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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से हुई कमाई में 5 करोड़ से ज्यादा गायब हो गए!

गुजरात का नर्मदा ज़िला. यहां के केवड़िया में दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है. नाम है- ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’. ये देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा है. पिछले दिनों खबर आई थी कि टूरिस्ट्स की संख्या के मामले में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने अमेरिका की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को भी पीछे छोड़ दिया है. हालांकि, अब इससे जुड़ी एक बुरी खबर आई है.

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (SoU) के टिकट और पार्किंग से होने वाली कमाई में करीब पांच करोड़ 25 लाख रुपये का घपला हो गया है. ‘इंडिया टुडे’ के नरेंद्र पेपरवाला की रिपोर्ट के मुताबिक, SoU का अकाउंट HDFC बैंक में है. बैंक ने एक प्राइवेट कंपनी के ऊपर पैसों के गबन का आरोप लगाए हैं. कंपनी का नाम है- राइटर बिज़नेस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Writer Business Services Private Limited). बैंक का कहना है कि ये गबन अक्टूबर 2018 से मार्च 2020 के बीच हुआ.

क्या है पूरा मामला, तसल्ली से जानते हैं-

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देखने के लिए टिकट लगता है और पार्किंग चार्जेस भी अलग से लगते हैं. इनसे जो पैसे आते हैं, उसके कलेक्शन का ज़िम्मा है HDFC बैंक पर. यानी ये बैंक SoU प्रशासन को रोज़ाना आने वाले कैश के कलेक्शन की सर्विस देता है. और इस कैश को अपनी वडोदरा ब्रांच में SoU प्रशासन के अकाउंट में जमा करवाता है. और इस पूरे काम के लिए HDFC बैंक ने राइटर बिज़नेस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को लगा रखा है, जो कि एक निजी कंपनी है. ये कंपनी ही SoU प्रशासन से ऑफलाइन टिकट और पार्किंग के ज़रिए इकट्ठा होने वाला पैसा डेली बेसिस पर लेती थी और HDFC बैंक में SoU के अकाउंट में जमा करवाती थी.

फिर गबन का मामला कैसे सामने आया?

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, SoU के एक अधिकारी ने बताया कि बैंक जब कैश रिसीव करता है, तो SoU प्रशासन को रसीद जारी की जाती है. और फिर समय-समय पर इन रसीदों का बैंक में कैश डिपॉज़िट की एंट्रीज़ से मेल-मिलाप किया जाता है, किसी तरह की कोई गड़बड़ी तो नहीं है, ये देखने के लिए. अधिकारी ने बताया कि कोविड-19 की वजह से लगी पाबंदियां जब हटाई गईं, तब रसीद और कैश डिपॉज़िट एंट्रीज़ का मेल-मिलाप करने के दौरान गड़बड़ी मिली. SoU ने पाया कि राइटर बिजनेस ने बैंक की ओर से जो रसीद उन्हें दी थीं, वो असल डिपॉज़िट एंट्रीज़ से अलग थीं. अधिकारी ने कहा,

“5.25 करोड़ रुपए का अमाउंट गायब था, हालांकि हमारे पास जो रसीद हैं, उनसे ये पता चल रहा है कि HDFC बैंक के एजेंट ने पैसे हैंड ओवर किए थे. एजेंट्स SoU प्रशासन को जो रसीद देते थे, वो HDFC के लेटरहेड पर होती थी. हमने जब पैसों की गड़बड़ी पाई तो HDFC बैंक को इसके बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने जांच शुरू की.”

फिर, HDFC बैंक ने सोमवार यानी 30 नवंबर को राइटर बिजनेस पर 5.25 करोड़ रुपए की गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए केवड़िया पुलिस थाने में केस दर्ज करवाया.

ज़िला प्रशासन क्या कहता है?

नर्मदा ज़िले के कलेक्टर हैं डीए शाह, जो स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के CEO भी हैं. उनका कहना है कि इस कथित चोरी के मामले में एक कमिटी बनाई गई है, जिनमें ज़िला प्रशासन, HDFC बैंक, SoU प्रशासन के आधिकारिक सदस्य शामिल हैं. कलेक्टर का कहना है,

“SoU प्रशासन से कैश कलेक्शन और बैंक अकाउंट में इसे डिपॉज़िट कराने के लिए HDFC बैंक ने राइटर सेफगार्ड प्राइवेट लिमिटेड को लगा रखा था. ये पूरी तरह से उनकी आंतरिक व्यवस्था थी. और इससे SoU प्रशासन का कोई लेनादेना नहीं है. इसलिए इस पूरी ट्रांजैक्शन प्रोसेस के लिए HDFC बैंक ही ज़िम्मेदार है. कमिटी की मीटिंग हुई और छानबीन की गई. और ये बात सामने आई कि कैश वास्तव में बैंक को सौंप दिया गया था. इसलिए, इसलिए, समझौते के अनुसार, बैंक ने ब्याज के साथ SoU के खाते में राशि जमा की थी. अब वो अपने एजेंट के साथ अपना विवाद खुद हल करेंगे.”

पुलिस क्या कहती है?

केवड़िया डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) हैं वाणी दुधत. उनका कहना है कि SoU प्रशासन ने बड़ी संख्या में डेली रसीद और ट्रांजेक्शन स्लिप पुलिस को सौंपी है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है.

राइटर बिज़नेस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के स्टाफ के खिलाफ IPC की कई धाराओं के खिलाफ केस दर्ज हुआ है. इनमें धारा 406 (विश्वास का आपराधिक उल्लंघन), 407 (वाहक द्वारा विश्वास का आपराधिक उल्लंघन), 409 (पब्लिक सर्वेंट, या बैंकर या व्यापारी या एजेंट द्वारा विश्वास का आपराधिक उल्लंघन), 420 (धोखा और बेईमानी), 418 (ये जानते हुए कि बेइमानी से व्यक्ति को नुकसान हो सकता है, चीटिंग करना) और 120 (बी) (क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी) के तहत केस दर्ज हुआ है.


वीडियो देखें: टाइम मैगजीन में आई इंडिया की इस एक जगह पर पीएम मोदी क्या बोले?

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