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दिल्ली के एक चुनाव में 'आप' को हराने के लिए बीजेपी-कांग्रेस मिल गए

अब दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल कह सकेंगे- भाजपा-कांग्रेस मिले हुए हैं जी!.

ऐसा इसलिए क्यूंकि ये ख़बर है अजब-गजब गठबंधन की. भाजपा और कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के बाद गठबंधन कर लिया है.

आप इसे मानेंगे. नहीं?  मान लीजिए क्योंकि ये सच है. विधानसभा और लोकसभा में करारी हार के बाद दिल्ली कांग्रेस के लिए कुछ अच्छा हुआ है. उत्तरी दिल्ली नगर निगम के ज़ोन चुनाव में कांग्रेस ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद पर जीत हासिल की है. लेकिन कांग्रेस की इस जीत में सूत्रधार रही भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी). बीजेपी के मैंबर्स ने आम आदमी पार्टी (AAP) को जीत से रोकने के लिए कांग्रेस कैंडिडेट्स को वोट कर दिया. नतीजा ये हुआ कि सबसे ज्यादा मेंबर होने के बावजूद AAP जीत ना सकी.

आम आदमी पार्टी हैरान है

दरअसल, बुधवार को नार्थ एमसीडी के ज़ोन इलेक्शन में कांग्रेस उम्मीदवारों की जीत ने हर किसी को चौंका दिया. इस चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सीमा ताहिरा ने चेयरमैन और सुलक्षणा ने डिप्टी चैयरमेन के पद पर कब्ज़ा कर लिया. कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों को 9-9 वोट मिले. जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ 6 पार्षदों का ही वोट था. यानी कांग्रेस की जीत में अहम रोल निभाने वाले 3 वोट बीजेपी से मिले. इस ज़ोन में AAP के 8 पार्षद थे. बावजूद इसके, AAP चेयरमैन, डिप्टी चैयरमेन और स्टैंडिंग कमेटी के चुनाव में हार मिली क्योंकि बीजेपी और कांग्रेस ने मिलकर जोन में बहुमत का आंकड़ा हासिल कर लिया.

बीजेपी ने ये गिफ्ट क्यों दिया?

कांग्रेस को एमसीडी में ये जीत बीजेपी ने यूं ही गिफ्ट नहीं की है. दरअसल बीजेपी की नज़र सिटी ज़ोन में पड़ने वाली 4 विधानसभा सीटें चांदनी चौक, मटिया महल, सदर बाजार और बल्लीमारां पर है. इन चारों विधानसभा सीटों पर सिटिंग विधायक आम आदमी पार्टी के हैं. इन मुस्लिम बहुल विधानसभा सीटों में बीजेपी कांग्रेस को मजबूत करना चाहती है. बीजेपी जानती है कि अगर मुस्लिम वोट बैंक में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होगी तो उनके लिए आम आदमी पार्टी को हराना आसान होगा.

नॉर्थ एमसीडी के ज़ोन इलेक्शन में जीते हुए प्रत्याशी.
नॉर्थ एमसीडी के ज़ोन इलेक्शन में जीते हुए प्रत्याशी.

कांग्रेस B टीम है: AAP

कांग्रेस की जीत से आम आदमी पार्टी सकते में है. नॉर्थ एमसीडी में लीडर-अपोज़िशन अनिल लाकड़ा ने इस हार के बाद कहा कि कांग्रेस की आज की जीत ने बता दिया है वह बीजेपी की बी-टीम है. लेकिन AAP को इस ज़ोन में कमज़ोर करने की बीजेपी की ये रणनीति विधानसभा चुनाव में काम नहीं करने वाली.

जीत के बाद क्या बोली बीजेपी और कांग्रेस?

उत्तरी दिल्ली नगर निगम में कांग्रेस दल के नेता मुकेश गोयल ने कांग्रेस की जीत को कूटनीति और राजनीतिक सुझबूझ का नतीजा बताया. गोयल ने कहा कि अपनी नाकामी व अंदरूनी कलह से बचने के लिए AAP के नेता मनमाने आरोप लगा रहे हैं. क्योंकि आम आदमी पार्टी टूट की कगार पर है.

वहीं कांग्रेस को समर्थन देकर जिताने के बारे में उत्तरी दिल्ली नगर निगम में सदन नेता तिलक राज कटारिया का कुछ और कहना है. आजतक के रिपोर्टर अंकित यादव के मुताबिक कटारिया ने समर्थन देने के दो कारण बताए.

# पहला, महिला होने के कारण बीजेपी ने समर्थन दिया और

# दूसरा, निजी प्रयासों और संबंधों के आधार पर बीजेपी और कांग्रेस के कुछ पार्षदों ने समर्थन किया है.

कटारिया ने ये भी दावा किया कि आम आदमी पार्टी के लोग भी उनके पास समर्थन मांगने आए थे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी.

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने पिछले बार से प्रदर्शन करते हुए आम आदमी पार्टी को तीसरे पोजीशन पर ला खड़ा किया था. जानकारों के मुताबिक, लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अच्छे प्रदर्शन की वजह थी- मुस्लिम वोटरों का कांग्रेस पर भरोसा. अब बीजेपी विधानसभा चुनाव में यही समीकरण बरकरार रखना चाहती है. क्योंकि मुस्लिम वोट बैंक आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में बंट जाए तो बीजेपी का फायदा ही फायदा. राजनीतिक पंडित इस चुनाव में बीजेपी के कांग्रेस को समर्थन देने को विधानसभा की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है.

ऐसे गठबंधन पहली भी होते रहे हैं

बीजेपी-कांग्रेस का ये गठबंधन पहली बार नहीं हुआ है. इससे पहले भी स्थानीय चुनावों में ऐसा होता रहा है. साल 2018 में मिज़ोरम की चकमा स्वायत जिला परिषद के चुनाव जीतने के लिए भाजपा और कांग्रेस ने गठबंधन किया था. यहां वो सत्ताधारी मिज़ो नेशनल फ्रंट को हराना चाहते थे. इससे पहले 2009 में सिक्किम में 32 सीटों पर हुए विधानसभा चुनाव में भी भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर चुनाव लड़ा था.


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