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असम: पुलिस की गोली से घायल शख्स को कूद-कूद कर मारने वाले कैमरामैन के बारे में सब पता चल गया है

असम के दरांग जिले में 23 सितंबर को पुलिस और लोगों के बीच जमकर हिंसा हुई. कम से कम 2 लोगों की मरने और 9 पुलिसकर्मियों के घायल होने की सूचना है. इस हिंसा का जो वीडियो वायरल हो रहा है, उसमें सबसे ज़्यादा चर्चा हो रही है एक कैमरामैन की, जो हिंसा के वक्त वहां मौजूद था.

इस हिंसा से जुड़े एक वीडियो में दिख रहा है कि पुलिस पर हमला करने आ रहे एक व्यक्ति को गोली लग जाती है, जिससे वो अचेत होकर गिर जाता है. तब भी कुछ पुलिसकर्मियों के साथ ये कैमरामैन भी घायल व्यक्ति को मार रहा है. पुलिस उसे दूर करने की कोशिश करती है. लेकिन वो बार-बार वापस आता है और घायल को कूद-कूदकर पीटता रहता है.

इस बीच नई जानकारी आई है कि इस कैमरामैन को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. असम के स्पेशल डीजीपी जीपी सिंह (लॉ एंड ऑर्डर) ने देर रात ट्विटर पर ये जानकारी दी.

कौन है ये कैमरामैन?

इंडिया टुडे के असम के रिपोर्टर मनोज दत्ता के मुताबिक, इस कैमरामैन का नाम है बिजय शंकर बनिया. उन्होंने बताया कि बिजय दरांग जिले का ही एक प्राइवेट कैमरापर्सन है. वो किसी मीडिया संस्थान से नहीं जुड़ा है. मनोज दत्ता ने कहा,

बिजय बनिया असम में हुए विधानसभा चुनाव के समय से ही जिले में काफी सक्रिय रहा है. फिलहाल वो जिलाधिकारी कार्यालय के संपर्क में बना रहता है और उनके तमाम इवेंट्स में फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी करता है.

23 तारीख़ को जब पुलिस टीम ज़मीन अधिग्रहण का काम कराने और लोगों को हटाने के लिए ढोलपुर बाज़ार जा रही थी तो बिजय को साथ में पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग करने के लिए भेजा गया. वहीं पर हालात बिगड़े तो हिंसा हो गई और इसी दौरान बिजय का वीडियो सामने आया.

लोग सोशल मीडिया पर बिजय की काफी आलोचना कर रहे हैं. जैसे ओबेरॉय नाम के यूज़र ने लिखा –

बिजय बनिया. यही वो फोटोग्राफर है, जो असम में किसान की लाश पर कूद रहा था. उसे जिला प्रशासन की तरफ से कार्यवाही की वीडियोग्राफी करने के लिए हायर किया गया था. इस पर मृत शरीर के अपमान के लिए IPC की धारा 297 लगनी चाहिए और एक साल की जेल होनी चाहिए.

ट्विटर पर यूज़र इस कैमरामैन के लिए ‘आतंकवादी’ जैसे शब्द भी इस्तेमाल कर रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि पुलिस ने उसे रोका क्यों नहीं.

क्या और क्यों हुआ असम में?

घटना असम के दरांग जिले के ढोलपुर गोरुखुटी क्षेत्र की है. असम सरकार ने कुछ दिन पहले यहां की एक ज़मीन को पूरी तरह रिकवर करने और इसे स्टेट फार्मिंग प्रोजेक्ट के तहत लाने का फैसला किया था. इसी प्रोजेक्ट के लिए सरकार पहले ही करीब 4500 बीघा जमीन का अधिग्रहण कर चुकी है. बाकी ज़मीन से लोगों को हटाने के लिए असम पुलिस की टीम 23 सितंबर को ढोलपुर बाज़ार पहुंची थी. जैसे ही पुलिस यहां पहुंची, लोग उसके ख़िलाफ नारेबाजी करने लगे. देखते-देखते बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और स्थिति बिगड़ गई. भारी हंगामे के बीच लोगों और पुलिस के बीच काफी हिंसा हुई. पुलिस ने फायरिंग तक कर दी. इसी में 2 लोगों की मौत हो गई और कई पुलिसकर्मी घायल हो गए.

assam
हिंसा में घायल लोग. (तस्वीरें- आजतक/इंडिया टुडे)

न्यायिक जांच के आदेश

असम सरकार ने इस मामले में न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने इंडिया टुडे से बात करते हुए इसकी जानकारी दी. CM ने कहा –

“मैं इस पूरे घटनाक्रम की निंदा करता हूं. ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. जांच में जो भी दोषी पाया गया, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी.”

वहीं असम के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन कुमार ने कहा कि कोविड जैसी महामारी के वक्त में लोगों को हटाने की ड्राइव चलाना ही अमानवीय था, ऊपर से पुलिस ने ये वीभत्स कार्रवाई की. भूपेन ने कहा कि दरांग जिले के SP सुशांत बिस्व सरमा, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के छोटे भाई हैं इसलिए दोनों लोग मिलकर मनमानी कर रहे हैं.


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