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यूपीः भाजपा नेताओं ने हिस्ट्रीशीटर को पुलिस की गिरफ्त से छुड़ाकर भगा दिया, पुलिस अब तक तलाश रही है

उत्तर प्रदेश का कानपुर शहर. 2 जून बुधवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे पुलिस एक हिस्ट्रीशीटर को गिरफ्तार करने के लिए एक कार्यक्रम में छापा मारती है. पुलिस उस हिस्ट्रीशीटर को जीप में बिठाकर निकलने ही वाली थी कि भीड़ ने पुलिस जीप को घेर लिया. हिस्ट्रीशीटर को छुड़ाकर भगा दिया. हैरान करने वाली बात ये है कि इस घटना के आरोपियों में बीजेपी के दो बड़े नेताओं का नाम सामने आ रहा है. जिन लोगों ने हिस्ट्रीशीटर को छुड़ाया, उनमें बीजेपी के कार्यकर्ता भी बताए जा रहे हैं. आइए जानते हैं पूरा मामला क्या है.

पुलिस ने गैंगस्टर पकड़ा, भीड़ ने छुड़ाया

मनोज सिंह. वॉन्टेड अपराधी है. कानपुर पुलिस को लंबे वक्त से इसकी तलाश है. आजतक के मुताबिक, 2 जून की दोपहर पुलिस को भनक लगी कि मनोज सिंह शहर के नौबस्ता थाना क्षेत्र में पार्टी कर रहा है. कोरोना काल में भी यहां के उस्मानपुर में एक निजी गेस्टहाउस में पार्टी चल रही थी. पार्टी भाजपा के दक्षिण जिला मंत्री नारायण सिंह भदौरिया के जन्मदिन की. इसी पार्टी में हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह भी पहुंचा था.

पार्टी शबाब पर थी कि पुलिस आ धमकी. पार्टी में मौजूद अपराधी मनोज सिंह को गिरफ्तार कर लिया, और साथ लेकर जाने लगी. पुलिस उसे पार्टी हॉल से बाहर ले आई. अपनी जीप में बैठा लिया. आरोप है कि तभी बीजेपी नेता नारायण सिंह भदौरिया अपने समर्थकों के साथ तमतमाते हुए वहां आ गए. लोगों की भीड़ ने पुलिस जीप को घेर लिया. पुलिसवालों के साथ बहस करने लगे. वो लोग मनोज सिंह को छोड़ने की मांग कर रहे थे, लेकिन पुलिस तैयार नहीं थी.

आरोप है कि भीड़ में शामिल बीजेपी नेता और उनके समर्थकों ने हाइवे पर हंगामा करना शुरू कर दिया. पुलिस उन्हें समझाने की कोशिश करने लगी. लेकिन लोग भड़क गए और पुलिस से ही भिड़ गए. धक्का मुक्की होने लगी. इसी बीच, लोगों ने जीप में बैठे हिस्ट्रीशीटर को उतारकर वहां से भगा दिया. भीड़ के आगे पुलिसवाले बेबस और लाचार नजर आए. इस पूरी घटना का वीडियो वायरल है.

हिस्ट्रीशीटर पर 34 केस दर्ज हैं

जिस हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को पुलिस से छुड़ाया गया, उस पर कई गंभीर मामले दर्ज हैं. हत्या, हत्या के प्रयास, लूट और बलात्कार जैसे 34 संगीन मामले. वह बर्रा थाने के टॉप 10 अपराधियों में है. पुलिस फिलहाल मनोज सिंह को वसूली के एक मामले में तलाश रही थी. मनोज पर रंजीत सिंह नाम के लड़के को वसूली के चलते बुरी तरह पीटने का आरोप है. हिस्ट्रीशीटर को भगाने में भाजपा के जिस नेता नारायण सिंह भदौरिया का नाम आ रहा है, उनका भी आपराधिक इतिहास है. नारायण सिंह के खिलाफ IPC की धारा 307, 308 जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं. दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, लखनऊ की सीजेएम कोर्ट ने कुर्की का आदेश जारी कर रखा है.  नारायण सिंह 2017 में लखनऊ में हुए जानलेवा हमले के एक मामले में भी आरोपी हैं.

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बीजेपी नेता नारायण सिंह भदौरिया के खिलाफ दर्ज मामले. (फोटो-आजतक)
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मनोज सिंह की हिस्ट्रीशीट (फोटो-आजतक)

 

पुलिस के पोस्टर में बीजेपी नेता भी

हिस्ट्रीशीटर को छुड़ाने के मामले में कानपुर पुलिस ने वीडियो के आधार पर कई लोगों की पहचान की है. इनके खिलाफ नामजद मामला दर्ज किया गया है. बाकियों की पहचान के लिए पुलिस ने लोगों से मदद मांगी है. पुलिस उपायुक्त, दक्षिण जोन, रवीना त्यागी ने सार्वजानिक अपील करते हुए कहा कि

‘वांछित और इनामी अपराधी मनोज को पुलिस कस्टडी से छुड़ाए जाने के प्रकरण में पुलिस को कई वीडियो मिले हैं. इनमें से 7 अभियुक्तों की पहचान कर चिन्हित कर लिया गया है. बाकी अभियुक्तों के फोटो जारी किए जा रहे हैं. यदि किसी को इनके बारे में कोई जानकारी हो तो इन नम्बरों पर सूचना दें : 9454401458, 9454403741.’

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कानपुर में जिन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया है, पुलिस ने उनके पोस्टर जारी किए हैं.
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कानपुर पुलिस ने जो तस्वीरें जारी कीं, उनमें बीजेपी नेता नारायण सिंह भदौरिया (राइट) भी है. (फोटो-आजतक)

 

पहले FIR में BJP नेताओं का नाम नहीं था

इस पूरे मामले में सत्ताधारी पार्टी बीजेपी के साथ-साथ कानपुर पुलिस भी सवालों के घेरे में आई. हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को छुड़ाने के मामले में जो शुरुआती FIR दर्ज की गई, उसमें नारायण सिंह भदौरिया का नाम नहीं था. ये तब, जबकि मनोज सिंह को पुलिस ने भदौरिया की बर्थडे पार्टी से ही उठाया था. इसके अलावा, पुलिस शुरुआत में बीजेपी नेता को लेकर बयान देने से भी बचती नजर आई. लेकिन जब सोशल मीडिया पर मामले ने तूल पकड़ा, तो पुलिस ने नारायण सिंह भदौरिया के खिलाफ FIR दर्ज की. देखिए वो शुरुआती FIR, जिसमें भदौरिया का नाम नहीं है. इस मामले में बीजेपी के एक और बड़े नेता का नाम आ रहा है. भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवबीर सिंह भदौरिया भी उस भीड़ में शामिल थे, जिसने मनोज सिंह को पुलिस से छुड़ाया. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में वह भी साफ नजर आ रहे हैं. इसके बावजूद पुलिस ने उनका नाम न तो शुरुआती FIR में शामिल किया, न ही उन लोगों में जिनके पोस्टर जारी किए गए हैं. हमने इस मामले पर नौबस्ता थानाध्यक्ष सतीश कुमार से बात की, उनका कहना था कि

जब मामले की शुरुआती जानकारी आई थी, तब काफी भीड़ के कारण कई लोगों की पहचान नहीं हो पाई थी. इस वजह से शुरुआती FIR में कई नाम नहीं डाले गए. जैसे-जैसे तस्वीरों में लोगों की पहचान हुई, उन्हें नामजद कर दिया गया. हमने नारायण सिंह भदौरिया के अलावा शिवबीर सिंह भदौरिया को भी नामजद कर लिया है. दोनों की तलाश में दबिश डाली जा रही है. जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. 

शिवबीर सिंह भदौरिया को लेकर द लल्लनटॉप ने भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष यादव से बात की. उन्होंने पूरे मामले से ही अनिभिज्ञता जता दी. उन्होंने कहा-

मुझे इस मामले की कोई जानकारी नहीं है कि कहां क्या हुआ है. मैं जानकारी लेता हूं. अगर कोई कार्रवाई होगी तो आपको सूचित कर दिया जाएगा.

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हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को पुलिस से छुड़ाकर भगाने का जो वीडियो वायरल है, उसमें भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवबीर सिंह भदौरिया भी नजर आ रहे हैं. (फोटो-आजतक)

इस पूरे मामले पर बीजेपी की जिलाध्यक्ष डॉक्टर वीना आर्य ने दो दिन में दो अलग-अलग बयान दिए. 2 जून को उन्होंने आजतक से फोन पर बातचीत में कहा था कि मामले में पार्टी जांच कर रही है, उसके बाद कार्यवाही होगी. उन्होंने मनोज सिंह को छुड़ाने वालों में करणी सेना के लोगों का हाथ होने के भी आरोप लगाए. लेकिन 3 जून को वीना आर्य ने ही नारायण सिंह भदौरिया को पद से हटा दिया. इस बारे में उनका कहना था कि घटना की डिटेल्स देखकर जिला मंत्री को पद से हटाया गया है. आगे जांच के लिए तीन लोगों की कमेटी बनाई गई है.

‘कौन किस पार्टी से, पुलिस को फर्क नहीं’

पुलिस फिलहाल मामले के आरोपियों की पहचान कर उनकी तलाश करने की बात कह रही है. एडीसीपी (दक्षिण) बसंतलाल ने आजतक से कहा कि पुलिस हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने पहुंची थी. जिसे कुछ लोगों ने पुलिस की गिरफ्त से भगा दिया. घटना को अंजाम देने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है. कानपुर के पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने बताया-

आरोपियों की शिनाख्त कर ली गई है. आरोपियों की धरपकड़ के लिए 7 टीमें बनाकर लगातार दबिश दी जा रही है. कौन किस पार्टी का है और क्या व्यवसाय करता है, इससे पुलिस की कार्रवाई पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी. नारायण सिंह भदौरिया भी गिरफ्तार होंगे. फिलहाल वह फरार हैं.

 

 

नारायण सिंह भदौरिया का क्या कहना है?

पुलिस की छापेमारी के बीच नारायण सिंह भदौरिया ने एक वीडियो जारी करके अपनी सफाई दी है. इसमें उन्होंने बताया कि 2 जून को मेरा जन्मदिन था. मेरे कुछ वकील दोस्तों ने पार्टी का आयोजन किया था. मैं उसमें शामिल होने के लिए दोपहर तकरीबन 12.30 बजे आकर्षक गेस्ट हाउस पहुंचा था.

भदौरिया ने आगे बताया कि मुझे कुछ देर बाद पता चला कि 4 लोग एक लड़के को उठाकर ले जा रहे हैं. मैंने देखा कि मारुति सेलेरियो गाड़ी में कुछ लोग एक लड़के को डाल रहे थे. मैंने इसका कारण पूछा कि क्या मामला है, तो उन्होंने बताया कि वह पुलिस से हैं. मैंने उनका आईकार्ड मांगा. उन्होंने आईकार्ड नहीं दिखाया, और लड़के को पिस्टल लगा दी. तभी नौबस्ता थाने की जीप आ गई. उसमें भी कोई अधिकारी नहीं था. वही लोग उस लड़के को जीप में डालने लगे. मैंने कहा कि क्या ऐसा करने का कोई वारंट है? ऐसे में वह लड़का चिल्लाकर बोला कि मेरा संदीप ठाकुर नाम के एक हिस्ट्रीशीटर से विवाद है. ये उसी के लोग हैं. मैंने कहा कि मेरी आप इंस्पेक्टर या किसी जिम्मेदार अधिकारी से बात कराइए. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.

पुलिस हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह के साथ बीजेपी पदाधिकारी नारायण सिंह भदौरिया की गिरफ्तारी के लिए भी छापे मार रही है. मनोज सिंह पर 25 हजार का इनाम भी घोषित कर दिया है. देखने वाली बात ये होगी कि पुलिस कब तक इन लोगों तक पहुंचती है, और क्या कार्रवाई करती है.


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