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कोरोनावायरस : आंकड़े की जांच हुई तो पश्चिम बंगाल का सच सामने आ गया!

जैसे-जैसे देश में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं, वैसे पश्चिम बंगाल को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ती जा रही है. राज्य सरकार के कोरोना के केसों को लेकर अपने दावे हैं. वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि पश्चिम बंगाल में कोरोना से होने वाली मौतों का प्रतिशत सबसे ज़्यादा है. बहुत नकार के बाद पश्चिम बंगाल की सरकार ने सोमवार को मान लिया कि राज्य में कोरोना से जुड़े केसों और मौतों की संख्या को रिकार्ड करने में कहीं गड़बड़ी हुई है. इस वजह से बहुत सारे केस दर्ज नहीं किए जा सके हैं. 

सबसे पहले जानिए केंद्र ने क्या कहा?

दो हफ़्तों से केंद्र और राज्य के बीस संघर्ष चल रहा है. ममता सरकार पर आरोप थे कि वो जांच नहीं कर रही है. और कोरोना पॉज़िटिव केसों को छिपा रही है. इसके बाद केंद्र सरकार ने अपने विशेषज्ञों की एक टीम को पहश्चिम बंगाल भेजने का निर्णय लिया. टीम का नाम inter-ministerial central team. IMCT. राज्य की तरफ़ से शुरुआत में विरोध किया गया. बाद में अनुमति मिली. टीम हावड़ा, कोलकाता और दूसरे शहरों में गई. कहा कि देश में कोरोना से मृत्यु की दर पश्चिम बंगाल में सबसे ज़्यादा है. लगभग 12.8 प्रतिशत. विशेषज्ञों ने कहा कि बंगाल में टेस्टिंग बहुत कम हो रही है, कोरोना के इलाक़ों में सर्विलांस भी बेहद कमज़ोर है. साथ ही कोरोना के केसों का ब्यौरा देने में भी भारी अनियमितता बरती जा रही है.

राजीव सिन्हा को दिया गया लेटर. पहला पन्ना.

विशेषज्ञों की इस टीम को रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अपूर्व चंद्रा हेड कर रहे हैं. दो हफ़्तों तक पश्चिम बंगाल का दौरा करने के बाद उन्होंने टीम की फ़ाइंडिंग को राज्य के चीफ सेक्रेटरी राजीव सिन्हा को एक लेटर के साथ सौंपा. लेटर आया मीडिया में. इंडियन एक्सप्रेस के हवाले से बात करें तो अपने लेटर में टीम ने कहा कि राज्य की नौकरशाही का कोरोना को रोकने में बहुत कम सहयोग मिल रहा है. बता दें कि पश्चिम बंगाल में 30 अप्रैल तक 816 कोरोना के केस मिले थे, जबकि मरने वालों की संख्या थी 105. इस संख्या को लेकर विशेषज्ञों की टीम ने गम्भीर रिमार्क दिए हैं.

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राजीव सिन्हा को दिया गया लेटर. दूसरा पन्ना.

ये भी कहा है कि राज्य सरकार की तरफ से ज़ारी की जा रही हेल्थ बुलेटिन में कोरोना केसों की संख्या केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा दिए गए कोरोना केसों की संख्या से बहुत कम है. टीम ने ये भी कहा है कि 1 और 2 मई को जारी हेल्थ बुलेटिन में राज्य सरकार ने संक्रमितों और मृतकों की सूची नहीं जारी की है. राजीव सिन्हा को दिए अपने लेटर में टीम ने कहा,

“राज्य को कोरोना पेशेंट्स की रिपोर्टिंग करने में थोड़ी पारदर्शिता बरतनी होगी. कोरोना के केसों को कम करके दिखाने से कुछ हासिल नहीं होगा.”

टीम ने ये भी कहा कि राज्य ने दावा किया कि बहुत हाई लेवल की नज़र रखी जा रही है. सर्विलांस बहुत कठोर है. लेकिन हमारी टीम को कोई भी डेटा उपलब्ध नहीं कराया गया. लेटर में टीम ने कहा कि हम जितने दिनों तक पश्चिम बंगाल में रुके थे, उतने में लगभग 50 लाख लोगों का सर्वे हो जाना चाहिए. लेकिन बहुत कम आशा है कि ऐसा हुआ हो. कहा है कि पश्चिम बंगाल सरकार के पास दावे हैं, लेकिन उनके पास आंकड़े नहीं हैं.

टीम ने ये भी कहा कि पश्चिम बंगाल में कार्य में बाधा पहुँचायी गयी. बहुत सहयोग नहीं किया गया. 

टीम के आरोपों के अलावा पश्चिम बंगाल सरकार पर पहले भी ICMR के जांच केंद्रों ने सवाल उठाए हैं. कहा है कि राज्य सरकार जांच के लिए सैम्पल नहीं भेज रही है. साथ ही पश्चिम बंगाल सरकार ने comorbidity यानी कोरोना के साथ ही जुड़ी किसी अन्य बीमारी से मृत्यु के केसों को कोरोना से हुई मौतों के आकड़ों में शामिल नहीं किया है. इस पर भी सवाल उठ रहे हैं. 

सरकार पर उठे आरोपों पर केंद्र सरकार ने क्या कहा?

राजीव सिन्हा ने टीम द्वारा दिए गए लेटर के बारे में कहा कि उन्हें बहुत जानकारी नहीं है क्योंकि वे लेटर पढ़ नहीं सके हैं. पूरी जानकारी मिलने पर ही कुछ कहेंगे. लेकिन NDTV में छपी ख़बर की मानें तो केंद्र द्वारा Comorbidity के केसों को भी कोरोना से हुई मौतों में शामिल करने को उन्होंने ग़लत क़दम माना. उन्होंने कहा,

“हम दो तरह के आंकड़े नहीं देंगे. मौतों का हम सिर्फ़ एक आंकड़ा देंगे. हमारे लिए सिर्फ़ कोरोना से हुई मौत का आंकड़ा ही ज़रूरी है. दूसरी वजहों से हुई मौतों को इन मौतों से अलग रखा जाएगा.”

उन्होंने बताया कि अस्पतालों तक को कहा गया है कि Comorbidity के आकड़ों को राज्य सरकार को दिया ही न जाए. क्योंकि राज्य सरकार की नज़र में ये मौतें कोरोना से नहीं हुई हैं. कहा कि बीते तीन दिन आंकड़े हमारे सामने नहीं आ सके हैं. ऐसा प्राइवट अस्पतालों और कुछ गड़बड़ियों की वजह से हुआ है. ऐसा जानबूझकर नहीं किया गया. राजीव सिन्हा ने भरोसा दिलाने की कोशिश की कि इस गड़बड़ी को सुधार लिया गया है. अब राज्य से कोरोना के आंकड़े लगातार आते रहेंगे.

सोमवार यानी 4 मई को अपनी प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में राजीव सिन्हा ने उलटा केंद्र पर आरोप लगाए. कहा कि लॉकडाउन में छूट का जो तरीक़ा केंद्र सरकार ने बताया है, वो ग़लत है. फिर भी पश्चिम बंगाल सरकार ने लॉकडाउन में छूट दी है. कंटेन्मेंट ज़ोन में कोई छूट नहीं दी जाएगी. ये भी कहा है. स्टैंडअलोन दुकानें खोलने का आदेश आया हुआ है. शराब की दुकानें भी खुल रही हैं. 


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