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कोरोना में किल्लत के बीच पीएम मोदी के नए घर को लेकर क्या बवाल हो रहा है?

मोदी सरकार के महत्वाकांक्षी सेंट्र्ल विस्टा प्रोजेक्ट (Central Vista Project) का एक हिस्सा दिसंबर 2022 में बन कर तैयार हो जाएगा. यह हिस्सा है उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आवास का. कोरोना की दूसरी लहर के बीच इस प्रोजेक्ट को आवश्यक सेवाओं के तहत रखा है. पर्यावरण मंत्रालय ने भी निर्माण को लेकर सारी मंजूरी दे दी है. लॉकडाउन की पाबंदियों के दौरान भी इसका काम जारी है. विपक्षी दल इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं.

पीएम आवास दिसंबर 2022 तक बन जाएगा

सेंट्रल विस्टा के तौर पर राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक तकरीबन 3 किलोमीटर में फैला यह प्रोजेक्ट 2024 के आम चुनाव के पहले पूरा किया जाना है. हालांकि प्रोजेक्ट के तहत कुछ इमारतों का निर्माण कार्य अगले साल दिसंबर तक पूरा हो जाएगा. उनमें प्रधानमंत्री आवास भी शामिल है. इसी समयसीमा में प्रधानमंत्री की सुरक्षा में तैनात रहने वाली एसपीजी का मुख्यालय और नौकरशाहों के लिए स्पेशल कॉरिडोर भी पूरा करने का टारगेट है. उप राष्ट्रपति का भवन अगले साल मई तक पूरा हो जाएगा. 3 मई को इस प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी सीपीडब्लूडी (CPWD) ने जानकारी दी कि पर्यावरण मंत्रालय की एक्सपर्ट अप्रेजल कमेटी ने (EAC) 13,450 करोड़ रुपए के सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लिए सभी जरूरी मंजूरी दे दी हैं.

बता दें कि इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक राजपथ के दोनों तरफ के इलाके को सेंट्रल विस्टा कहते हैं. इस पूरे इलाके की लंबाई तीन किलोमीटर के करीब है. राष्ट्रपति भवन, नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक, संसद भवन, रेल भवन, कृषि भवन, निर्माण भवन, रक्षा भवन के अलावा नेशनल म्यूजियम, नेशनल आर्काइव, इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स (IGNCA), उद्योग भवन, बीकानेर हाउस, हैदराबाद हाउस और जवाहर भवन सेंट्रल विस्टा का हिस्सा हैं. इनमें से ज्यादातर इमारतें 1931 से पहले की बनी हैं.

2019 में मिनिस्ट्री ऑफ हाउसिंग एंड अर्बन अफेयर्स प्रस्ताव लेकर आया. इसमें कहा गया कि जगह की कमी पड़ रही है. कई ऑफिस लगभग 100 साल पुराने हैं. कर्मचारी बढ़ते जा रहे हैं.

Central Vista Project
Central Vista (बाएं) रिडेवलपमेंट के बाद कुछ ऐसा दिखेगा (दाएं) तस्वीर-संदीप शंकर-इंडिया टुडे

संकट के बीच काम चालू रखने पर बवाल

सोमवार को जैसे ही पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को क्लियरेंस मिलने की खबर आई सोशल मीडिया पर बवाल शुरू हो गया. विपक्षी दलों सहित कई लोगों ने ऑक्सीजन और अस्पतालों के संकट के बीच सेंट्रल विस्टा पर दिखाई जा रही फुर्ती और शाहखर्ची पर सवाल उठाए.

सीपीआईएम ने सीताराम येचुरी ने ट्वीट किया

यह विचित्र है. ऑक्सीजन और वैक्सीन के लिए कोई पैसा नहीं है. हमारे भाई-बहन ऑक्सीजन और हॉस्पिटल के इंतजार में मर रहे हैं. मोदी अपने अहंकार को पूरा करने के लिए लोगों का पैसा खर्च करेंगे. इस अपराध को रोकें.

पूर्व बीजेपी सांसद और फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के नेता यशवंत सिन्हा ने लिखा,

लोग कोविड से मर रहे हैं लेकिन पीएम की प्राथमिकता सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट है जिसमें हजारों करोड़ रुपये की लागत है. क्या वह पागल है? क्या हमें इसके बजाय अस्पतालों का निर्माण नहीं करना चाहिए? पीएम के रूप में एक अहंकारी को चुनने की देश को कितनी अधिक कीमत चुकानी होगी?

टीवी पर्सनैलिटी सिद्धार्थ बासु ने ट्वीट किया,

ऐसे वक्त में और क्या महत्वपूर्ण हो सकता है जब देश सांस लेने के लिए हांफ रहा हो? कोविड के बीच सरकार ने पीएम के नए घर के लिए समय सीमा तय की है.

विपक्षी दल लंबे समय से दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों में शामिल संसद भवन की जगह नए संसद भवन के निर्माण के औचित्य पर सवाल उठाते रहे हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पिछले हफ्ते ट्वीट कर कहा था कि सेंट्रल विस्टा जरूरी नहीं है, बल्कि महत्वपूर्ण दृष्टिकोण (सेंट्रल विजन) वाली सेंट्रल गवर्नमेंट की जरूरत है. इसके अलावा कई विपक्षी दल कोरोना संकट के वक्त सेंट्रल विस्टा का काम रोक कर सभी संसाधनों को कोरोना संकट से निपटने की बात कहते रहे हैं.


वीडियो – नए सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट में क्या बनेगा, क्या उजाड़ा जाएगा उसकी पूरी जानकारी यहां दे रहे हैं

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