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कांग्रेस-BJP के नेताओं ने शराब की दुकानें खोले जाने के पक्ष में एक अजीब तर्क दिया है!

राजस्थान के तीन नेता हैं. एक BJP के, दूसरे कांग्रेस के, तीसरे कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के. BJP वाले पूर्व विधायक हैं, कांग्रेस वाले और कम्युनिस्ट पार्टी वाले मौजूदा विधायक हैं. तीनों ने राज्य सरकार से अपील की है कि शराब की दुकानें खोल दी जाएं. इसके पीछे तीन-चार तर्क दिए हैं. ये कि अवैध तस्करी रुक जाएगी, नकली शराब पीने से लोग मर रहे हैं, तो उन्हें राहत मिलेगी, राजस्व का नुकसान हो रहा है वगैरह-वगैरह. लेकिन BJP और कांग्रेस वाले नेताओं ने एक और अनोखा तर्क जोड़ा है, जिस पर हमारा ध्यान अटक गया. ये कि शराब पीने से गले का वायरस साफ हो जाएगा और कोरोना पर भी अंकुश लगाएगा. यानी ये वायरस से बचाव के लिए फायदेमंद है.

अब एक-एक करके तीनों नेताओं के बारे में बताते हैं.

पहले नेता- कांग्रेस के भरत सिंह. कोटा के सांगोद से विधायक हैं. इन्होंने सीएम अशोक गहलोत को लेटर लिखा और शराब की दुकानें खुलवाने की मांग की. लेटर में कहा,

‘शराब की दुकानें बंद हैं. इस वजह से आर्थिक घाटे से राज्य सरकार की कमर टूट रही है. वहीं हथकढ़ शराब (गांव में बनी शराब) और शराब का अवैध धंधा भी पनप रहा है. हथकढ़ शराब से लोगों के स्वास्थ्य को खतरा है. लोग बीमार हो रहे हैं. अच्छा होगा कि सरकार शराब की दुकानें खोल दे. पीने वालों का भी फायदा और सरकार को राजस्व मिलेगा. जब कोरोना-19 (लग रहा है कि COVID-19 लिखना चाह रहे थे) का वायरस हाथों को शराब (सैनिटाइज़र) से धोने पर साफ हो सकता है, तो शराब से पीने वाले के गले का वायरस ही साफ होगा. हथकढ़ शराब पीकर जान गंवाने से तो कहीं अच्छा है.’

Bharat Singh Letter
भरत सिंह का लेटर. फोटो- संजय वर्मा.

दूसरे नेता-बीजेपी के भवानी सिंह राजावत. कोटा के लोदपुरा से पूर्व विधायक. इन्होंने लिखा,

‘शराब की दुकानें बंद हैं. मुझे समझ नहीं आता ये तो आज नहीं, सतयुग में भी देवता सोमरस का पान करते थे. आज का शराब पीने वाला आदमी शराब का आदी नहीं है. राजतंत्र में राजा-महाराजा व योद्धा भी सेवन करने के बाद ही जोश और उत्साह के साथ दुश्मन को परास्त कर पाते थे. इसलिए सरकार दोबारा सोचे. ये पेय पदार्थ वायरस को भी रोकेगा और सरकार को रुका हुआ करोड़ों का राजस्व भी अर्जित होगा.’

इन नेता जी ने तो अपने लेटर के सब्जेक्ट में ये तक लिख दिया कि शराब कोरोना वायरस पर अंकुश लगाएगी, इसलिए तत्काल खोले दुकानें. इतना ही नहीं ये तक कह दिया कि जिन लोगों की मौत हो रही है, उनमें से ज्यादातर ऐसे हैं, जिन्होंने कभी शराब नहीं पी, फिर भी मौत हो गई. इस बात के साथ भवानी सिंह ने तर्क दिया,

‘शराब के दुष्प्रभाव का तर्क देने वाले विशेषज्ञ जनता को भी बताएं ये बात. और अगर शराब को इतना ही हानिकारक मानते हैं, तो राज्य में पूरी तरह इसे रोक क्यों नहीं देते?’

Bhawani Singh Rajawat
भवानी सिंह राजावत का लेटर. फोटो- संजय वर्मा.

तीसरे नेता- बलवान पूनिया. कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के. भादरा के विधायक हैं. इन्होंने लेटर में लिखा,

‘शराब की दुकानें बंद हैं, ऐसे में अवैध शराब का कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है. राजस्व नुकसान के साथ शराब माफिया भी बढ़ रहे हैं. ज़हरीली शराब से लोगों को नुकसान भी हो रहा है. इसलिए दुकानें खोल दीजिए.’

Balwan Poonia Letter
बलवान पूनिया का लेटर. फोटो- शरत कुमार.

सरकार का जवाब

‘आज तक’ से जुड़े शरत कुमार ने बताया कि इन लेटर्स पर अभी तक सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया है.

डॉक्टर्स क्या कहते हैं?

क्या शराब सच में कोरोना वायरस या कोई भी वायरस को मार देगी? जवाब जानने के लिए हमने BHU में माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार गुलाटी से बात की. उन्होंने कहा,

‘ये सब मिथ है. ऐसा कुछ नहीं है. जब कोई शराब पिएगा, तो जाहिर-सी बात है कि वायरस गले से सीधे उसके शरीर पर पहुंच जाएगा. तो ये जो बात कही जा रही है कि वायरस मर जाएगा, वो केवल एक मिथ है.’

खैर, अब तीनों नेता तो पूरे ज़ोर में हैं कि राज्य में शराब की दुकानें खुल जाएं. इसक लिए उल-जुलूल तर्क भी दे रहे हैं. ध्यान दीजिए, ये तीनों नेता जिन पार्टियों से हैं, वो पार्टियां राजनीति में एक-दूसरे की धुर विरोधी हैं, लेकिन शराब वाले मुद्दे पर सब बढ़िया से साथ में हैं. इसमें कोई मतभेद नहीं है.

अब इन नेताओं को कौन बताए कि लॉकडाउन में केवल ज़रूरत के सामानों की दुकानें खोलने की परमिशन मिली है. शायद पता हो, लेकिन हो सकता है कि इनकी नज़रों में शराब भी ज़रूरत का ही एक सामान हो.

देखिये भारत में कोरोना कहां-कहां और कितना फैल गया है.


वीडियो देखें: नारायणमूर्ति ने बताया, लॉकडाउन फिर से बढ़ाने पर कितना बड़ा नुकसान हो सकता है

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