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क्या BJP ने 44 'एंटी-BJP' फेसबुक पेज रिपोर्ट किए थे, जिनमें से 14 डिलीट हो गए?

अप्रैल-मई 2019 में लोकसभा चुनाव हुए थे. उसके कुछ महीने पहले, यानी जनवरी 2019 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 44 फेसबुक पेज की एक लिस्ट फेसबुक इंडिया के सामने रखी थी. ‘दी इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ये 44 फेसबुक पेज बीजेपी के खिलाफ लिखते थे. पार्टी ने इन पर ‘मानकों का उल्लंघन’ और ‘फैक्ट्स के अनुरूप’ काम नहीं करने के आरोप लगाए थे और इन्हें रिपोर्ट किया था. 31 अगस्त, 2020 के दिन की अगर बात करें, तो इनमें से 14 फेसबुक पेज अब अस्तित्व में नहीं हैं. यानी वो फेसबुक से हट चुके हैं.

कौन-से पेज रिपोर्ट हुए?

BJP ने जिन 44 फेसबुक पेज को रिपोर्ट किया था, उनमें भीम आर्मी की सटायर साइट ‘वी हेट BJP’ का आधिकारिक अकाउंट, कांग्रेस को सपोर्ट करने वाले अन-ऑफिशियल पेज और ‘दी ट्रुथ ऑफ गुजरात’ नाम के फेसबुक पेज शामिल हैं, ये ज्यादातर ‘अल्ट न्यूज़’ की फैक्ट चेक स्टोरीज़ को शेयर करते हैं. ये अभी फेसबुक में मौजूद हैं.

जो 14 पेज इस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटे हैं, उनमें रवीश कुमार और विनोद दुआ के समर्थन में चलने वाली साइट्स शामिल हैं.

फेसबुक से 17 अकाउंट्स की बहाली पर भी बात हुई

पिछले साल नवंबर में BJP ने फेसबुक इंडिया से 17 अकाउंट्स को बहाल, यानी दोबारा शुरू करने को भी कहा था. साथ ही दो वेबसाइट को ‘मोनेटाइज़’ करने की भी बात कही थी. ये वेबसाइट हैं- ‘दी चौपाल’ और ‘ओपइंडिया’. मोनेटाइज़िंग का मतलब, पेज को उनके कंटेंट पर विज्ञापन रेवेन्यू मिलना.

‘दी इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, वो सभी 17 पेज फेसबुक पर वापस आ चुके हैं. फेसबुक ने बीजेपी IT सेल के हेड अमित मालवीय से कहा कि वो सभी पेज ‘गलती से’ हटा दिए गए थे.

वहीं ‘दी चौपाल’ के फाउंडर विकास पांडे का कहना है कि मार्च 2019 के बाद से उनकी साइट को मोनेटाइज़ेशन की परमिशन नहीं दी गई है. ‘ओपइंडिया’ ने सवालों के जवाब नहीं दिए.

सभी 17 पेज क्या पोस्ट करते हैं?

रिपोर्ट के मुताबिक, BJP की रिक्वेस्ट पर बहाल हुए सभी 17 फेसबुक पेज, इस वक्त पोस्टकार्ड न्यूज़ के कंटेंट शेयर कर रहे हैं. ज्यादातर ये कन्नड़ भाषा में होते हैं. इनमें से कोई भी पेज सीधे किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़े होने का लेबल नहीं रखते.

इन 17 में से एक पेज ने पोस्टकार्ड न्यूज़ फाउंडर महेश वी हेगड़े का नाम लिया था. महेश को मार्च 2018 में बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया था. ‘फेक न्यूज़’ फैलाकर सांप्रदायिक तनाव फैलाने के आरोप में. बेंगलुरु पुलिस ने जांच की, ये देखने के लिए कि कहीं महेश का कनेक्शन किसी बीजेपी नेता के साथ तो नहीं है. हालांकि कोर्ट में महेश को बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने रिप्रेजेंट किया. फेसबुक ने जुलाई 2018 में पोस्टकार्ड न्यूज़ का आधिकारिक पेज प्लेटफॉर्म से हटा दिया था. हालांकि अभी वाले मुद्दे पर महेश से कमेंट करने की रिक्वेस्ट की गई थी, उन्होंने कुछ नहीं कहा इस पर.

कब और कैसे हुई बातचीत?

‘दी इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, फेसबुक इंडिया पब्लिक पॉलिसी एक्जीक्यूटिव अंखी दास और शिवनाथ ठुकराल और अमित मालवीय के बीच ईमेल्स के ज़रिए बातचीत हुई थी. हालांकि इस मामले में अंखी दास और ठुकराल ने कमेंट करने से मना कर दिया है.

फरवरी 2019 के ईमेल में अमित मालवीय ने एक मीटिंग का ज़िक्र किया है, जिस मीटिंग में फेसबुक इंडिया और उनके बीच BJP की तरफ झुकाव वाले फेसबुक अकाउंट्स की ‘शील्डिंग’ को लेकर बातचीत हुई थी. मालवीय ने ‘दी इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि जनवरी 2019 में हुई मीटिंग में ठुकराल ने उन्हें एक सुझाव दिया था. ये कि वो (अमित) उन पेज को एड्रेस करें, जिनके लिए BJP को लगता है कि उन्हें (पेज) ‘गलत तरीके से टारगेट’ किया गया है. अमित मालवीय कहते हैं,

“कई तरह के पेज थे, जैसे ‘आई सपोर्ट नरेंद्र मोदी’ और बाकी कई बड़े पेज, जिन्हें वॉलिंटियर्स चला रहे थे. उन्हें डर था कि इन्हें हटा न दिया जाए. हमने बीते समय में फेसबुक से बात की थी और कहा था कि वो सही चीज़ ही करें. वो तो मुश्किल से ही हमें जवाब देते हैं. हम एक अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष प्रणाली की मांग कर रहे थे. जाहिर है, उन्होंने अन्यथा सोचा.”

रिपोर्ट के मुताबिक, इन पेज की ‘शील्डिंग’ को लेकर अमित मालवीय ने नवंबर 2019 में फेसबुक को एक रिमाइंडर भेजा. उन्होंने आठ पेज की एक लिस्ट भेजी, जिनमें से कुछ BJP को सपोर्ट करने वाले बड़े पेज थे. हालांकि इनमें से कोई भी आधिकारिक तौर पर फेसबुक में पार्टी से जुड़ा हुआ नहीं था. लेकिन इन पेज में ‘दी चौपाल’ और ‘PMO इंडिया: रिपोर्ट कार्ड’ शामिल थे.

फेसबुक क्या कहता है?

इस मुद्दे पर फेसबुक के एक प्रवक्ता ने कहा कि ‘शील्डिंग’ जैसा शब्द है ही नहीं. उन्होंने कहा,

“यहां ‘शील्डिंग’ जैसा कोई शब्द ही नहीं है. (शील्डिंग यानी बचाना या ढाल बनना). हमारे पास एक प्रोसेस है, जिसे क्रॉस-चेक कहा जाता है. ये एक ऐसा सिस्टम है, जो गलतियां कम करने में मदद करता है. इसको ऐसे इस्तेमाल करते हैं कि कुछ पेज या प्रोफाइल से आने वाले कंटेंट को दो बार रिव्यू किया जाए, ताकि हम ये सुनिश्चित कर सकें कि हमारी नीतियों का ठीक से पालन किया गया है या नहीं. अगर हमारे सामुदायिक मानकों का उल्लंघन पाया जाता है, तो उन पर लिए जाने वाले एक्शन को ये रोकता नहीं है.”

जब ये पूछा गया कि क्या पब्लिक पॉलिसी का कंटेंट को लेकर किए गए फैसलों में कोई इनपुट होता है, इस पर फेसबुक प्रवक्ता ने कहा कि पब्लिक पॉलिसी का इनपुट तभी होता है, जब कंटेंट के लिए नामित की गई पॉलिसी टीम, बाकी टीमों को भी लाने का फैसला करती है. आगे कहा कि पब्लिक पॉलिसी टीम, जिनमें पॉलिटिक्स और गवर्नमेंट आउटरीच के सदस्य भी शामिल हैं, वो 2019 के चुनावों के दौरान सभी राजनीतिक दलों के लिए संपर्क का पहला पॉइंट थी.

फेसबुक इंडिया पर गंभीर आरोप लगे थे

हाल ही में अमरीका के मशहूर अख़बार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) में एक रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी. लिखने वाले न्यूली पुर्नेल और जेफ़ हॉर्विट्स थे. इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि फ़ेसबुक ने कथित रूप से हेट स्पीच देने वाले BJP के नेताओं के खिलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की. ऐसा क्यों? रिपोर्ट ने दावा किया है कि बकौल फ़ेसबुक इंडिया की पॉलिसी हेड अंखी दास, बीजेपी नेताओं के खिलाफ़ ऐक्शन लेने से फ़ेसबुक इंडिया के बिज़नेस पर बुरा असर पड़ सकता है.


वीडियो देखें: पड़ताल: क्या फेसबुक पॉलिसी डायरेक्टर अंखी दास, तिरंगे के डिज़ाइन का केक काट रही हैं?

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