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CAB विरोध: असम में पुलिस की फायरिंग से दो की मौत, कर्फ़्यू मान नहीं रही है भीड़

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सिटिज़नशिप अमेंडमेंट बिल (CAB) पर बिफरे असम में हालात बदतर होते जा रहे हैं. ख़बरों के मुताबिक, पुलिस की फायरिंग से वहां दो लोगों की मौत हो गई है. मृतकों के नाम हैं- दीपांजल दास (उम्र, 21 साल) और सैम स्टेफॉर्ड (उम्र, 32 साल). दर्ज़नों लोगों के घायल होने की ख़बर है. घायलों में से एक को गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज के ICU में रखा गया है. उनकी हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है. असम के गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ में कर्फ़्यू है. मगर इससे हालात संभले नहीं हैं. बड़े इलाके में कर्फ़्यू का कोई असर नहीं दिख रहा. भीड़ कर्फ़्यू का उल्लंघन कर सड़कों पर उतर रही है. हज़ारों लोग सड़कों पर हैं. हिंसा लगातार जारी है. ख़बर है कि 13 दिसंबर को CRPF की कुछ और कंपनियां असम भेजी जाएंगी. सेना को 11 सितंबर की शाम ही बुला लिया गया था.

BJP विधायकों के घरों पर हमला
12 दिसंबर को असम में प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने दो BJP विधायकों के घर पर हमला किया. ये दोनों MLA हैं- प्रशांत फुकान और बिनोद हजारिका. शोनितपुर के बेहाली में असम के हैंडलूम मंत्री रंजीत दत्त के घर पर भी प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने हमला किया. असम में कई जगहों से सुरक्षाबलों और पुलिस के साथ प्रोटेस्टर्स के भिड़ने की ख़बरें आई हैं. पुलिस ने भीड़ पर काबू पाने और उन्हें तितर-बितर करने के लिए कई जगहों पर लाठीचार्ज किया. आंसू गैस भी छोड़ी गई. रबर बुलेट्स का भी इस्तेमाल हो रहा है. भीड़ ने यहां दो रेलवे स्टेशनों में भी तोड़-फोड़ और आगजनी की. वहां रेल सेवाएं फिलहाल रोक दी गई हैं. बस अड्डों, सरकारी और निजी वाहनों को भी निशाना बनाया जा रहा है. कई सरकारी दफ़्तरों में तोड़-फोड़ और आगजनी किए जाने की रिपोर्ट्स हैं.

असम के स्पीकर ने कहा- नफ़रत बढ़ेगी इस बिल से
न्यूज़ एजेंसी PTI के मुताबिक, जोरहाट से BJP के विधायक और असम विधानसभा के स्पीकर हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने अपनी ही पार्टी के स्टैंड का विरोध किया. BJP और राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल बार-बार कह रहे हैं कि लोग जिन शंकाओं के आधार पर CAB का विरोध कर रहे हैं, वो बेबुनियाद हैं. मगर हितेंद्र नाथ गोस्वामी ने कहा है-

इस बिल (CAB 2019) से जुड़ी लोगों की शंकाएं कतई निराधार नहीं हैं. बल्कि बहुत मज़बूत आशंका है कि ये लोगों को बांटेगी. अलग-अलग समुदायों के बीच नफ़रत बढ़ेगी इसकी वजह से.

त्रिपुरा: हालात ख़राब, इंटरनेट-SMS सर्विस बंद
त्रिपुरा में भी विरोध प्रदर्शन काफी उग्र हैं. वहां 11 दिसंबर से ही मोबाइल इंटरनेट और SMS सेवाएं बंद हैं. त्रिपुरा में भी रेल सेवाएं बंद कर दी गई हैं. हमलों के मद्देनज़र रेलवे स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

मेघालय: कुछ जगहों पर कर्फ़्यू, पूरे राज्य में मोबाइल इंटरनेट और SMS बंद
मेघालय की राजधानी शिलांग के भी कुछ इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ़्यू लगा दिया गया है. 12 दिसंबर की शाम पांच बजे से अगले 48 घंटों के लिए पूरे मेघालय में मोबाइल इंटरनेट और SMS सेवाएं बंद कर दी गई हैं. ख़बर आई कि मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा को गृह मंत्री अमित शाह से मिलना था. मगर ये मीटिंग हो नहीं सकी. उन्हें और उनके कैबिनेट सहयोगियों को गुवाहाटी हवाईअड्डे से दिल्ली के लिए विमान लेना था. मगर असम में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और हिंसा की वजह से वे लोग एयरपोर्ट पहुंच ही नहीं सके.

तनाव लगातार बढ़ता गया
CAB पर असम समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. पिछले कई दिनों से चल रहा ये विरोध और उग्र, और बड़ा, और हिंसक होता जा रहा है. 9 दिसंबर को लोकसभा में इस बिल के पास होने के बाद से हालात लगातार बिगड़े हैं. 10 दिसंबर को नागालैंड के अलावा बाकी के सभी पूर्वोत्तर राज्यों में 11 घंटे का बंद था. इस बंद के साथ-ही-साथ कई लेफ़्ट संगठनों और स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन्स ने असम में अलग से 12 घंटे का एक बंद भी बुलाया था. इस दिन भी काफी तनाव रहा वहां. पुलिस और प्रदर्शनकारियों की कई जगहों पर भिड़ंत हुई. 11 दिसंबर को CAB राज्यसभा में पास हुआ. इसके साथ ही पूर्वोत्तर के विरोध प्रदर्शनों में और विस्तार आया. शाम तक गुवाहाटी समेत कई इलाकों में सेना तैनात करनी पड़ी. गुवाहाटी में बेमियादी कर्फ़्यू लगा दिया गया.10 ज़िलों में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया. 12 दिसंबर को हालात और बिगड़े. कई इलाकों में ब्रॉडबैंड सर्विस भी बंद कर दी गई है. गुवाहाटी के साथ-साथ डिब्रूगढ़ में भी कर्फ़्यू लागू है. प्रदर्शनों में शामिल कुछ संगठनों के नेताओं को गिरफ़्तार किए जाने की भी ख़बरें आई हैं.

मोदी ने ट्विटर और चुनावी रैली से असम को आश्वासन दिया
12 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके असम के लोगों को CAB पर परेशान न होने की अपील की. लिखा कि उनकी संस्कृति, उनके हितों की रक्षा के लिए सरकार प्रतिबद्ध है. विपक्ष समेत कई लोगों ने PM की आलोचना करते हुए कहा कि जिन इलाकों में सबसे चिंताजनक हालात हैं, वहां तो इंटरनेट बंद है. ऐसे में ट्विटर पर आश्वासन देने का क्या फ़ायदा होगा? वैसे झारखंड की अपनी चुनावी रैलियों में भी प्रधानमंत्री ने असम के लोगों को भरोसा दिलाया. उनसे शांत बनाए रखने की अपील की. उधर असम के राज्यपाल जगदीश मुखी और मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने भी लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की.

सरकार पर ‘असम अकॉर्ड’ के उल्लंघन का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक CAB रद्द नहीं होता, वापस नहीं लिया जाता, तब तक वो विरोध ख़त्म नहीं करेंगे. एक बड़ा मुद्दा ‘असम अकॉर्ड’ का है. ये एक समझौता था, जो अगस्त 1985 में भारत सरकार, असम सरकार, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) और ऑल असम गण संग्राम परिषद (AAGSP) के बीच हुआ था. इस समझौते के साथ ही बांग्लादेश से आए घुसपैठियों और शरणार्थियों समेत संस्कृति, असमिया पहचान जैसे मुद्दों पर साल 1979 में शुरू किया गया AASU का छह साल लंबा चला विरोध प्रदर्शन ख़त्म हुआ. इस समझौते के अंदर ख़ास फोकस था असम के अंदर रह रहे विदेशी मूल के लोगों का.

‘असम अकॉर्ड’ की ख़ास बातें
इस समझौते में तय हुआ कि 1 जनवरी, 1966 से पहले असम आए सभी लोग, वो भी जिनका नाम 1967 के चुनावों की मतदाता लिस्ट में था, उन्हें रेगुलराइज़ किया जाएगा. इसके साथ ही वो विदेशी जो 1 जनवरी, 1966 से लेकर 24 मार्च, 1971 तक असम में आए, उनकी ‘द फॉरेनर्स ऐक्ट, 1946’ और ‘द फॉरेनर्स ट्राइब्यूनल्स ऑर्डर, 1964’ के तहत पहचान की जाएगी. और उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाएंगे. ऐसे तमाम लोगों को चाहिए होगा कि वो जहां रह रहे हैं, उस ज़िले के पंजीकरण अधिकारियों के आगे ‘द रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स ऐक्ट, 1939’ और ‘द रजिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेनर्स रूल्स, 1939’ के नियमों और प्रावधानों के मुताबिक अपना रजिस्ट्रेशन करवाएं. विदेशी के तौर पर उनकी पहचान किए जाने की तारीख़ से 10 साल बाद ऐसे तमाम लोग जिनके नाम मतदाता सूची से हटाए गए, वापस रिस्टोर कर दिए जाएंगे.

जिन्हें पहले ही बाहर निकाल दिया गया था और वो वापस ग़ैरक़ानूनी और अवैध तरीके से दोबारा असम में घुस आए हैं, उन्हें फिर से बाहर निकाल दिया जाएगा. इस समझौते में ये बात भी दर्ज़ हुई कि 25 मार्च, 1971 को या इसके बाद असम में आए लोगों की पहचान और उनके नाम मतदाता सूची से हटाने का काम जारी रहेगा. और ऐसे तमाम विदेशियों को बाहर निकालने के ज़रूरी हर व्यावहारिक कदम उठाया जाएगा. इधर CAB 2019 के मुताबिक, 31 दिसंबर 2014 तक बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान से भारत आने वाले ग़ैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी जाएगी.

CAB 2019 का विरोध कर रहे असम के लोग और संगठन आरोप लगा रहे हैं कि ये बिल ‘असम अकॉर्ड’ का उल्लंघन है. उनका कहना है कि इस बिल की वजह से असम और बाकी के पूर्वोत्तर राज्यों में बांग्लादेशी घुसपैठियों की बाढ़ आ जाएगी. इस वजह से असम के लोगों की संस्कृति, उनकी भाषा ख़तरे में आ जाएगी. वो अपनी ही ज़मीन पर अल्पसंख्यक हो जाएंगे. बांग्ला भाषा और उनका तौर-तरीका असम पर हावी हो जाएगा. इस बिल में प्रावधान है कि उत्तरपूर्व के जिन इलाकों में इनर लाइन परमिट (ILP) लागू है और जो हिस्से सिक्स्थ शेड्यूल में आते हैं, वहां ये बिल लागू नहीं होगा.


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