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छत्तीसगढ़ कांग्रेस के विधायकों का यह झगड़ा भूपेश बघेल सरकार के लिए संकट बनेगा?

पंजाब और राजस्थान के बाद अब छत्तीसगढ़ कांग्रेस में भी कलह के संकेत साफ दिखने लगे हैं. यहां एक विधायक बृहस्पति सिंह के काफिले पर हमले का मामला तूल पकड़ता दिख रहा है. छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार में स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव पर विधायक बृहस्पति सिंह पर हमला कराने के आरोप लगे हैं. वहीं, इसे लेकर टीएस सिंहदेव इतने नाराज हुए कि अपनी ही सरकार के खिलाफ होते दिखाई दिए. मंगलवार 27 जुलाई को उन्होंने विधानसभा सत्र बीच में छोड़ दिया और सदन से बाहर निकल गए. इस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और पार्टी आलाकमान ने कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया है.

टीएस सिंहदेव का सदन से वॉकआउट

टीएस सिंहदेव छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री हैं. वे रामानुजगंज से कांग्रेस विधायक बृहस्पति सिंह के काफिले पर कथित तौर पर हुए हमले के विरोध में कांग्रेस सरकार के खिलाफ मुखर नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा है कि जब तक सरकार कांग्रेस विधायक पर हुए हमले के मामले में जांच का आदेश या बयान नहीं देती, तब तक वह इस प्रतिष्ठित सदन का हिस्सा नहीं बनेंगे. यह कहने के साथ ही टीएस सिंह विधानसभा से वॉकआउट कर गए.

इससे पहले सोमवार 26 जुलाई यानी छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन भाजपा ने इस घटना को लेकर बघेल सरकार को घेरा. विपक्षी दल ने इस मामले में सदन की कमेटी से जांच कराने की मांग की. 27 जुलाई को राज्य के गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने इस मामले में सदन में एक बयान भी दिया. हालांकि भाजपा इससे संतुष्ट नहीं हुई. उसने कहा कि इस जवाब में स्वास्थ्य मंत्री पर लगे आरोपों का जिक्र नहीं है. इसी के बाद सिंहदेव ने कहा कि उनकी छवि के बारे में सभी लोग जानते हैं. यह कहकर सिंहदेव सदन से बाहर निकल गए.

Bhupesh Baghel
छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल. (तस्वीर- पीटीआई)

इससे पहले मीडिया ने जब सिंहदेव से विधायक बृहस्पति सिंह के लगाए आरोपों को लेकर सवाल किए तो उन्होंने कहा,

“मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता. यह उनकी भावना हो सकती है. मेरे बाप-दादाओं ने क्या किया यह तो जनता ही बता सकती है. मेरे बारे में सभी लोग जानते हैं. मुझे अलग से कुछ कहने की आवश्यकता नहीं है. अगर विधायक आपस में मिल रहे हैं तो अच्छा है. मेल जोल तो अच्छी बात है.”

रमन सिंह ने क्या कहा?

भाजपा नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने इस घटना को लेकर भूपेश बघेल सरकार को घेरा है. उनका कहना है,

“पिछले ढाई साल में यह सरकार पूरी तरह विफल रही है. सरकार का मंत्री, सरकार के प्रति अविश्वास प्रकट करता है और कहता है कि जब तक मुझे संतोषजनक जवाब नहीं मिलेगा तब तक मैं विधानसभा में कदम नहीं रखूंगा. एक मंत्री को जब सरकार से उम्मीद नहीं है तो राज्य के 2.7 करोड़ लोग कैसे सरकार पर भरोसा करें.”

रमन सिंह ने कहा कि भाजपा की मांग है कि सदन में दिए गए बयानों पर विधानसभा और छत्तीसगढ़ की जनता के सामने स्पष्टीकरण पेश किया जाए. इससे पहले 26 जुलाई को उन्होंने ट्वीट किया-

“कांग्रेस दल नहीं- दलदल है! टीएस सिंहदेव और बृहस्पति सिंह समेत अन्य विधायकों की खींचतान से यह साबित हो गया है कि विधायक दल का नेता होने के नाते भूपेश बघेल से न विधायक संभल रहे हैं, न ही छत्तीसगढ़. वह कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस सरकार दोनों चलाने में अक्षम और असफल हैं.”

कहां से शुरू हुआ था विवाद?

दरअसल, विधायक बृहस्पति सिंह का आरोप है कि शनिवार 24 जुलाई की शाम उनके काफिले पर हमला किया गया. इसके पीछे उन्होंने टीएस सिंहदेव का नाम लिया. दावा किया कि एक कार्यक्रम के लिए अंबिकापुर जाते समय ‘टीएस बाबा’ (यानी टीएस सिंहदेव) के एक रिश्तेदार ने उनकी गाड़ियों का पीछा किया और ड्राइवर से चाबी तक छीन ली. बृहस्पति सिंह का कहना है,

“गाड़ी में तोड़फोड़ की गई. वह लगातार मेरे लिए पूछता रहा, लेकिन मैं पहले ही निकल चुका था.”

बृहस्पति सिंह ने दावा किया कि टीएस सिंहदेव से उनकी जान को खतरा है. उन्होंने कहा,

“क्या कोई आदिवासी विधायक पर हमला कराकर सीएम बन सकता है? अगर वह सोचते हैं कि 4-5 विधायकों की हत्या कराकर वह सीएम बन जाएंगे तो उन्हें मेरी शुभकामनाएं. मुझे आशंका है कि वह हमला कराने की जगह मेरी हत्या भी करा सकते हैं. मैं सोनिया गांधी और राहुल गांधी से उन्हें बाहर निकालने की अपील करता हूं.”

“मैंने सोचा कि मेरी गलती क्या है. फिर मुझे याद आया कि पिछले महीने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान मैंने कहा था कि छत्तीसगढ़ के सीएम का फैसला आलाकमान करेगा… मैंने तो बस इतना ही कहा था. तब से वह (टीएस सिंहदेव) कॉल का जवाब नहीं देते, उनके लोग साजिश रचते हैं.”

कौन हैं टीएस सिंहदेव?

टीएस सिंहदेव का पूरा नाम त्रिभुवनेश्वर सरन सिंह देव है. 2008, 2013 और 2018 में अंबिकापुर सीट से विधायकी का चुनाव जीते हैं. सरगुजा राज परिवार से ताल्लुक रखते हैं. छत्तीसगढ़ में लोग उन्हें ‘टीएस बाबा’ के नाम से जानते हैं. वे छत्तीसगढ़ के सबसे अमीर विधायक हैं. बताया जाता है कि उनकी संपत्ति 500 करोड़ से भी अधिक है. उनके पिता और दादा भी राजनीति से जुड़ाव रखते थे. पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सिंहदेव को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार माना जा रहा था. लेकिन बाद में कांग्रेस आलाकमान ने उनकी जगह भूपेश बघेल को इस पद के लिए चुना. सिंहदेव फिलहाल छत्तीसगढ़ सरकार में स्वास्थ्यमंत्री हैं.


वीडियो- क्या टीएस सिंहदेव ने चापलूसी करने के लिए राहुल गांधी के पैर छुए?

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