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किसानों के भारत बंद के अगले दिन पंजाब और हरियाणा के लिए मोदी सरकार ने कर दी ये घोषणा

25 सितंबर को किसानों ने देशभर में प्रदर्शन, भारत बंद और चक्काजाम किया. तीन कृषि बिल को लेकर प्रदर्शन अभी भी जारी हैं. अब इसका असर भी देखने को मिला है. केंद्र सरकार ने पंजाब हरियाणा में धान/चावल ‘तुरंत खरीदने’ को मंज़ूरी दी है. धान/चावल के लिए खरीफ मार्केटिंग सीजन (KMS) 2020-21 हर राज्य के लिए अगले हफ्ते से तय था, लेकिन केंद्र सरकार ने इन दो राज्यों में खरीद प्रक्रिया की शुरुआत आज ही यानी 26 सितंबर से करने की इजाज़त दी.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा,

खरीफ मार्केटिंग सीजन सभी राज्यों में एक अक्टूबर, 2020 से तय है और FCI जैसी एजेंसी खरीद संबंधी काम के लिए तैयार हैं. हालांकि पंजाब और हरियाणा की मंडियों में धान के जल्दी आ जाने की वजह से भारत सरकार ने 26 सितंबर, 2020 से खरीद की प्रक्रिया शुरू करने की इजाज़त दी है. इसके लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं.

पंजाब-हरियाणा में सबसे ज्यादा विरोध

इससे पहले तीन कृषि बिल के विरोध का सबसे ज्यादा असर भी पंजाब और हरियाणा में देखने को मिला था. 25 सिंतबर को शिरोमणि अकाली दल समेत कई पार्टियां सड़कों पर उतरीं. रेलवे ट्रैक जाम किए गए. ट्रैक्टर मार्च निकले. देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन हुए.

तीन कृषि बिल क्या हैं?

1. मोदी सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 में संशोधन किया है. इसके जरिए खाद्य पदार्थों की जमाखोरी पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है यानी व्यापारी कितना भी अनाज, दालें, तिलहन, खाद्य तेल वगैरह जमा कर सकते हैं.

2. कृषि उत्पादन व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश, 2020 है. इसका उद्देश्य कृषि उत्पाद विपणन समितियों यानी एपीएमसी मंडियों के बाहर भी कृषि से जुड़े उत्पाद बेचने और खरीदने की व्यवस्था तैयार करना है. यानी सरकार ने वो व्यवस्था खत्म कर दी है जिसमें किसान अपनी उपज APMC मंडियों में लाइसेंसधारी खरीदारों को ही बेच सकते थे.

3. मूल्य आश्वासन पर किसान (बंदोबस्ती और सुरक्षा) समझौता और कृषि सेवा अध्यादेश, 2020, जो कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को कानूनी वैधता प्रदान करता है, ताकि बड़े बिजनेस वाले और कंपनियां कॉन्ट्रैक्ट पर ज़मीन लेकर खेती कर सकें.

हंगामों के बीच तीनों बिल संसद के दोनों सदन से पास हो चुके हैं और राष्ट्रपति के दस्तखत के बाद ये कानून बन जाएंगे. न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और मंडियों के बाहर कृषि उत्पाद बेचने को लेकर किसानों के मन में आशंकाएं बरकरार हैं. हालांकि सरकार ने कहा है कि MSP जारी रहेगी.


जानिए, मोदी सरकार के तीनों कृषि बिल का विरोध क्यों कर रहे हैं किसान?

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