफ सीधे-सीधे आईपीसी की धारा 376 में मामला दर्ज न करके धारा 376C के तहत मामला दर्ज किया. जो सीधे-सीधे बलात्कार की धारा नहीं है. बल्कि शोषण से जुड़ी हुई धारा है. इस धारा के अंतर्गत अधिकतम 6 साल की कैद हो सकती है, जिसे 10 साल तक बढ़ाया जा सकता है. इस धारा के अंतर्गत अभियुक्त को कुछ जुर्माना भी देना पड़ सकता है. ऐसा कहा जा रहा है कि SIT अभी भी चिन्मयानंद को बचाने का प्रयास कर रही है, जिस वजह से पीड़िता को नामज़द किया गया है और चिन्मयानंद को बलात्कार की धाराओं में नहीं नामज़द किया गया है.

जब चिन्मयानंद को गिरफ्तार किया गया तो दो सवाल उठाए जा रहे हैं. पहला सवाल तो यही कि चिन्मयानंद के खिलाफ 376 के अधीन मामला न दर्ज करके, 376C के अधीन क्यों दर्ज किया गया? क्योंकि ये एक ऐसी धारा है, जो रेप से सीधे सम्बंधित नहीं है. और आरोप सिद्ध हो जाने पर भी उतनी कठोर सज़ा नहीं मिलती, जितनी बलात्कार के आरोप में मिलती है. 376C के कुछ मामलों में ज़मानत भी मिलने की खबरें आती रही हैं.

इस मामले में दूसरा सवाल ये उठता है कि गिरफ्तारी के बाद जब चिन्मयानंद को अदालत में पेश किया गया तो SIT ने पूछताछ के लिए चिन्मयानंद की कस्टडी क्यों नहीं मांगी? अमूमन ऐसा देखा गया है कि जब मामले की जांच हो रही होती है तो पुलिस या जांच एजेंसी आरोपी से पूछताछ करती है. और इस पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड मांगी जाती है. इस बार ऐसा नहीं हुआ. कोर्ट ने जब चिन्मयानंद को जुडिशल कस्टडी के लिए भेजा गया तो SIT ने कोई आपत्ति नहीं की.

ऐसे प्रश्नों के तहत यूपी सरकार और SIT की जांच की दिशा पर सवाल उठते रहे हैं. योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहले भी चिन्मयानंद के खिलाफ दिए जांच के आदेश वापिस ले लिए थे.

स्वामी चिन्मयानंद के साथ योगी आदित्यनाथ. यूपी सरकार पर आरोप है कि मुख्यमंत्री से करीबी की वजह से चिन्मयानंद को बचाया जा रहा है.
स्वामी चिन्मयानंद के साथ योगी आदित्यनाथ. यूपी सरकार पर आरोप है कि मुख्यमंत्री से करीबी की वजह से चिन्मयानंद को बचाया जा रहा है.

साल 2011. एक महिला ने आरोप लगाया कि चिन्मयानंद ने उसका अपहरण किया और हरिद्वार के आश्रम में उस महिला का बलात्कार किया. चिन्मयानंद पर केस दर्ज हुआ. साल 2018 में यूपी सरकार ने बाकायदा आरोप वापिस लेने के लिए पत्र लिखा. सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह ने तभी मीडिया को संबोधित करके कहा था कि सरकार ने केस हटाने का निर्णय लिया है. उन्होंने कहा था,

“अगर किसी को इस पर आपत्ति है, तो वो अदालत में इसे चुनौती दे सकता है.”

इस पत्र और बयान के बाद ये बात सामने आई कि योगी आदित्यनाथ से करीबी के कारण प्रशासन ने उनको बचाने की कोशिश की है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस मामले की पीड़िता ने राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस, यूपी के राज्यपाल, मुख्यमंत्री और जिला जज को कई पत्र लिखे थे. इंडिया टुडे के मुताबिक़, अपने एक पत्र में पीड़िता ने ये भी लिखा था कि फरवरी 2018 में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शाहजहांपुर आए थे. उन्होंने 25 फरवरी को स्वामी चिन्मयानंद के घर खाना खाया था. इसके कुछ ही दिनों के बाद 6 मार्च को यूपी सरकार ने पत्र जारी करके कहा कि स्वामी चिन्मयानंद पर से केस वापिस लिया जाए.


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