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यूपी : बिजनौर के गांववालों ने बताया, 'पुलिस घरों में घुसकर मुस्लिमों को प्रताड़ित कर रही है'

पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं. और पुलिसिया कार्रवाई भी हो रही है. केवल यूपी में 15 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. पश्चिमी यूपी के बिजनौर जिले में स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर दिख रही है.

ऐसा क्यों? क्योंकि यहां यूपी पुलिस की फायरिंग में दो युवकों की मौत हो चुकी है. और बिजनौर के नहटौर गांव के निवासी घर छोड़कर जा रहे हैं. कह रहे हैं कि यूपी पुलिस उनके गांवों में उपद्रव कर रही है, इस वजह से गांव छोड़ना मजबूरी है.

क्यों घर छोड़ रहे हैं लोग?

बिजनौर में यूपी पुलिस का रुख सवालों के घेरे में है. बिजनौर शहर में कर्फ्यू लगा हुआ है. ऐसे में नहटौर गांव के निवासियों ने इंडिया टुडे समूह के पत्रकार मुनीश चंद्र पाण्डेय को बताया है कि पुलिस गांव में घरों में घुस रही है, तोड़फोड़ कर रही है, महिलाओं को प्रताड़ित कर रही है और उनके बच्चों को डरा रही है. पूछ रही है कि अपने घर के पुरुष सदस्यों का पता-ठिकाना बताओ.

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बिजनौर के नहटौर गांव में जब इंडिया टुडे की टीम दाखिल हुई तो घरों में बर्तन, सामान, टीवी, फ्रिज यूं टूटे हुए मिले

इंडिया टुडे की टीम एक घर में दाखिल हुई. यहां बर्तन, वॉश बेसिन, बाथरूम, फर्नीचर, फ्रिज और बाकी सामान टूटे बिखरे हुए थे. यहां मौजूद एक पड़ोसी ने बताया,

“हम लोग मुसलमान हैं, इसलिए पुलिस हमें निशाना बना रही है. हमारे घर में 8-10 पुलिसवाले आए. पूछने लगे कि हमारे घर के पुरुष कहां हैं? जब हम उन्हें बताते हैं कि हमें कोई जानकारी नहीं है, वो हमें गालियां देते हैं, महिलाओं को प्रताड़ित करते हैं और हमारे बच्चों को डराते हैं.”

बीते हफ्ते 20 दिसम्बर को जुमे की नमाज़ के बाद पूरे देश में नागरिकता संशोधन बिल को लेकर प्रदर्शन हुए. कई प्रदर्शन शांतिपूर्ण हुए तो कई प्रदर्शनों में बहुत हिंसा हुई. नहटौर गांव के एक निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया,

“जब जुमे के दिन प्रदर्शन हुए थे, तो पुलिस आई. पुलिस ने बताया कि हिंसा के बाद लगभग 3 हज़ार अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गयी है. अगर उन लोगों (पुलिसवालों) को मेरा नाम पता चलेगा कि मैंने मीडिया से बातचीत की है, वो लोग मेरे परिवार वालों को उठा लेंगे, पीटेंगे और उनके ऊपर फर्जी मुकदमा दायर कर देंगे.”

इस एरिया के और भी घर खाली थे. उनके दरवाजों पर ताला पड़ा हुआ था. पड़ोसियों की बात मानें तो लोग घर छोड़कर जा चुके हैं. पुलिस के डर से. सोचते हैं कि पुलिस वापस आएगी और उनका शोषण करेगी. स्थानीय निवासी हामिद सलमानी बताते हैं,

“पुलिस की कार्रवाई बेहद गैरपेशेवर किस्म की है, और लोग इससे डरे हुए हैं. पुलिस कह रही है कि हज़ारों लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गयी है. और अपने हिसाब से पुलिस लोगों का नाम एफआईआर में शामिल करेगी.”

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नहटौर गांव में पुलिस की कार्रवाई के बाद लोग मुंह खोलने को तैयार नहीं हैं. कह रहे हैं कि पुलिस बात करने वालों का नाम एफआईआर में डाल सकती है.

19 दिसंबर के दिन के प्रदर्शन का ज़िक्र करते हुए हामिद सलमानी बताते हैं कि दोपहर 1:15 बजे तक सब सामान्य और शांत था. नमाज़ ख़त्म हुई, और उसके बाद बिजनौर जैसे छोटे शहर का नज़ारा ही बदल गया.

“लोग मस्जिद से निकले ही थे, कि पुलिस ने लोगों से कहना शुरू किया कि वे तुरंत अपने घर जाएं. लोग जा भी रहे थे लेकिन पुलिस और एक लोकल व्यक्ति में बहस होने लगी. और फिर बातें हाथ से बाहर निकल गयीं.”

बिजनौर में हुई दो मौतों का हिसाब

21 वर्षीय अनस और 20 वर्षीय सुलेमान की मौत हो गई है. अनस के बारे में उनके पिता अरशद हुसैन ने बताया,

“अनस का बेटा सिर्फ 7 महीने का है. वो घर आया तो अनस की पत्नी ने उनके बच्चे के लिए दूध लाने को कहा. अनस अपने घर से अपने चाचा के घर जाने लगा, जो उनके घर से महज़ 50 मीटर की दूरी पर है. थोड़ी देर बाद कुछ लोग शोर मचाने लगे कि एक काले कोट पहने व्यक्ति को पुलिस ने गोली मार दी है. मैं भागकर गया तो मैंने देखा कि पुलिस फायरिंग के बीच अनस सड़क पर पड़ा हुआ है. मैंने उसे खींचा और अस्पताल लेकर भागा. अस्पताल पहुंचते-पहुंचते देर हो चुकी थी.”

अनस का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बिजनौर में अनस का अंतिम संस्कार नहीं करने दिया. पुलिस अनस की बॉडी को पोस्टमोर्टम के लिए दूसरे शहर ले गयी, और परिवार को बाध्य किया कि दूसरे कब्रगाह में अनस का शरीर दफ्न करें.

अनस, जो घर से निकला अपने बेटे के लिए दूध लाने लेकिन पुलिस द्वारा कथित रूप से “आत्मरक्षा” में चलाई गोली से मारा गया.

अरशद हुसैन ने कहा,

“पूरी रात और दोपहर तक मैं पुलिस से मांग करता रहा मेरे बेटे का शरीर मुझे वापिस सौंप दें. लेकिन पुलिस मना करती रही. कहते रहे कि हम उसे अपनी परंपरागत जगह पर दफना नहीं सकते. हारकर मैंने कहा कि अगर वो परमिशन दें, तो मैं अपने बेटे को उसके ननिहाल में दफ्न कर सकता हूं. वो यहां से 15 किलोमीटर दूर है. पुलिस ने इजाज़त दे दी, लेकिन हम पर दबाव बनाया कि हम उसे तुरंत दफनाएं. हमने उनसे दरखास्त की कि ऐसे दफनाया नहीं जाता है, कम से कम हमें परंपरा का तो अनुसरण करने दीजिए. वे मान तो गए, लेकिन शरीर फिर से ले लिया और तभी वापस किया जब हमने सारे संस्कार पूरे कर लिए.”

इस घटना के दूसरे मृतक सुलेमान. उम्र 20 साल. बिजनौर के एसपी संजीव त्यागी ने बताया कि वो कांस्टेबल मनोज कुमार की बंदूक छीन रहे थे, और कांस्टेबल मनोज कुमार ने अपनी जान बचाने के लिए सुलेमान को गोली मारी. सुलेमान को अस्पताल ले जाया गया. जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गयी. खबरें बताती हैं कि सुलेमान की आंख में गोली लगी. सुलेमान की मौत का इकरार जबसे यूपी पुलिस ने किया है, तब से कांग्रेस भी मोर्चे पर खेल रही है.कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी सुलेमान के घर गयीं, और लोगों से मुलाक़ात की.

सुलेमान की मां के साथ प्रियंका गांधी

सुलेमान के बारे में बात करते हुए उनके परिजनों ने मीडिया से कहा है कि सुलेमान का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था. हालांकि मीडिया से बातचीत में बिजनौर पुलिस ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार भी किया है. संजीव त्यागी ने कहा है,

“हम किसी निर्दोष की गिरफ्तारी नहीं कर रहे हैं. सारी गिरफ्तारियां वीडियो रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफ के आधार पर की जा रही है. हमने नहटौर गांव से 75 लोगों की गिरफ्तारियां की हैं.”

बिजनौर की जेलों में जगह नहीं

टाइम्स ऑफ़ इण्डिया में प्रकाशित खबर बताती है कि दो दिनों में पुलिस ने 146 लोगों को गिरफ्तार किया है. और वहीं बिजनौर की जेल की क्षमता 580 कैदियों को रखने की है, जहां पहले से ही 1200 कैदी भरे हुए हैं. और लोगों के आने से जेल में भीड़ होने की आशंका है. अखबार से बातचीत में डीएम रमाकांत पाण्डेय ने बताया है कि और लोगों को अगर जेल भेजना होता है तो एक अस्थायी डिटेंशन सेंटर बनाने या दूसरे जिला कारागारों में शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा. उन्होंने ये भी कहा कि अगर ज़रूरत पड़ती है तो हम कैदियों को दूसरे जिलों में भी भेजने पर विचार करेंगे.


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